Tag: Sahir Ludhianvi

Sahir Ludhianvi

चकले (जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं)

ये कूचे, ये नीलाम घर दिलकशी के ये लुटते हुए कारवाँ ज़िन्दगी के कहाँ हैं, कहाँ हैं मुहाफ़िज़ ख़ुदी के सना-ख़्वान-ए-तक़्दीस-ए-मशरिक़ कहाँ हैं ये पुर-पेच गलियाँ, ये बे-ख़्वाब बाज़ार ये...
Sahir Ludhianvi

मैं पल दो पल का शायर हूँ

मैं पल दो पल का शायर हूँ, पल दो पल मेरी कहानी है पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मेरी जवानी है मुझसे पहले कितने...
Amrita Pritam

यह कहानी नहीं

अमृता प्रीतम की आत्मकथा 'अक्षरों के साये' से पत्थर और चूना बहुत था, लेकिन अगर थोड़ी-सी जगह पर दीवार की तरह उभरकर खड़ा हो जाता,...
Sahir Ludhianvi

मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़

हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही ज़ालिम को जो न रोके वो शामिल है ज़ुल्म...
Sahir Ludhianvi

औरत ने जनम दिया मर्दों को

औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाज़ार दिया जब जी चाहा मसला कुचला, जब जी चाहा धुत्कार दिया तुलती है कहीं दीनारों में,...
Sahir Ludhianvi

इंतिज़ार

चाँद मद्धम है, आसमाँ चुप है नींद की गोद में जहाँ चुप है दूर वादी में दूधिया बादल झुक के पर्वत को प्यार करते हैं दिल में नाकाम हसरतें...
Sahir Ludhianvi

मैंने जो गीत तेरे प्यार की ख़ातिर लिक्खे

'Maine Jo Geet Tere Pyar Ki Khatir' a nazm by Sahir Ludhianvi मैंने जो गीत तेरे प्यार की ख़ातिर लिक्खे आज उन गीतों को बाज़ार में ले...

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Recent Posts

Nirmala Putul

बाहामुनी

तुम्हारे हाथों बने पत्तल पर भरते हैं पेट हज़ारों पर हज़ारों पत्तल भर नहीं पाते तुम्हारा पेट कैसी विडम्बना है कि ज़मीन पर बैठ बुनती हो चटाइयाँ और...
Nand Kishore Acharya

ओछा है मेरा प्यार

कितना अकेला कर देगा मेरा प्यार तुमको एक दिन अकेला और सन्तप्त अपनी समूची देह से मुझे सोचती हुईं तुम जब मुस्कुराओगी—औपचारिक! प्यार मैं तुम्हें तब भी करता रहूँगा शायद...
Om Prakash Valmiki

युग-चेतना

मैंने दुःख झेले सहे कष्‍ट पीढ़ी-दर-पीढ़ी इतने फिर भी देख नहीं पाए तुम मेरे उत्‍पीड़न को इसलिए युग समूचा लगता है पाखण्डी मुझको। इतिहास यहाँ नक़ली है मर्यादाएँ सब झूठी हत्‍यारों की रक्‍तरंजित...
Birds, Couple

‘चलो’—कहो एक बार

'चलो' कहो एक बार अभी ही चलूँगी मैं— एक बार कहो! सुना तब 'हज़ार बार चलो' सुना— आँखें नम हुईं और माथा उठ आया। बालू ही बालू में खुले पैर, बंधे हाथ चांदी की जाली...
Qurratulain Hyder

पतझड़ की आवाज़

अनुवाद: शम्भु यादव सुबह मैं गली के दरवाज़े में खड़ी सब्ज़ीवाले से गोभी की क़ीमत पर झगड़ रही थी। ऊपर रसोईघर में दाल-चावल उबालने के...
Faiz Ahmad Faiz

पास रहो

तुम मेरे पास रहो मेरे क़ातिल, मेरे दिलदार, मेरे पास रहो जिस घड़ी रात चले, आसमानों का लहू पी के सियह रात चले मरहम-ए-मुश्क लिए, नश्तर-ए-अल्मास लिए बैन करती हुई, हँसती...
Swayam Prakash

पिताजी का समय

अपने घर में मैं परम स्वतंत्र था। जैसे चाहे रहता, जो चाहे करता। मर्ज़ी आती जहाँ जूते फेंक देता, मन करता जहाँ कपड़े। जगह-जगह...
Neem Tree

तेरे वाला हरा

चकमक, जनवरी 2021 अंक से कविता: सुशील शुक्ल  नीम तेरी डाल अनोखी है लहर-लहर लहराए शोखी है नीम तेरे पत्ते बाँके हैं किसने तराशे किसने टाँके हैं नीम तेरे फूल बहुत झीने भीनी ख़ुशबू शक्ल से पश्मीने नीम...
Saadat Hasan Manto

चोर

मुझे बेशुमार लोगों का क़र्ज़ अदा करना था और ये सब शराबनोशी की बदौलत था। रात को जब मैं सोने के लिए चारपाई पर...
God, Abstract Human

होने की सुगन्ध

यही तो घर नहीं और भी रहता हूँ जहाँ-जहाँ जाता हूँ, रह जाता हूँ जहाँ-जहाँ से आता हूँ, कुछ रहना छोड़ आता हूँ जहाँ सदेह गया नहीं वहाँ...
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