Tag: River

Love, Couple

नीरव की कविताएँ

1 ढहते थे पेड़ रोती थी पृथ्वी हँसता था आदमी मरती थी नदी बिलखता था आकाश हँसता था आदमी टूटता था संगीत बुझता था प्रकाश हँसता था आदमी टूट रहा है आदमी बुझ रहा है...
Woman, River

यह नदी

यह नदी रोटी पकाती है हमारे गाँव में। हर सुबह नागा किए बिन सभी बर्तन माँजकर, फिर हमें नहला-धुलाकर नैन ममता आँजकर यह नदी अंधन चढ़ाती है हमारे गाँव में। सूखती-सी क्यारियों में फूलगोभी बन हँसे, गंध धनिए में सहेजे, मिर्च...
Ram Dayal Munda

राम दयाल मुण्डा की कविताएँ

सूखी नदी/भरी नदी सूखी नदी एक व्यथा-कहानी जब था पानी तब था पानी! भरी नदी एक सीधी कहानी ऊपर पानी, नीचे पानी। विरोध उसे बाँधकर ले जा रहे थे राजा के सेनानी और नदी छाती पीटकर...
Kailash Vajpeyi

क्षणिकाएँ : कैलाश वाजपेयी

स्पन्दन कविता हर आदमी अपनी समझ-भर समझता है ईश्वर एक कविता है! मोमिन पूजाघर पहले भी होते थे, हत्याघर भी पहले होते थे हमने यही प्रगति की है दोनों को एक में मिला दिया। आदिम...
Rohit Thakur

नदी

नदी : नौ कविताएँ 1 नदी को देखना नदी को जानना नहीं है नदी को छूना नदी को पाना नहीं है नदी के साथ सम्वाद नदी की तरह भीगना नहीं है नदी...
Sea Beach Water Evening Sunset

नदी और सागर

'Nadi Aur Sagar', a poem by Rupam Mishra एक दिन शरद की सुहानी-सी रात थी प्रकृति ने ज्योत्स्ना के साथ जैसे प्रणय भी बिखेर दिया था वातावरण...
Posham Pa

नदी से रिश्ता

'Nadi Se Rishta', a poem by Rag Ranjan तब तक नहीं होता अकेलेपन का एहसास जब तक ठहरी नदी में कोई हलचल न हो, किनारे लगी नाव चुप देखती है हवा...
Deepak Jaiswal

लूनी नदी

'Looni Nadi', a poem by Deepak Jaiswal अमूमन नदियाँ समंदर में जाकर मिल जाती हैं— पूर्णता को धारण करते हुए एक सुंदर जीवन जीते हुए। लेकिन कुछ नदियों...
Prabhat Milind

बारिश के दिनों में नदी का स्मृति-गीत

'Barish Ke Dino Mein Nadi Ka Smriti Geet', Hindi Kavita by Prabhat Milind 1 स्वप्न में बहती है चौड़े पाट की एक नदी बेआवाज़ याद का कंकड़...
Woman Standing near River, making Love sign

अनुवाद तुम

आँखों की नमी प्रेम की भाषा है। भाषा एक नदी है, नदी पानी का अनुवाद। अनुवाद दो किनारों का संवाद है, संवाद के लिए जरूरी नहीं भाषा। प्रेम की एक ही भाषा है, 'तुम'...
Samay Ki Nadi Par Pul Nahin Hota - Rahul Boyal

समय की नदी पर पुल नहीं होता (कविता संग्रह)

रोटी प्रेम और भूख पशु आजकल प्रेम जहाँ दो प्रेमी रहते हों तुम और मैं एक दिन अनुत्तरित पत्थर और पानी व्याकरण  
Bhuvaneshwar

नदी के दोनों पाट

नदी के दोनों पाट लहरते हैं आग की लपटों में दो दिवालिए सूदखोरों का सीना जैसे फुँक रहा हो शाम हुई कि रंग धूप तापने लगे अपनी यादों की और नींद...

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Arun Kamal

धार

कौन बचा है जिसके आगे इन हाथों को नहीं पसारा यह अनाज जो बदल रक्त में टहल रहा है तन के कोने-कोने यह कमीज़ जो ढाल बनी है बारिश...
Kishan Saroj

बड़ा आश्चर्य है

नीम-तरू से फूल झरते हैँ तुम्हारा मन नहीं छूते बड़ा आश्चर्य है रीझ, सुरभित हरित-वसना घाटियों पर, व्यँग्य से हँसते हुए परिपाटियों पर, इन्द्रधनु सजते-सँवरते हैँ तुम्हारा मन नहीं छूते बड़ा आश्चर्य है गहन...
Bhawani Prasad Mishra

मेरा अपनापन

रातों दिन बरसों तक मैंने उसे भटकाया लौटा वह बार-बार पार करके मेहराबें समय की मगर ख़ाली हाथ क्योंकि मैं उसे किसी लालच में दौड़ाता था दौड़ता था वह मेरे इशारे पर और जैसा...
Woman Reading

अन्तर्सज्जा

बहुत देख लिया नून-तेल, आटा-दाल बटलोई-कड़छुलवाली रसोईघर की खिड़की से बादल का छूटता कोना यह सोफ़ा कुर्सियाँ मेज़ पलंग फूलदान उधर धर दो कैलेण्डर में सुबह-शाम बंधे गलियारे में पूरब-पश्चिम क़ैद उस कोने में वह...
Teesri Kavita Ki Anumati Nahi - Sudarshan Sharma, Woman

