Tag: विरह / जुदाई

Anurag Tiwari

विदा

'अभी जिया नहीं' से विदा का शब्दों से निकलकर जब स्मृतियों में अस्तित्व हो जाता है दूर होना किसी किताब का बेमानी शब्द-सा रह जाता है किसी का...
Faiz Ahmad Faiz

इस वक़्त तो यूँ लगता है

इस वक़्त तो यूँ लगता है, अब कुछ भी नहीं है महताब न सूरज, न अँधेरा न सवेरा आँखों के दरीचों पे किसी हुस्न की चिलमन और...
Ibne Insha

ये बातें झूठी बातें हैं

ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलायी हैं तुम इंशा जी का नाम न लो क्या इंशा जी सौदाई हैं हैं लाखों रोग ज़माने में,...

तुम मुझे ढूँढते रहे

तुम मुझे ढूँढते रहे और मैं तुम्हें इस छुपन-छुपाई में हम ये ही भूल गए हम किसे ढूँढ रहे थे एक बार हम रास्ते में मिले थे लेकिन तुमने मुझे...
Narendra Sharma

आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे

आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे? आज से दो प्रेम योगी, अब वियोगी ही रहेंगे! आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे? सत्य हो यदि, कल्प...
Muktibodh

एक-दूसरे से हैं कितने दूर

एक-दूसरे से हैं कितने दूर कि जैसे बीच सिन्धु है, एक देश के शैल-कूल पर खड़ा हुआ मैं और दूसरे देश-तीर पर खड़ी हुईं तुम। फिर भी...
God, Abstract Human

तारबंदी

जालियों के छेद इतने बड़े तो हों ही कि एक ओर की ज़मीन में उगी घास का दूसरा सिरा छेद से पार होकर साँस ले सके दूजी हवा में तारों की इतनी...
Rag Ranjan

किसके घर में

एक दरवाज़ा है जो दो दुनियाओं को एक-दूसरे से अलग करता है इसके कम से कम एक ओर हमेशा अंधेरा रहता है घर से निकलते वक़्त...
Man, Woman, Butterfly, Abstract, Merge

आहट

सच कहो तो अब करनी होगी खुलकर बात कि ठीक कौन-सा क्षण था वह जब फूलों ने डाल दी थीं गर्दनें और एक सिसकी बहुत धीमे-से फूट पड़ी थी डाल-डाल से वैसे...
Prabhat

हमें नहीं पता

तुम अगर मिल सकती होतीं या मैं तुमसे मिल सकता होता तो ज़रूर मिल लेते बावजूद हमारे बीच फैले घने कोहरे के इसी में ढूँढते हुए हम एक-दूसरे...
Vishnu Khare

अकेला आदमी

अकेला आदमी लौटता है बहुत रात गए या शायद पूरी रात बाद भी घर के ख़ालीपन को स्मृतियों के गुच्छे से खोलता हुआ अगर वे लोग...
Waiting, Train, Girl, Window, Thinking, Alone, Lonely

बेटिकट

एक ट्रेन का सपना देखता हूँ मैं जो अतीत के किसी स्टेशन से छूटती है और बेतहाशा चलती चली जाती है समय की किसी अज्ञात दिशा में मैं सवार...

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Naresh Saxena

इस बारिश में

जिसके पास चली गई मेरी ज़मीन उसी के पास अब मेरी बारिश भी चली गई अब जो घिरती हैं काली घटाएँ उसी के लिए घिरती हैं कूकती हैं कोयलें...
Sahej Aziz

नींद क्यों रात-भर नहीं आती

रात को सोना कितना मुश्किल काम है दिन में जागने जैसा भी मुश्किल नहीं पर, लेकिन तक़रीबन उतना ही न कोई पत्थर तोड़ा दिन-भर न ईंट के भट्ठे में...
Sahej Aziz

क्रांति: दो हज़ार पचानवे

हा हा हा हा हा हा यह भी कैसा साल है मैं ज़िंदा तो हूँ नहीं पर पढ़ रहा है मुझको कोई सोच रहा है कैसे मैंने सोचा है तब...
Sarveshwar Dayal Saxena

देशगान

क्या ग़ज़ब का देश है, यह क्या ग़ज़ब का देश है। बिन अदालत औ मुवक्किल के मुक़दमा पेश है। आँख में दरिया है सबके दिल में है...
Balamani Amma

माँ भी कुछ नहीं जानती

"बतलाओ माँ मुझे बतलाओ कहाँ से, आ पहुँची यह छोटी-सी बच्ची?" अपनी अनुजाता को परसते-सहलाते हुए मेरा पुत्र पूछ रहा था मुझसे; यह पुराना सवाल जिसे हज़ारों लोगों ने पहले भी बार-बार पूछा है। प्रश्न...
Anurag Tiwari

विदा

'अभी जिया नहीं' से विदा का शब्दों से निकलकर जब स्मृतियों में अस्तित्व हो जाता है दूर होना किसी किताब का बेमानी शब्द-सा रह जाता है किसी का...
Malala Yousafzai

संयुक्त राष्ट्र में दिया मलाला का भाषण

'मलाला हूँ मैं' से संयुक्त राष्ट्र ने जुलाई 12 का दिन ‘मलाला दिवस’ घोषित किया है। 12 जुलाई, 2013 को अपने 16वें जन्मदिवस पर मलाला...
Viren Dangwal

इतने भले नहीं बन जाना

इतने भले नहीं बन जाना साथी जितने भले हुआ करते हैं सरकस के हाथी गदहा बनने में लगा दी अपनी सारी क़ुव्वत, सारी प्रतिभा किसी से कुछ लिया...
Dharmasthal - Priyamvad

प्रियम्वद – ‘धर्मस्थल’

प्रियम्वद की किताब 'धर्मस्थल' से उद्धरण | Hindi Quotes by 'Dharmasthal', a book by Priyamvad संकलन: विजय शर्मा   "रचना के संसार में जब तुम कुछ नया...
Bhagat Singh

युवक!

आचार्य शिवपूजन सहाय की डायरी के अंश, 23 मार्च, पृष्ठ 28 सन्ध्या समय सम्मेलन भवन के रंगमंच पर देशभक्त भगत सिंह की स्मृति में सभा...
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