Tag: Satire

Hetu Bhardwaj

छिपाने को छिपा जाता

कल रात मेरे कॉलेज के छात्रों ने मुझे पीट दिया। यों मेरी पिटाई तो ज़्यादा नहीं हुई, लेकिन ज़्यादा हो जाती, शौहरत तब भी...
Swang - Gyan Chaturvedi

पिटाई विमर्श में शान्तिदूत : ‘स्वाँग’ से किताब अंश

'स्वाँग' ज्ञान चतुर्वेदी का नया उपन्यास है, एक गाँव के बहाने समूचे भारतीय समाज के विडम्बनापूर्ण बदलाव की कथा इस उपन्यास में दिलचस्प ढंग...
Shrilal Shukla

दो आदमी पुराने

कुछ दिन हुए, रामानंदजी और राकेशजी अपने-अपने पेशे से रिटायर होकर सिविल लाइंस में बस गए थे। अपने यहाँ का चलन है कि रिटायर...
Harishankar Parsai

अपील का जादू

एक देश है! गणतंत्र है! समस्याओं को इस देश में झाड़-फूँक, टोना-टोटका से हल किया जाता है! गणतंत्र जब कुछ चरमराने लगता है, तो...
Suryabala

गर्व से कहो हम पति हैं

महिलाओं को मालूम है कि जिस तरह हर सफल पुरुष के पीछे कोई महिला होती है, उसी तरह हर असफल महिला के पीछे भी...
Dilawar Figar

दावतों में शाइरी

दावतों में शाइरी अब हो गई है रस्म-ए-आम यूँ भी शाइर से लिया जाता है अक्सर इंतिक़ाम पहले खाना उसको खिलवाते हैं भूखे की तरह फिर उसे करते...
Shail Chaturvedi

मूल अधिकार?

क्या कहा—चुनाव आ रहा है? तो खड़े हो जाइए देश थोड़ा बहुत बचा है उसे आप खाइए। देखिए न, लोग किस तरह खा रहे हैं सड़के, पुल और फ़ैक्ट्रियों तक को पचा...
Brain

दिमाग़ वालों सावधान!

आदमी मज़बूत मगर मजबूर प्राणी है। कई नमूने हैं उसके। कुछ दिमाग़ वाले, कुछ बिना दिमाग़ के, कुछ पौन दिमाग़ के, कुछ पाव दिमाग़...
Mushtaq Ahmad Yusufi

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी के उद्धरण | Mushtaq Ahmad Yusufi Quotes in Hindi"दुश्मनी के लिहाज़ से दुश्मनों के तीन दर्जे होते है—दुश्मन, जानी दुश्मन और...
Harishankar Parsai

तीसरे दर्जे के श्रद्धेय

"लड़कियाँ बैठी थीं, जिनकी शादी बिना दहेज के नहीं होने वाली थी। और लड़के बैठे थे, जिन्हें डिग्री लेने के बाद सिर्फ सिनेमा-घर पर पत्थर फेंकने का काम मिलने वाला है।"
Koduram Dalit

तब के नेता, अब के नेता

तब के नेता जन-हितकारी, अब के नेता पदवीधारी। तब के नेता किए कमाल, अब के नित पहने जयमाल। तब के नेता पटकावाले, अब के नेता लटका वाले। तब के नेता...
Gopal Prasad Vyas

साँप ही तो हो

साँप, दो-दो जीभें होने पर भी भाषण नहीं देते? आदमी न होकर भी पेट के बल चलते हो यार! हम तुम्हारे फूत्कार से नहीं डरते साँप ही तो हो, भारत के रहनुमा...

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Nicoleta Crăete

रोमानियाई कवयित्री निकोलेटा क्रेट की कविताएँ

अनुवाद: पंखुरी सिन्हा औंधा पड़ा सपना प्यार दरअसल फाँसी का पुराना तख़्ता है, जहाँ हम सोते हैं! और जहाँ से हमारी नींद, देखना चाह रही होती है चिड़ियों की ओर!मत...
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डेज़ी रॉकवेल के इंटरव्यू के अंश

लेखक ने अपनी बात कहने के लिए अपनी भाषा रची है, इसलिए इसका अनुवाद करने के लिए आपको भी अपनी भाषा गढ़नी होगी। —डेज़ी...
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लम्बी कविता: डरावना स्वप्न (एक)हर रात वही डरावना सपना लगभग तीन से चार बजे के बीच आता है और रोम-रोम कँपा जाता है बहुत घबराहट के साथ पसीने-पसीने हुआ-सा...
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हम पृथ्वी की शुरुआत से स्त्री हैं सरकारें बदलती रहीं तख़्त पलटते रहे हम स्त्री रहे विचारक आए विचारक गए हम स्त्री रहे सैंकड़ों सावन आए अपने साथ हर दूषित चीज़ बहा...
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पहला हर्फ़

पाकिस्तानी शायरा सारा शगुफ़्ता की नज़्मों का पहला संग्रह 'आँखें' उनकी मृत्यु के बाद सन् 1985 में प्रकाशित हुआ था। हाल ही में इसी...
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