Tag: poetry

Sanjay Chhipa

संजय छीपा की कविताएँ

1 कुरेदता हूँ स्मृतियों की राख कि लौट सकूँ कविता की तरफ़ एक नितान्त ख़ालीपन में उलटता-पलटता हूँ शब्दों को एक सही क्रम में जमाने की करता हूँ कोशिश ज़िन्दगी की बेतरतीबी...
Ashok Vajpeyi

स्थगित नहीं होगा शब्द

स्थगित नहीं होगा शब्द— घुप्प अंधेरे में चकाचौंध में बेतहाशा बारिश में चलता रहेगा प्रेम की तरह, प्राचीन मन्दिर में सदियों पहले की व्याप्त प्रार्थना की तरह— स्थगित नहीं होगा शब्द— मौन की...
Kirti Chaudhary

कविताई काम नहीं आती

अब कविताई अपनी कुछ काम नहीं आती मन की पीड़ा, झर-झर शब्दों में झरती थी है याद मुझे जब पंक्ति एक हलचल अशान्ति सब हरती थी यह क्या से क्या...
Man, Peace

मृत्यु को नींद कहूँगा

अंतिम कविता मृत्यु पर नहीं लिखूँगा लिखूँगा जीवन पर 'अंधेरा है' को कहूँगा 'प्रकाश की अनुपस्थिति-भर' धोखे के क्षणों में याद करूँगा बारिश, हवा, सूरज मेरे अंदर जन्मती घृणा को बारिश...
Manbahadur Singh

कविता के बहाने

नहीं मिली मुझे कविता किसी मित्र की तरह अनायास मैं ही गया कविता के पास अपने को तलाशता—अपने ख़िलाफ़ कविता जैसा अपने को पाने! आँधी के पहले ललौंछ आकाश हुमशता...
Anamika Anu

कविताएँ: अक्टूबर 2020

तुम्हारा सम, मेरा विषम है तुम मिले अब तक नहीं मुझसे चार दशक से हम भाई-बहन हैं तुम माँ के बेटे हो मैं बेटी हूँ बाग़ी हम दोनों के...
Om Purohit Kagad

फिर कविता लिखें

आओ आज फिर कविता लिखें कविता में लिखें प्रीत की रीत ...जो निभ नहीं पायी या कि निभायी नहीं गई! कविता में आगे रोटी लिखें जो बनायी तो गई मगर खिलायी नहीं गई! रोटी के बाद कफ़न-भर कपड़ा...
Nand Kishore Acharya

प्रेम-कविता

कोई शब्द विलोम नहीं होता किसी शब्द का वह अपना आप होता है जब तक बलात् तुम उसे दूसरे से भिड़ाओ नहीं कविता भिड़ाती नहीं साथ-साथ करती है शब्दों को —उनको भी विलोम...
Woman from village

जुहार करती हुईं

पहले उसने कहा— भई! मैं कविताएँ सुन-सुनकर बड़ा हुआ हूँ हमारे लड़ दादा कवि थे हमारे पड़ दादा कवि थे हमारे दादा महाकवि थे पिता जी अनेकों पुरस्कारों से नवाज़े...
Kumar Vikal

दुःखी दिनों में

दुःखी दिनों में आदमी कविता नहीं लिखता दुःखी दिनों में आदमी बहुत कुछ करता है लतीफ़े सुनाने से ज़हर खाने तक लेकिन वह कविता नहीं लिखता दुःखी दिनों...
Venu Gopal

कौन बचता है

जहाँ इस वक़्त कवि है कविता है, वहाँ जंगल है और अँधेरा है और हैं धोखेबाज़ दिशाएँ। दुश्मन सेनाओं से बचने की कोशिश में भटकते-भटकते वे यहाँ आ फँसे हैं, जहाँ से इस वक़्त न...
Amar Dalpura

काम, गंगाराम कुम्हार

काम मेरे पास दो हाथ हैं— दोनों काम के अभाव में तन से चिपके निठल्ले लटके रहते हैं! इस देश की स्त्रियों के पास इतने काम हैं— भोर से...

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Waiting, Train, Girl, Window, Thinking, Alone, Lonely

अपने उद्देश्य के लिए

एशट्रे में इकट्ठे हुए सिगरेट के ठूँठों को चुपचाप गिनने की कोशिश में वह समय के गुच्छों में उलझी अनेक आकृतियाँ देख रहा है आँखों में कोई...
Gardening, Soil, Planting

मिट्टी का दर्शन

आत्मा अमर और मिट्टी नश्वर यह बिना देखे का दर्शन बिल्कुल झूठा है! आत्मा की अमरता कब, किसने देखी! मिट्टी को, किन्तु, सदैव हमने देखा। मिट्टी में मानवता...
Kahlil Gibran

खलील जिब्रान – ‘नास्तिक’

"सत्य सितारे होते हैं जिन्हें तुम केवल रात के अँधेरे में ही देख सकते हो।" "सत्य सृष्टि की उन तमाम ख़ूबसूरत चीज़ों की तरह है,...
Amarkant

पलाश के फूल

नये मकान के सामने पक्की चहारदीवारी खड़ी करके जो अहाता बनाया गया है, उसमें दोनों ओर पलाश के पेड़ों पर लाल-लाल फूल छा गए...
Harish Bhadani

सभी सुख दूर से गुज़रें

सभी सुख दूर से गुज़रें गुज़रते ही चले जाएँ मगर पीड़ा उमर भर साथ चलने को उतारू है! हमको सुखों की आँख से तो बाँचना आता नहीं हमको...
Kumar Nayan

पाँव कटे बिम्ब

घिसटते हैं मूल्य बैसाखियों के सहारे पुराने का टूटना नये का बनना दीखता है—सिर्फ़ डाक-टिकटों पर लोकतंत्र की परिभाषा क्या मोहताज होती है लोक-जीवन के उजास हर्फ़ों की? तो फिर क्यों दीखते...
Sanjay Chhipa

संजय छीपा की कविताएँ

1 कुरेदता हूँ स्मृतियों की राख कि लौट सकूँ कविता की तरफ़ एक नितान्त ख़ालीपन में उलटता-पलटता हूँ शब्दों को एक सही क्रम में जमाने की करता हूँ कोशिश ज़िन्दगी की बेतरतीबी...
David Michelangelo

टोनी मोंगे की कविता ‘डेविड’ (माइकलेंजेलो की प्रसिद्ध कलाकृति ‘डेविड’ को सम्बोधित)

टोनी मोंगे अमेरिकी नागरिक हैं जो ताइवान में अंग्रेज़ी अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। टोनी का जन्म बॉस्टन में हुआ था और वे...
Khwaja Ahmad Abbas - Krishan Chander

‘अब्बास : व्यक्तित्व और कला’ — ख़्वाजा अहमद अब्बास से कृश्न चन्दर की बातचीत

ख़्वाजा अहमद अब्बास से कृश्न चन्दर की बातचीत 'मुझे कुछ कहना है' से साभार कृश्न—अपनी जन्म-तिथि याद है? मेरा मतलब साहित्यिक जन्म-तिथि से है। अब्बास—यों तो मैं...
Saadat Hasan Manto

साढ़े तीन आने

"मैंने क़त्ल क्यों किया। एक इंसान के ख़ून में अपने हाथ क्यों रंगे, यह एक लम्बी दास्तान है। जब तक मैं उसके तमाम अवाक़िब...
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