Tag: Republic Day

Harishankar Parsai

ठिठुरता हुआ गणतंत्र

"रेडियो टिप्पणीकार कहता है - 'घोर करतल-ध्वनि हो रही है।' मैं देख रहा हूँ, नहीं हो रही है। हम सब तो कोट में हाथ डाले बैठे हैं। बाहर निकालने का जी नहीं हो रहा है। हाथ अकड़ जाएँगे। लेकिन हम नहीं बजा रहे हैं, फिर भी तालियाँ बज रहीं हैं।"
Zafar Ali Khan

हिन्दोस्तान

नाक़ूस से ग़रज़ है न मतलब अज़ाँ से है मुझ को अगर है इश्क़ तो हिन्दोस्ताँ से है तहज़ीब-ए-हिन्द का नहीं चश्मा अगर अज़ल ये मौज-ए-रंग-रंग फिर...
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