Tag: River

Agyeya

मैं वहाँ हूँ

'Main Wahan Hoon' | a poem by Agyeya दूर दूर दूर... मैं वहाँ हूँ! यह नहीं कि मैं भागता हूँ— मैं सेतु हूँ—जो है और जो होगा...
Ram Dayal Munda

राम दयाल मुण्डा की कविताएँ

उनींद नदी की बाँहों में पड़ा पहाड़ सो रहा है और पूछे-अनपूछे प्रश्नों के जवाब बड़बड़ा रहा है। अनमेल लोगों के कहने से कह तो दिया कि साथ बहेंगे पर मन नहीं मिल...
Leaf Water River

नदी, स्वप्न और तुम्हारा पता

मैं जग रहा हूँ आँखों में गाढ़ी-चिपचिपी नींद भरे कि नींद मेरे विकल्पों की सूची में खो गयी है कहीं। जिस बिस्तर पर मैं लेटा चाहे-अनचाहे मेरी उपस्थिति...
Love, Couple

नीरव की कविताएँ

1 ढहते थे पेड़ रोती थी पृथ्वी हँसता था आदमी मरती थी नदी बिलखता था आकाश हँसता था आदमी टूटता था संगीत बुझता था प्रकाश हँसता था आदमी टूट रहा है आदमी बुझ रहा है...
Woman, River

यह नदी

यह नदी रोटी पकाती है हमारे गाँव में। हर सुबह नागा किए बिन सभी बर्तन माँजकर, फिर हमें नहला-धुलाकर नैन ममता आँजकर यह नदी अंधन चढ़ाती है हमारे गाँव में। सूखती-सी क्यारियों में फूलगोभी बन हँसे, गंध धनिए में सहेजे, मिर्च...
Ram Dayal Munda

राम दयाल मुण्डा की कविताएँ

सूखी नदी/भरी नदी सूखी नदी एक व्यथा-कहानी जब था पानी तब था पानी! भरी नदी एक सीधी कहानी ऊपर पानी, नीचे पानी। विरोध उसे बाँधकर ले जा रहे थे राजा के सेनानी और नदी छाती पीटकर...
Kailash Vajpeyi

क्षणिकाएँ : कैलाश वाजपेयी

स्पन्दन कविता हर आदमी अपनी समझ-भर समझता है ईश्वर एक कविता है! मोमिन पूजाघर पहले भी होते थे, हत्याघर भी पहले होते थे हमने यही प्रगति की है दोनों को एक में मिला दिया। आदिम...
Rohit Thakur

नदी

नदी : नौ कविताएँ 1 नदी को देखना नदी को जानना नहीं है नदी को छूना नदी को पाना नहीं है नदी के साथ सम्वाद नदी की तरह भीगना नहीं है नदी...
Sea Beach Water Evening Sunset

नदी और सागर

'Nadi Aur Sagar', a poem by Rupam Mishra एक दिन शरद की सुहानी-सी रात थी प्रकृति ने ज्योत्स्ना के साथ जैसे प्रणय भी बिखेर दिया था वातावरण...
Posham Pa

नदी से रिश्ता

'Nadi Se Rishta', a poem by Rag Ranjan तब तक नहीं होता अकेलेपन का एहसास जब तक ठहरी नदी में कोई हलचल न हो, किनारे लगी नाव चुप देखती है हवा...
Deepak Jaiswal

लूनी नदी

'Looni Nadi', a poem by Deepak Jaiswal अमूमन नदियाँ समंदर में जाकर मिल जाती हैं— पूर्णता को धारण करते हुए एक सुंदर जीवन जीते हुए। लेकिन कुछ नदियों...
Prabhat Milind

बारिश के दिनों में नदी का स्मृति-गीत

'Barish Ke Dino Mein Nadi Ka Smriti Geet', Hindi Kavita by Prabhat Milind 1 स्वप्न में बहती है चौड़े पाट की एक नदी बेआवाज़ याद का कंकड़...

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Naresh Saxena

इस बारिश में

जिसके पास चली गई मेरी ज़मीन उसी के पास अब मेरी बारिश भी चली गई अब जो घिरती हैं काली घटाएँ उसी के लिए घिरती हैं कूकती हैं कोयलें...
Sahej Aziz

नींद क्यों रात-भर नहीं आती

रात को सोना कितना मुश्किल काम है दिन में जागने जैसा भी मुश्किल नहीं पर, लेकिन तक़रीबन उतना ही न कोई पत्थर तोड़ा दिन-भर न ईंट के भट्ठे में...
Sahej Aziz

क्रांति: दो हज़ार पचानवे

हा हा हा हा हा हा यह भी कैसा साल है मैं ज़िंदा तो हूँ नहीं पर पढ़ रहा है मुझको कोई सोच रहा है कैसे मैंने सोचा है तब...
Sarveshwar Dayal Saxena

देशगान

क्या ग़ज़ब का देश है, यह क्या ग़ज़ब का देश है। बिन अदालत औ मुवक्किल के मुक़दमा पेश है। आँख में दरिया है सबके दिल में है...
Balamani Amma

माँ भी कुछ नहीं जानती

"बतलाओ माँ मुझे बतलाओ कहाँ से, आ पहुँची यह छोटी-सी बच्ची?" अपनी अनुजाता को परसते-सहलाते हुए मेरा पुत्र पूछ रहा था मुझसे; यह पुराना सवाल जिसे हज़ारों लोगों ने पहले भी बार-बार पूछा है। प्रश्न...
Anurag Tiwari

विदा

'अभी जिया नहीं' से विदा का शब्दों से निकलकर जब स्मृतियों में अस्तित्व हो जाता है दूर होना किसी किताब का बेमानी शब्द-सा रह जाता है किसी का...
Malala Yousafzai

संयुक्त राष्ट्र में दिया मलाला का भाषण

'मलाला हूँ मैं' से संयुक्त राष्ट्र ने जुलाई 12 का दिन ‘मलाला दिवस’ घोषित किया है। 12 जुलाई, 2013 को अपने 16वें जन्मदिवस पर मलाला...
Viren Dangwal

इतने भले नहीं बन जाना

इतने भले नहीं बन जाना साथी जितने भले हुआ करते हैं सरकस के हाथी गदहा बनने में लगा दी अपनी सारी क़ुव्वत, सारी प्रतिभा किसी से कुछ लिया...
Dharmasthal - Priyamvad

प्रियम्वद – ‘धर्मस्थल’

प्रियम्वद की किताब 'धर्मस्थल' से उद्धरण | Hindi Quotes by 'Dharmasthal', a book by Priyamvad संकलन: विजय शर्मा   "रचना के संसार में जब तुम कुछ नया...
Bhagat Singh

युवक!

आचार्य शिवपूजन सहाय की डायरी के अंश, 23 मार्च, पृष्ठ 28 सन्ध्या समय सम्मेलन भवन के रंगमंच पर देशभक्त भगत सिंह की स्मृति में सभा...
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