Tag: Old Age

Old age, Loneliness, Room, Woman

बीना अम्मा के नाम

दिन के दूसरे पहर जब सो चुका होता दुआरे का शमी महुए थक जाते किसी बिसाती की बाट जोहते हुए पोखरे का पानी ठहर जाता गरड़िये के...
Javed Akhtar

मेले

बाप की उँगली थामे इक नन्हा-सा बच्चा पहले-पहल मेले में गया तो अपनी भोली-भाली कंचों जैसी आँखों से इक दुनिया देखी ये क्या है और वो क्या है सब उसने पूछा बाप...
Nirmal Gupt

रेहन पर बीमार बूढ़ा

बीमार बूढ़े के दोनों पैर बंधे हैं अस्पताल के पलंग से इलाज का बिल चुकाए बिना कहीं वह देह से फ़रार न हो जाए हाथ उसके...
Harivansh Rai Bachchan

तीसरा हाथ

एक दिन कातर हृदय से, करुण स्वर से, और उससे भी अधिक डब-डब दृगों से, था कहा मैंने कि मेरा हाथ पकड़ो क्योंकि जीवन पन्थ के अब कष्ट एकाकी नहीं जाते सहे और तुम भी...
Old Woman

दादी माँ

'Dadi Maa', a poem by Kailash Manhar सीलन भरी कोठरी के अँधेरे कोने में कुछ चिथड़े बिखरे हैं लाल, पीले, काले, सफ़ेद सादे और फूलोंदार घाघरे लूगड़ी और सूती धोतियाँ पेटीकोट कुछ अपने...
Old woman, Old age

उम्र के साथ-साथ

'Umr Ke Sath Sath', a poem by Nirmal Gupt उम्र चेहरे तक आ पहुँची कण्ठ में भी शायद जिह्वा पर अम्ल बरक़रार है शेष है अभी भी हथेलियों...
Old Man with tea, Old Age

साठ पार का आदमी

'Saath Paar Ka Aadmi', a poem by Nirmal Gupt साठ पार के आदमी को घुटने मोड़ कर चारपाई पर बैठे रहना चाहिए उठते-बैठते हर बार ज़ोर से कराहना...
Maya Angelou

मुझे मत दिखाना अपनी दया

'On Aging', a poem by Maya Angelou, from 'And Still I Rise' अनुवाद: अनुराग तिवारी जब तुम मुझे ऐसे शांत बैठे देखोगे जैसे अलमारी में छूटा कोई...
Old Man with tea, Old Age

चाय की दुकान और बूढ़ा

नुक्कड़ वाली चाय की दुकान में, सुबह, मुँह अँधेरे ही आ जाती है जब एक बीमार बूढ़ा वहाँ चला आता है अपने पाँव घसीटता। एक ठण्डी रात में से गुज़रकर ज़िन्दा...
budhape par kavita

बुढ़िया का कटोरा

मन में उठे दो भाव, एक के बाद एक, देखा जब मैंने एक बुढ़िया को, बैठी थी जो एक बड़े पुराने मंदिर के बाहर, लिए हुए अपने हाथों में एक...
Suryakant Tripathi Nirala

मैं अकेला

मैं अकेला; देखता हूँ, आ रही मेरे दिवस की सान्ध्य बेला। पके आधे बाल मेरे हुए निष्प्रभ गाल मेरे, चाल मेरी मन्द होती आ रही, हट रहा मेला। जानता हूँ, नदी-झरने जो...
Chitra Mudgal

तर्पण

"यह क्या किया आपने पापाजी? बैठक में मम्मीजी की तसवीर टाँग दी? मम्मीजी की तसवीर कोई सैयद हैदर रजा की पेंटिंग है क्या? कितनी भद्दी लग रही है दीवार! सोचा था, साठ-सत्तर हजार जोड़ लूँगी तो रजा की एक पेंटिंग खरीद कर लाकर यहाँ टाँग दूँगी। न होगा तो उनकी किसी पेंटिंग का पोस्टर ही खरीद कर मढ़वा लूँगी। लग जाएँगे चार-चाँद बैठक की कलात्मकता में। ईर्ष्या करेंगे अड़ोसी-पड़ोसी। उनके घर की दीवार पर रजा की पेंटिंग सजी हुई है।"

STAY CONNECTED

32,286FansLike
10,637FollowersFollow
20,710FollowersFollow
629SubscribersSubscribe

Recent Posts

Vijay Sharma

घोष बाबू और उनकी माँ

"हम यहाँ से निकलकर कहाँ जाएँगे?" — शिल्पा ने अनिमेष के कंधे पर सिर रक्खे कहा। "जहाँ क़िस्मत ले जाए!" — अनिमेष की आवाज़ में...
Ahmad Faraz

ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें

ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें साक़िया साक़िया सम्भाल हमें रो रहे हैं कि एक आदत है वर्ना इतना नहीं मलाल हमें ख़ल्वती हैं तेरे जमाल के हम आइने...
Ghumakkad Shastra

राहुल सांकृत्यायन – ‘घुमक्कड़ शास्त्र’

राहुल सांकृत्यायन की किताब 'घुमक्कड़ शास्त्र' से उद्धरण | Quotes from Ghumakkad Shastra, a book by Rahul Sankrityayan चयन: पुनीत कुसुम "वैसे तो गीता को बहुत...
Rahul Sankrityayan

स्‍मृतियाँ

घुमक्कड़ असंग और निर्लेप रहता है, यद्यपि मानव के प्रति उसके हृदय में अपार स्‍नेह है। यही अपार स्‍नेह उसके हृदय में अनंत प्रकार...
Yehuda Amichai

और हम उत्साहित नहीं होंगे

Poem: And We Shall Not Get Excited Poet: Yehuda Amichai Translated from the Hebrew by Barbara and Benjamin Harshav अंग्रेज़ी से अनुवाद: सृष्टि ठाकुर और हम उत्साहित नहीं...
Hands. Separation

कभी न लौटने के लिए मत जाना

सुनो! जब जाना तो इस तरह मत जाना कि कभी लौट न सको उन्हीं रास्तों पर वापस जाते हुए गिराते जाना रास्ते में ख़त का पुर्ज़ा, कोई...
Rabindranath Tagore

साहित्य की सामग्री

राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित 'साहित्य विधाओं की प्रकृति' से  अनुवाद : वंशीधर विद्यालंकार केवल अपने लिए लिखने को साहित्य नहीं कहते हैं—जैसे पक्षी अपने आनंद के...
Faiz Ahmad Faiz

इस वक़्त तो यूँ लगता है

इस वक़्त तो यूँ लगता है, अब कुछ भी नहीं है महताब न सूरज, न अँधेरा न सवेरा आँखों के दरीचों पे किसी हुस्न की चिलमन और...
Bheedtantra - Asghar Wajahat

‘भीड़तंत्र’ से दो लघु कहानियाँ

राजपाल एण्ड सन्ज़ से प्रकाशित असग़र वजाहत की किताब 'भीड़तंत्र' से साभार स्वार्थ का फाटक —“हिंसा का रास्ता कहाँ से शुरू होता है?” —“जहाँ से बातचीत का...
Pratibha Sharma

लाल रिबन

मेरे गाँव में सफ़ेद संगमरमर से बनी दीवारें लोहे के भालों की तरह उगी हुई हैं जिनकी नुकीली नोकों में नीला ज़हर रंगा हुआ है खेजड़ी के ईंट-चूने...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)