Tag: Rajkamal Choudhary

Rajkamal Chaudhary

पहली कविता की आख़िरी शाम

पहली कविता की आख़िरी शाम नीले दरख़्तों के साए में तुम्हारे बेचैन हाथ पीले पड़ते हुए। क्राटन के लम्बे पत्तों की तरह हिलते हैं यों दरख़्त भव्य काले हैं घनी...
Rajkamal Chaudhary

रिक्शे पर एक सौ रातें

गरदन के नीचे से खींच लिया हाथ। बोली—अंधकार हयनि (नहीं हुआ है)! सड़कों पर अब तक घर-वापसी का जुलूस। दफ़्तर, दुकानें, अख़बार अब तक सड़कों पर। किसी मन्दिर के...
Rajkamal Chaudhary

अनायास

फिर भी कभी चला जाऊँगा उसी दरवाज़े तक अनायास जैसे, उस अँधियारे गलियारे में कोई अब तक रहता हो। फिर भी, दीवार की कील पर अटका...
Rajkamal Chaudhary

नींद में भटकता हुआ आदमी

नींद की एकान्त सड़कों पर भागते हुए आवारा सपने सेकेण्ड शो से लौटती हुई बीमार टैक्सियाँ भोथरी छुरी जैसी चीख़ें बेहोश औरत की ठहरी हुई आँखों की...
Rajkamal Chaudhary

चाय के प्याले में

दुःख करने का असली कारण है : पैसा— पहले से कम चीज़ें ख़रीदता है। कश्मीरी सेव दिल के मरीज़ को चाहिए तो क्या हुआ? परिश्रम अब पहले से...
Rajkamal Chaudhary

रात्रिदग्ध एकालाप

1बारूद के कोहरे में डूब गए हैं पहाड़, नदी, मकान, शहर के शहर। बीवी से छिपाकर बैंक में पैसे डालने का मतलब नहीं रह गया है अब।2मुझे चुप...
Rajkamal Chaudhary

बन्द कमरे में क़ब्रगाह

आदमी कुछ कहना चाहता है मगर एक ऐसा क्षण भी आता है जब उसकी आवाज़ सीने में दबी रह जाती है और वह कह...
Rajkamal Chaudhary

कंकावती

राजकमल चौधरी के कविता संग्रह 'कंकावती' से कविताएँ | Poems from 'Kankavati', a poetry collection by Rajkamal Chaudhary समय के बीते हुए से प्राप्त कर लेना...
Rajkamal Chaudhary

व्याकरण का तृतीय पुरुष

राजकमल चौधरी की कहानी 'व्याकरण का तृतीय पुरुष' | 'Vyakaran Ka Tritiya Purush', a story by Rajkamal Chaudharyसुभाष जानता है। सुभाष जानना नहीं चाहता...
Rajkamal Chaudhary

इस अकाल बेला में

होश की तीसरी दहलीज़ थी वो हाँ! तीसरी ही तो थी, जब तुम्हारी मुक्ति का प्रसंग कुलबुलाया था पहली बार मेरे भीतर अपनी तमाम तिलमिलाहट लिए दहकते लावे सा पैवस्त होता...
Rajkamal Chaudhary

तुम मुझे क्षमा करो

'Tum Mujhe Kshama Karo', a poem by Rajkamal Choudharyबहुत अँधी थीं मेरी प्रार्थनाएँ। मुस्कुराहटें मेरी विवश किसी भी चन्द्रमा के चतुर्दिक उगा नहीं पायी आकाश-गंगा लगातार फूल...चन्द्रमुखी! बहुत अँधी थीं मेरी प्रार्थनाएँ। मुस्कुराहटें मेरी...
Dhoomil

राजकमल चौधरी

सोहर की पंक्तियों का रस (चमड़े की निर्जनता को गीला करने के लिए) नये सिरे से सोखने लगती हैं जाँघों में बढ़ती हुई लालचे से भविष्य के रंगीन...

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आधुनिकता

मैं इक्कीसवीं सदी की आधुनिक सभ्यता का आदमी हूँ जो बर्बरता और जंगल पीछे छोड़ आया हैमैं सभ्य समाज में बेचता हूँ अपना सस्ता श्रम और दो वक़्त की...
Justyna Bargielska

यूस्टीना बारगिल्स्का की कविताएँ

1977 में जन्मीं, पोलिश कवयित्री व उपन्यासकार यूस्टीना बारगिल्स्का (Justyna Bargielska) के अब तक सात कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्हें दो...
Saadat Hasan Manto

ख़ुशिया

ख़ुशिया सोच रहा था।बनवारी से काले तम्बाकूवाला पान लेकर वह उसकी दुकान के साथ लगे उस संगीन चबूतरे पर बैठा था जो दिन के...
Naresh Mehta

घर की ओर

वह— जिसकी पीठ हमारी ओर है अपने घर की ओर मुँह किये जा रहा है जाने दो उसे अपने घर।हमारी ओर उसकी पीठ— ठीक ही तो है मुँह यदि होता तो...
Upma Richa

या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
Manish Kumar Yadav

लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
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