Tag: Sahir Ludhianvi

Sahir Ludhianvi

ख़ून फिर ख़ून है

ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है ख़ून फिर ख़ून है, टपकेगा तो जम जाएगाख़ाक-ए-सहरा पे जमे या कफ़-ए-क़ातिल पे जमे फ़र्क़-ए-इंसाफ़ पे...
Sahir Ludhianvi

इंसाफ़ का तराज़ू जो हाथ में उठाए

इंसाफ़ का तराज़ू जो हाथ में उठाए जुर्मों को ठीक तोले ऐसा न हो कि कल का इतिहासकार बोले मुजरिम से भी ज़ियादा मुंसिफ़ ने ज़ुल्म ढायाकीं पेश...
Sahir Ludhianvi

ये दुनिया दो-रंगी है

ये दुनिया दो-रंगी है एक तरफ़ से रेशम ओढ़े, एक तरफ़ से नंगी हैएक तरफ़ अंधी दौलत की पागल ऐश-परस्ती एक तरफ़ जिस्मों की क़ीमत रोटी...
Sahir Ludhianvi

चकले (जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं)

ये कूचे, ये नीलाम घर दिलकशी के ये लुटते हुए कारवाँ ज़िन्दगी के कहाँ हैं, कहाँ हैं मुहाफ़िज़ ख़ुदी के सना-ख़्वान-ए-तक़्दीस-ए-मशरिक़ कहाँ हैंये पुर-पेच गलियाँ, ये बे-ख़्वाब बाज़ार ये...
Sahir Ludhianvi

मैं पल दो पल का शायर हूँ

मैं पल दो पल का शायर हूँ, पल दो पल मेरी कहानी है पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मेरी जवानी हैमुझसे पहले कितने...
Amrita Pritam

यह कहानी नहीं

अमृता प्रीतम की आत्मकथा 'अक्षरों के साये' से पत्थर और चूना बहुत था, लेकिन अगर थोड़ी-सी जगह पर दीवार की तरह उभरकर खड़ा हो जाता,...
Sahir Ludhianvi

मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़

हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही ज़ालिम को जो न रोके वो शामिल है ज़ुल्म...
Sahir Ludhianvi

औरत ने जनम दिया मर्दों को

औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाज़ार दिया जब जी चाहा मसला कुचला, जब जी चाहा धुत्कार दिया तुलती है कहीं दीनारों में,...
Sahir Ludhianvi

इंतिज़ार

चाँद मद्धम है, आसमाँ चुप है नींद की गोद में जहाँ चुप है दूर वादी में दूधिया बादल झुक के पर्वत को प्यार करते हैं दिल में नाकाम हसरतें...
Sahir Ludhianvi

मैंने जो गीत तेरे प्यार की ख़ातिर लिक्खे

'Maine Jo Geet Tere Pyar Ki Khatir' a nazm by Sahir Ludhianvi मैंने जो गीत तेरे प्यार की ख़ातिर लिक्खे आज उन गीतों को बाज़ार में ले...

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या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
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लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
premchand

सवा सेर गेहूँ

किसी गाँव में शंकर नाम का एक कुरमी किसान रहता था। सीधा-सादा ग़रीब आदमी था, अपने काम-से-काम, न किसी के लेने में, न किसी...
Unsocial Network - Dilip Mandal, Geeta Yadav

वे आपके बारे में बहुत ज़्यादा जानते हैं (किताब अंश: अनसोशल नेटवर्क)

'अनसोशल नेटवर्क' किताब भारत के विशिष्ट सन्दर्भों में सोशल मीडिया का सम्यक् आकलन प्रस्तुत करती है। जनसंचार का नया माध्यम होने के बावजूद, सोशल...
Prayers, Joined Hands

अनुत्तरित प्रार्थना

'परिवर्तन प्रकृति का नियम है' यह पढ़ते-पढ़ाते वक़्त मैंने पूरी शिद्दत के साथ अपने रिश्तों में की स्थिरता की कामनाप्रकृति हर असहज कार्य भी पूरी सहजता के...
Women sitting

अठन्नी, चवन्नी और क्रमशः

इस बार उन्हें नहीं था मोह स्वर्ण-मृग का फिर भी खींची गई थीं लक्ष्मण रेखाएँवे पढ़ीं, आगे बढ़ीं लक्ष्मण रेखाएँ लाँघकर रावण से जा भिड़ींगूँजते आए थे स्वर नेपथ्य...
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