Tag: बारिश

Mithileshwar

बारिश की रात

आरा शहर। भादों का महीना। कृष्ण पक्ष की अँधेरी रात। ज़ोरों की बारिश। हमेशा की भाँति बिजली का गुल हो जाना। रात के गहराने...
Naresh Saxena

इस बारिश में

जिसके पास चली गई मेरी ज़मीन उसी के पास अब मेरी बारिश भी चली गईअब जो घिरती हैं काली घटाएँ उसी के लिए घिरती हैं कूकती हैं कोयलें...
Rain

ईश्वरीय चुम्बन

बारिश की भारी बूँदों से भयभीत झोपड़ी भीतर भागती है, एक मात्र तिरपाल के छेदों को ढकना उसकी आपातकालीन व्यवस्था हैमहल झरोखों से मुख निकाल आँखें मूँदकर बूँद-बूँद चूसता है यह उसका...
Rain

मॉनसून

आठ आषाढ़ गया मृगशिरा ने लिखा ख़त आर्द्रा कोवो आना चाहती है हमारे खेत, हमारे घरउसे चाहिए मंज़ूरी हमसे हम तपे हुए हैं, पिघलते हैं, परेशान हैं पर नहीं...
Anamika

बरसात का मतलब है

बरसात का मतलब है हो जाना दूर और अकेला। उतरती है साँझ तक बारिश— लुढ़कती-पुढ़कती, दूरस्थ— सागर-तट या ऐसी चपटी जगहों से चढ़ जाती है वापस जन्नत तक जो इसका घर...
Clouds

मेघ न आए

मेघ न आए।सूखे खेत किसानिन सूखे, सूखे ताल-तलैयाँ, भुइयाँ पर की कुइयाँ सूखी, तलफ़े ढोर-चिरैयाँ। आसमान में सूरज धधके, दुर्दिन झाँक रहे। बीज फोड़कर निकले अंकुर ऊपर ताक रहे।मेघ न आए।सावन...
Prabhat Milind

बारिश के दिनों में नदी का स्मृति-गीत

'Barish Ke Dino Mein Nadi Ka Smriti Geet', Hindi Kavita by Prabhat Milind 1 स्वप्न में बहती है चौड़े पाट की एक नदी बेआवाज़ याद का कंकड़...
Spring, Flowers

अंतरा

बूँदें उतरी हैं धरा पर, मन पनीले हो गए हैं शुष्क सी हिय वीथियों के कोर गीले हो गए हैं तरु लताऐं दूब फसलें मुस्कुराती हैं...
Leaf, Rain, Night

तन्हाई की पहली बारिश

रात भर बरसता रहा पानी मैं अँधेरा किए अपनी कुर्सी में खिड़की से ज़रा दूर हटकर बैठा रहाबारिश कभी कम, कभी तेज़ बरसती रही, पेड़ों की चीख़ कभी दूर, कभी...
Rain

बारिश के बाद

'Barish Ke Baad', a poem by Vijay Rahiबारिश के बाद बबूल के पेड़ के नीचे से अपनी बकरियों को हाँक वह मुझसे मिलने आई। दूर नीम के पेड़...

बारिश

बारिश! पुनः प्रतीक्षा की बेला के पार तुम लौट आई हो असीम शांति धारण किए हुए... तुम्हारे बरसने के शोर में समाया है समूची प्रकृति का सन्नाटा... तुम्हीं तो रचती हो सम्पूर्ण...
Rain

बारिश और माँ

'Barish Aur Maa', Hindi Kavita by Vijay Rahiजब बारिश होती है सब कुछ रुक जाता है सिर्फ़ बारिश होती हैरुक जाता है बच्चों का रोना चले जाते हैं...

STAY CONNECTED

38,332FansLike
19,561FollowersFollow
27,467FollowersFollow
1,610SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Upma Richa

या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
Manish Kumar Yadav

लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
premchand

सवा सेर गेहूँ

किसी गाँव में शंकर नाम का एक कुरमी किसान रहता था। सीधा-सादा ग़रीब आदमी था, अपने काम-से-काम, न किसी के लेने में, न किसी...
Unsocial Network - Dilip Mandal, Geeta Yadav

वे आपके बारे में बहुत ज़्यादा जानते हैं (किताब अंश: अनसोशल नेटवर्क)

'अनसोशल नेटवर्क' किताब भारत के विशिष्ट सन्दर्भों में सोशल मीडिया का सम्यक् आकलन प्रस्तुत करती है। जनसंचार का नया माध्यम होने के बावजूद, सोशल...
Prayers, Joined Hands

अनुत्तरित प्रार्थना

'परिवर्तन प्रकृति का नियम है' यह पढ़ते-पढ़ाते वक़्त मैंने पूरी शिद्दत के साथ अपने रिश्तों में की स्थिरता की कामनाप्रकृति हर असहज कार्य भी पूरी सहजता के...
Women sitting

अठन्नी, चवन्नी और क्रमशः

इस बार उन्हें नहीं था मोह स्वर्ण-मृग का फिर भी खींची गई थीं लक्ष्मण रेखाएँवे पढ़ीं, आगे बढ़ीं लक्ष्मण रेखाएँ लाँघकर रावण से जा भिड़ींगूँजते आए थे स्वर नेपथ्य...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)