सही-सही वजह

किसी के प्रेम में पड़ जाने की सही-सही वजह नहीं बता पातीं कभी भी स्त्रियाँ, जबकि पुरुषों के पास होते हैं एक सौ एक कारण स्त्रियों के पास अपने...
Teesri Kavita Ki Anumati Nahi - Sudarshan Sharma, Woman

स्त्री के भीतर की कुंडी

एक स्त्री ने भीतर से कुंडी लगायी और भूल गयी खोलने की विधि या कि कुंडी के पार ही जनमी थी एक स्त्री उस स्त्री ने केवल कोलाहल सुना देखा...
Teesri Kavita Ki Anumati Nahi - Sudarshan Sharma, Woman

तरकीबें

मनुष्य बने रहने की ज़्यादा तरकीबें नहीं बची हैं मेरे पास बस मैं कभी-कभी गैंतियों तले गिड़गिड़ाती ज़िन्दगियों पर रो लेती हूँ या फिर ये कि मृत्यु का भौंडा...
Father, Hands, Child, Hold

पीठ पर पहाड़

पीठ पर पहाड़ ढोते आदमी की उपमा पढ़कर छुटपन से ही मुझे हमेशा याद आयी पिता की तनी हुई रीढ़ पिता की पीठ पर ज्येष्ठ पुत्र होने के सम्मान...
Prayers

प्रार्थनाओं से बचना

दुःखों में बचे रहना चाहते हो तो प्रार्थनाओं से बचना प्रार्थना रत हथेलियों के बीच से बह जाता है एक हिस्सा जुझारूपन एक हिस्सा जिजीविषा प्रार्थनाएँ प्रमेय हैं जो सिद्ध...
Upendranath Ashk, Rajkamal Chaudhary

उपेन्द्रनाथ अश्क का राजकमल चौधरी को पत्र

5, ख़ुसरोबाग़ रोड इलाहाबाद, 21-11-61 प्रिय राजकमल, तुम्हारा पत्र मिला। उपन्यास (नदी बहती है) की प्रतियाँ भी मिलीं। मैं उपन्यास पढ़ भी गया। रात ही मैंने उसे...
Woman in Sari, Pallu

मैं तो भूल चली बाबुल का देश

ताल जैसा कच्चा आँगन और अट्ठारह की कच्ची उम्र देवर की शादी में बड़की भाभी झूम-झूमकर नाच रही हैं! तभी पता चला कि बड़के हंडे की...
Ramnika Gupta

पैने चाक़ू

मैं पंख फैलाए बांधे पंखों में हवा उन्मत्त मदमस्त उन्मुक्त गगन में उड़ती थी... रास नहीं आया उन्हें मेरा उड़ना वे पंजे पजाकर चोंत तेज़ कर धारदार पैनी नज़रों से मेरे पंख काटने को उद्यत बढ़े आ...
sandeep nirbhay ke liye

थार के कवि संदीप निर्भय के लिए

राजस्थान के धोरों से उठकर सुदूर दक्षिण गया एक युवा कवि गर्मी से पकी हुई उसकी पुश्तों का जेनेटिक्स स्ट्रक्चर साँवला है साँवली है उसकी मनचली प्रेमिका रेगिस्तान में मरीचिका-सी,...
Raghuvir Sahay

प्रेम नयी मनःस्थिति

दुःखी-दुःखी हम दोनों आओ बैठें अलग-अलग देखें, आँखों में नहीं हाथ में हाथ न लें हम लिए हाथ में हाथ न बैठे रह जाएँ बहुत दिनों बाद आज इतवार मिला...
Shrikant Verma

हस्तक्षेप

कोई छींकता तक नहीं इस डर से कि मगध की शांति भंग न हो जाए, मगध को बनाए रखना है तो मगध में शांति रहनी ही चाहिए मगध है, तो शांति...
nirmal gupt

साइकिल पर टँगी ढोलक

अलसभोर जा रहा साइकिल पर बांधे सलीक़े से मढ़ी, हरी पीली ढोलकें, इसकी थाप पर सदियाँ गाती आयीं अपने समय के मंगलगान जटिल समय में सवाल यह, कौन...
Sadness, Melancholy

आषाढ़ की भरी दोपहरी में लिखी एक उदास कविता

दर्द याद रहता है ख़ुशी गुम हो जाती है दंश विस्मृत नहीं होता स्पर्श में से बचा रह जाता है उतना हिस्सा जो रह जाता है उँगलियों पर चिपककर। भूख...
Rag Ranjan

मैं जहाँ कहीं से लौटा

मैंने कभी फूल नहीं तोड़े, जब भी उन्हें छुआ अपनी उंगलियों के पोरों पर एक सतर्क कृतज्ञता महसूस की मैंने किताबों में निशानदेही नहीं की कभी नहीं मोड़ा कोई...
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भविष्यफल

कोई एक अक्षर बताओ कोई रंग कोई दिशा किसी एक फूल का नाम लो कोई एक धुन याद करो कोई चिड़िया कोई माह—जैसे वैशाख खाने की किसी प्रिय चीज़ का नाम...
Mahavir Prasad Dwivedi

मेरी आँखों का दौलतपुर

बीता हुआ और बीत रहा हर एक क्षण स्मृति बनता चला जाता है। कुछ स्मृतियाँ सिर्फ़ स्मृतियाँ न रहकर अंतस पटल पर शिलालेख-सी अमिट...
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