Tag: Shiva

Ek Ladki Ko Dekha Toh Aisa Laga

एक लड़की को देखा तो कैसा लगा?

दो लोग एक दूसरे के प्यार में पड़ते हैं, इस राह में उनके सामने कुछ कठिनाइयाँ आती हैं, मगर आखिरकार वे उन कठिनाइयों को...
Woman, Foot, Entry, Religious, Temple, Sabarimala

शुद्धिकरण

'Shuddhikaran', a poem by Shiva मेरे बचपन के दोस्त, मेरे प्यारे दोस्त मेरे टिफ़िन को छीन, जीभ से चाट जाने वाले दोस्त मेरे अग्रज, मेरे भाई मेरे हर...
Woman in Sari, Pallu

दो दुनिया का फासला

"सुबह के पौने ग्यारह बजे रोड-रैश खेलते हुए आता विक्रम ऑटो पकड़ती हूँ और ड्राइवर सीट के पिछले हिस्से से सटी सीट पर टिक जाती हूँ।  टिकना यहाँ उपयुक्त शब्द है क्योंकि ग़ाज़ियाबाद के ऑटो में 'बैठने' की लक्ज़री तो किस्मत वालों को मिलती है। बहरहाल, आधा ध्यान घड़ी की सुई पर है और आधा सामने लगे लाल-हरी चोली का एक सिरा मुँह में दबाये लड़की के चित्र पर। नीचे लिखा है - 'सिर्फ तुम'।"

वैक्यूम

धरती के नीचे थोड़ा जीवन बाकी है आकाश के ऊपर बची है थोड़ी उम्मीद मगर इन दोनों के बीच बन चुका है एक वैक्यूम एक बड़ा शून्य जिसमें बहुत...

सा रे गा मा ‘पा’किस्तान

सा रे गा मा 'पा'किस्तान - शिवा सामवेद से जन्मे सुरों को लौटा दो हिन्दुस्तान को और कह दो पाकिस्तान से वापस ले जाए नुसरत, राहत, हसन, गुलाम, रेशमा सबको भारतीयों...
Lust Stories

‘लस्ट स्टोरीज’: ‘प्रेम’ इज़ नो मोर अ हीरो, ‘लस्ट’ इज़!

भारतीय सिनेमा में प्रेम हमेशा से एक हीरो रहा है और वासना एक विलन। कोई हीरो वासना के वशीभूत होकर कोई काम करता नहीं...

ग्लोबल वॉर्मिंग

मेरे दिल की सतह पर टार जम गया है साँस खींचती हूँ तो खिंची चली आती है कई टूटे तारों की राख जाने कितने अरमान निगल गयी हूँ साँस...
Mother Child

अब माँ शान्त है

मुझे लोगों पर बहुत प्यार आया ज़रा संकोच न हुआ मैंने प्यार बरसा दिया अब मन शान्त है मुझे लोगों पर बहुत ग़ुस्सा आया ज़रा संकोच हुआ मैंने माँ पर उतार दिया अब...
Speaking, Speech, Helpless, Shouting, Screaming, Depressed

झूठ बोलिए, सच बोलिए, खचाखच बोलिए

बोलिए बोलना ज़रूरी है सुनना, पढ़ना, समझना मूर्खों के लिए छोड़ दीजिए सत्ता की शय से बोलिए चढ़ गयी मय से बोलिए 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' के लिए बोलिए 'अधिकतम आउटरीच'...
Bride, Woman, Jewellery

चित्रलेखा

"जब भी मैं अलगाव की कोई भी बात पढ़ती हूँ तो उद्विग्न हो जाती हूँ। उस व्यक्ति से घृणा होने लगती है जिसने अलग होने की भूमि तैयार की है जबकि ऐसा आवश्यक नहीं कि वह गलत हो।"
Radha Krishna

राधा-कृष्ण

Radha Krishna, a poem by Shiva and Puneet Kusum चित्र श्रेय: Shiva कृष्ण हे राधे, हे राधे हे राधे, हे राधे हे राधे, हे राधे कान्हा ढूँढ रहा तुझे राधे ऊपर...
extra cheese

एक्सट्रा चीज़!

Shiva- कभी आँखों से लिख दो कुछ मेरी आखों पर कि हया की हर झुकी नज़र का गुनेहगार तुम्हारा ज़िक्र हो और दुआ में उठी पलकें वहां ऊपर भी तुम्हें...

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Suresh Jinagal

सुरेश जिनागल की कविताएँ: अक्टूबर 2020

ललेश्वरी बर्फ़ का सीना चीरकर उगे चिनार के नीचे बैठकर आग का कोई गीत गाती स्त्री सदियों की बर्फ़ को पिघला रही है उसकी ज़िद, उसका साहस...
Ganesh Shankar Vidyarthi

धर्म की आड़

इस समय, देश में धर्म की धूम है। उत्‍पात किये जाते हैं, तो धर्म और ईमान के नाम पर और ज़िद की जाती है,...
Ibne Insha

सब माया है

सब माया है, सब ढलती-फिरती छाया है इस इश्क़ में हमने जो खोया, जो पाया है जो तुमने कहा है, 'फ़ैज़' ने जो फ़रमाया है सब माया...
Sandeep Nirbhay

चिलम में चिंगारी और चरखे पर सूत

मेरे बच्चो! अपना ख़याल रखना आधुनिकता की कुल्हाड़ी काट न दे तुम्हारी जड़ें जैसे मोबाइलों ने लोक-कथाओं और बातों के पीछे लगने वाले हँकारों को काट दिया है जड़ों सहित वर्तमान...
Kunwar Narayan

अबकी अगर लौटा तो

अबकी अगर लौटा तो बृहत्तर लौटूँगा चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं कमर में बाँधे लोहे की पूँछें नहीं जगह दूँगा साथ चल रहे लोगों को तरेरकर न देखूँगा...
Poonachi - Perumal Murugan

पेरुमल मुरुगन – ‘पूनाची’

पेरुमल मुरुगन के उपन्यास 'पूनाची' से उद्धरण | Quotes by Perumal Murugan from 'Poonachi'   "मैं इंसानों के बारे में लिखने के प्रति आशंकित रहता हूँ;...
Leeladhar Jagudi

अपने अन्दर से बाहर आ जाओ

हर चीज़ यहाँ किसी न किसी के अन्दर है हर भीतर जैसे बाहर के अन्दर है फैलकर भी सारा का सारा बाहर ब्रह्माण्ड के अन्दर है बाहर सुन्दर...
Dhoomil

पटकथा

जब मैं बाहर आया मेरे हाथों में एक कविता थी और दिमाग़ में आँतों का एक्स-रे। वह काला धब्बा कल तक एक शब्द था; ख़ून के अँधेर में दवा का ट्रेडमार्क बन गया...
Venu Gopal

मेरा वर्तमान

मैं फूल नहीं हो सका। बग़ीचों से घिरे रहने के बावजूद। उनकी हक़ीक़त जान लेने के बाद यह मुमकिन भी नहीं था। यों अनगिन फूल हैं वहाँ। लेकिन मुस्कुराता हुआ...
Kedarnath Agarwal

हमारी ज़िन्दगी

हमारी ज़िन्दगी के दिन, बड़े संघर्ष के दिन हैं। हमेशा काम करते हैं, मगर कम दाम मिलते हैं। प्रतिक्षण हम बुरे शासन, बुरे शोषण से पिसते हैं। अपढ़, अज्ञान, अधिकारों से वंचित...
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