Tag: Nature

Vijendra

कामना

मैंने हर ढलती साँझ के समय सदा सूर्योदय की कामना की है जब सब छोड़कर चले गए वृक्ष मेरे मित्र बने रहे खुली हवा... निरभ्र आकाश में साँस लेता...
Abstract, Head, Human

मेरी आवाज़, भेद का भाव

मेरी आवाज़ बचपन से कोशिश जारी है पर अब तक पहाड़ के पार मेरी आवाज़ नहीं जाती पहले गूँजती थी और लम्बी यात्रा कर टकराकर लौट आती थी पहाड़ के इस...
Kishan Saroj

बड़ा आश्चर्य है

नीम-तरू से फूल झरते हैँ तुम्हारा मन नहीं छूते बड़ा आश्चर्य है रीझ, सुरभित हरित-वसना घाटियों पर, व्यँग्य से हँसते हुए परिपाटियों पर, इन्द्रधनु सजते-सँवरते हैँ तुम्हारा मन नहीं छूते बड़ा आश्चर्य है गहन...
Bird, Window, Hand

पहली बार

इन दिनों कैसी झूल रही गौरेया केबल तार पर कैसा सीधा दौड़ रहा वह गली का डरपोक कुत्ता कैसे लड़ पड़े बिल्ली के बच्चे चौराहे पर ही कैसे...
jasvir tyagi

जसवीर त्यागी की कविताएँ

प्रकृति सबक सिखाती है घर के बाहर वक़्त-बेवक़्त घूम रहा था विनाश का वायरस आदमी की तलाश में आदमी अपने ही पिंजरे में क़ैद था प्रकृति, पशु-पक्षी उन्मुक्त होकर हँस रहे थे परिवर्तन का पहिया घूमता...

पंच-अतत्व

'Panchatatva', a poem by Mudit Shrivastava 'मैं ताउम्र जलती रही दूसरों के लिए, अब मुझमें ज़रा भी आग बाक़ी नहीं' आग ने यह कहकर जलने से इंकार कर दिया 'मैं बाहर...

प्रकृति का प्रेम

कंकरीट जलता है जलाता है शहर को चिलचिलाती दोपहर में हाड़ तपती है सड़क पर, परिंदा उड़ता है, पंख अपने जलाता है तड़प कर प्राण रह जाती उसकी पानी की...

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RECENT POSTS

Rahul Sankrityayan

तुम्हारी जात-पाँत की क्षय

हमारे देश को जिन बातों पर अभिमान है, उनमें जात-पाँत भी एक है। दूसरे मुल्कों में जात-पाँत का भेद समझा जाता है भाषा के...
Anujeet Iqbal

उसका होना

उसके नाम की प्रतिध्वनि किसी स्पन्दन की तरह मन की घाटी में गहरी छुपी रही और मैं एक दारुण हिज्र जीती रही वेदना, व्याकुलता के मनोवेगों में त्वरित बिजुरी की...
Do Log - Gulzar

गुलज़ार के उपन्यास ‘दो लोग’ से किताब अंश

गुलज़ार का उपन्यास 'दो लोग' विभाजन की त्रासदी के बारे में है—त्रासदी भी ऐसी कि इधर आज़ादी की बेला आने को है, और उधर...
Neelabh

जहाँ मैं साँस ले रहा हूँ अभी

जहाँ मैं साँस ले रहा हूँ अभी वहाँ से बहुत कुछ ओझल है ओझल है हत्यारों की माँद ओझल है संसद के नीचे जमा होते किसानों के ख़ून...
Kaynaat

कायनात की कविताएँ

1 इश्क़, तुम मेरी ज़िन्दगी में आओ तो यूँ आओ कि जैसे किसी पिछड़े हुए गाँव में कोई लड़की घण्टों रसोई में खपने के बाद पसीने से भीगी बाहर...
Uberto Stabile

स्पेनिश कवि उबेरतो स्तबिल की कविताएँ

उबेरतो स्तबिल, स्पेनिश कवि और चर्चित अंतर्राष्ट्रीय स्पेनिश पत्रिका के सम्पादक हैं, उनकी कई किताबें प्रकाशित और अनूदित हो चुकी हैं। अनुवाद: पंखुरी सिन्हा एक पाठक...
Pooja Shah

पूजा शाह की कविताएँ

पाज़ेब पाज़ेब पाँवों में नहीं स्तनों पर पहनने से सार्थक होंगी जब औरतें क़दम रखती हैं पकौड़ियों की थाली लिए आदमियों से भरे कमरे में उनकी गपशप के बीच या जब...
Kailash Gautam

कविता मेरी

आलम्बन, आधार यही है, यही सहारा है कविता मेरी जीवन शैली, जीवन धारा है। यही ओढ़ता, यही बिछाता यही पहनता हूँ सबका है वह दर्द जिसे मैं अपना कहता...
Vijay Sharma

क़ब्ल-अज़-तारीख़

सुबह से माँ के घुटनों का दर्द तेज़ था। पिछली रात देसी बाम, गरम पानी और तेल का कोई ख़ास असर नहीं हुआ। इधर...
Lucilla Trappazzo

लुचिल्ला त्रपैज़ो की कविताएँ

लुचिल्ला त्रपैज़ो स्विस इतालवी कवयित्री हैं। उनके चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उनकी रचनाएँ कई भाषाओं में अनूदित भी हो चुकी...
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