Tag: Protest

Paash

लोहा

आप लोहे की कार का आनन्द लेते हो मेरे पास लोहे की बन्दूक़ हैमैंने लोहा खाया है आप लोहे की बात करते हो लोहा जब पिघलता है तो भाप नहीं...
Habib Jalib

अपनी जंग रहेगी

जब तक चंद लुटेरे इस धरती को घेरे हैं अपनी जंग रहेगी अहल-ए-हवस ने जब तक अपने दाम बिखेरे हैं अपनी जंग रहेगीमग़रिब के चेहरे पर यारो...
Balli Singh Cheema

रोटी माँग रहे लोगों से

रोटी माँग रहे लोगों से किसको ख़तरा होता है? यार सुना है लाठी-चारज, हल्का-हल्का होता है।सिर फोड़ें या टाँगें तोड़ें, ये क़ानून के रखवाले, देख रहे हैं...
Fight, Oppression, Beating

कायरों का गीत

शोर करोगे! मारेंगे बात कहोगे! मारेंगे सच बोलोगे! मारेंगे साथ चलोगे! मारेंगे ये जंगल तानाशाहों का इसमें तुम आवाज़ करोगे? मारेंगे...जो जैसा चलता जाता है, चलने दो दीन-धरम के नाम...
Vidrohi

जन-प्रतिरोध

जब भी किसी ग़रीब आदमी का अपमान करती है ये तुम्हारी दुनिया, तो मेरा जी करता है कि मैं इस दुनिया को उठाकर पटक दूँ! इसका गूदा-गूदा छींट जाए।मज़ाक़ बना...
Kedarnath Agarwal

प्रश्न

मोड़ोगे मन या सावन के घन मोड़ोगे? मोड़ोगे तन या शासन के फन मोड़ोगे? बोलो साथी! क्या मोड़ोगे?तोड़ोगे तृण या धीरज धारण तोड़ोगे? तोड़ोगे प्रण या भीषण शोषण तोड़ोगे? बोलो साथी! क्या...
Ali Sardar Jafri

कौन आज़ाद हुआ

कौन आज़ाद हुआ? किसके माथे से ग़ुलामी की सियाही छूटी?मेरे सीने में अभी दर्द है महकूमी का मदर-ए-हिन्द के चेहरे पे उदासी है वही ख़ंजर आज़ाद हैं...
Man walking in front of a wall

मांडणे और नारे

जब तक आदमी के हाथ और आँखें हैं आँखों में धरती, आकाश, फूल, पत्ती हैं दूध, दही, नगाड़े, बेटे, बेटी हैं गाड़ी, बैल, मोर, चिड़ियाँ, चाँद, तारे...
Strike, Protest, Dissent

हड़ताल का गीत

आज हम हड़ताल पर हैं। हड्डियों से जो चिपककर रह गई, उस खाल पर हैं।यह ख़बर सबको सुना दो इश्तहारों में लगा दो हम लड़ाई पर खड़े...
Shailendra

हर ज़ोर-ज़ुल्म की टक्कर में

Har Zor Zulm Ki Takkar Mein | Shailendraहर ज़ोर-ज़ुल्म की टक्कर में, हड़ताल हमारा नारा है!तुमने माँगे ठुकरायी हैं, तुमने तोड़ा है हर वादा छीनी हमसे...
Fist, Protest, Dissent

वो घर तक आएँगे

सरेंडर-मार्च कराया जाए लोकतंत्र माई लार्ड न्याय की शर्त लगाएँ जब वर्दी हाँक रही संविधान लहराती मुठ्ठियाँ नहीं चलेंगी।चश्मे नहीं उतरने चाहिए आँख नहीं मींची जाएँ इस रात का अवसान...
Fist, Protest, Dissent

अंकित कुमार भगत की कविताएँ

Poems: Ankit Kumar Bhagat प्रतिरोध काले गुलाब और स्याह परछाइयों के बाद, कालिख पुती दीवारें इस दौर की विशेषताएँ हैं। अँधेरा गहराता ही जाता है, कि असहमतियों को आज़माने की इजाज़त नहीं यहाँ।विद्रोह...

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Man holding train handle

आधुनिकता

मैं इक्कीसवीं सदी की आधुनिक सभ्यता का आदमी हूँ जो बर्बरता और जंगल पीछे छोड़ आया हैमैं सभ्य समाज में बेचता हूँ अपना सस्ता श्रम और दो वक़्त की...
Justyna Bargielska

यूस्टीना बारगिल्स्का की कविताएँ

1977 में जन्मीं, पोलिश कवयित्री व उपन्यासकार यूस्टीना बारगिल्स्का (Justyna Bargielska) के अब तक सात कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्हें दो...
Saadat Hasan Manto

ख़ुशिया

ख़ुशिया सोच रहा था।बनवारी से काले तम्बाकूवाला पान लेकर वह उसकी दुकान के साथ लगे उस संगीन चबूतरे पर बैठा था जो दिन के...
Naresh Mehta

घर की ओर

वह— जिसकी पीठ हमारी ओर है अपने घर की ओर मुँह किये जा रहा है जाने दो उसे अपने घर।हमारी ओर उसकी पीठ— ठीक ही तो है मुँह यदि होता तो...
Upma Richa

या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
Manish Kumar Yadav

लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
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