Tag: Summit

क की कमी

कब कैसे है? किसे क्या है? कौन कहाँ है? कौन-सा कितना है? किधर किसका है? क्यूँ मैं अक्सर यही सोचता हूँ? कि 'क' अगर हिन्दी में नहीं होता तो हम...
Window, Pigeons, Birds, Lovers

बात

मेरे बालों में अपनी उंगलियों को फिरा के जब तुम कहती हो कि ये बात-बात पर जो कुछ बातें तुम बताते रहते हो उससे कोई इत्तेफ़ाक़ भी रखते...
Heart, Hands, Sky

मैं चूम लूँगा

एक दिन मैं चूम लूँगा― तुम्हारे माथे की लिपिबद्ध आभा को, आँखों में ठहरी हुई तन्मयता को, कानों में अपेक्षित ध्वनि-लिप्सा को, अधरों पे उठते स्पंदन को, गालों के...
Moon, Night, Dark, Sky

लॉन्ग-डिस्टेन्स रिलेशनशिप

तुम ये खिड़की देख रहे हो न इसी में से आता-जाता है चाँद बादलों से चोरी-छुपे आसमान से झूठ बोल के मेरे कमरे में रौशनी बिखेर देता है और पता...
Ko Un

कान

अनुवाद: साउथ कोरियाई कवि 'को उन' की कविता 'इअर' (Ear) आ रहा है कोई, दूजे संसार से। रात्रि-वर्षा की फुसफुसाहट अब उधर जा रहा है कोई उन दोनों का...
Ko Un

राह पूछते हुए

अनुवाद: साउथ कोरियाई शायर जनाब 'को उन' की नज़्म 'आस्किंग द वे' तुम सब जाहिल, पूछते हो कि ख़ुदा क्या है बल्कि पूछना चाहिए कि ज़िन्दगी...
Butterfly

तितली

उँगलियों पर तितली बैठी है कभी? क्या उसके पंखों को तुम्हारी कोशिकाओं ने स्पर्श किया है? उसकी कोमलता की मीमांसा की है तुमने? या उससे पूछा कि...
Girl Power, Girl, No

तुम्हारे पढ़ने के योग्य नहीं

शुक्राणुओं की कमी से मर जातें है आशा के कुछ स्वप्न और मस्तिष्क की रसोईघर में पकती रहती हैं स्वप्नदोष की कुछ नग्न तस्वीरें जिन्हें एक दिन कांच...

ख़ुद-नफ़्ससाज़ी

अनुवाद: पुर्तगाल के अज़ीम शायर जनाब 'फेरनान्दो पेसोआ' की नज़्म 'ऑटोसाइकोग्राफी' शायर वो आदमी है जो बहाने बनाता है और इतनी शिद्दत से बहाने बनाता है...

ज़ेनटैंगल

पर्णपाती वृक्षों की भाँति मैं, अपनी बौझक मुस्कान की पत्तियों को गिरा दूँगा—तुम्हें देखकर, रेहन पर रख दूँगा अपनी सारी कोशिकाओं को तुम्हारे अधरों के गुरुत्वाकर्षण से बचने के...

लिप-बाम

मेरी होठों की कुछ कमसिन बूंदे जो तुम्हारे लबों से वाबस्ता हो जाती हैं और इत्मीनान से ठहर के इस सिलसिले में शरीक होती हैं कि शायद ये...

इज़हार

जो रास्ता आंखों से होकर तुम्हारी रूह के तहख़ाने तक जाता है वहाँ- हल्की-सी सीलन बचा के रखना, क्या पता; मेरा दिल वहीं फिसल जाये !

STAY CONNECTED

32,392FansLike
11,518FollowersFollow
21,165FollowersFollow
664SubscribersSubscribe

Recent Posts

Suresh Jinagal

सुरेश जिनागल की कविताएँ: अक्टूबर 2020

ललेश्वरी बर्फ़ का सीना चीरकर उगे चिनार के नीचे बैठकर आग का कोई गीत गाती स्त्री सदियों की बर्फ़ को पिघला रही है उसकी ज़िद, उसका साहस...
Ganesh Shankar Vidyarthi

धर्म की आड़

इस समय, देश में धर्म की धूम है। उत्‍पात किये जाते हैं, तो धर्म और ईमान के नाम पर और ज़िद की जाती है,...
Ibne Insha

सब माया है

सब माया है, सब ढलती-फिरती छाया है इस इश्क़ में हमने जो खोया, जो पाया है जो तुमने कहा है, 'फ़ैज़' ने जो फ़रमाया है सब माया...
Sandeep Nirbhay

चिलम में चिंगारी और चरखे पर सूत

मेरे बच्चो! अपना ख़याल रखना आधुनिकता की कुल्हाड़ी काट न दे तुम्हारी जड़ें जैसे मोबाइलों ने लोक-कथाओं और बातों के पीछे लगने वाले हँकारों को काट दिया है जड़ों सहित वर्तमान...
Kunwar Narayan

अबकी अगर लौटा तो

अबकी अगर लौटा तो बृहत्तर लौटूँगा चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं कमर में बाँधे लोहे की पूँछें नहीं जगह दूँगा साथ चल रहे लोगों को तरेरकर न देखूँगा...
Poonachi - Perumal Murugan

पेरुमल मुरुगन – ‘पूनाची’

पेरुमल मुरुगन के उपन्यास 'पूनाची' से उद्धरण | Quotes by Perumal Murugan from 'Poonachi'   "मैं इंसानों के बारे में लिखने के प्रति आशंकित रहता हूँ;...
Leeladhar Jagudi

अपने अन्दर से बाहर आ जाओ

हर चीज़ यहाँ किसी न किसी के अन्दर है हर भीतर जैसे बाहर के अन्दर है फैलकर भी सारा का सारा बाहर ब्रह्माण्ड के अन्दर है बाहर सुन्दर...
Dhoomil

पटकथा

जब मैं बाहर आया मेरे हाथों में एक कविता थी और दिमाग़ में आँतों का एक्स-रे। वह काला धब्बा कल तक एक शब्द था; ख़ून के अँधेर में दवा का ट्रेडमार्क बन गया...
Venu Gopal

मेरा वर्तमान

मैं फूल नहीं हो सका। बग़ीचों से घिरे रहने के बावजूद। उनकी हक़ीक़त जान लेने के बाद यह मुमकिन भी नहीं था। यों अनगिन फूल हैं वहाँ। लेकिन मुस्कुराता हुआ...
Kedarnath Agarwal

हमारी ज़िन्दगी

हमारी ज़िन्दगी के दिन, बड़े संघर्ष के दिन हैं। हमेशा काम करते हैं, मगर कम दाम मिलते हैं। प्रतिक्षण हम बुरे शासन, बुरे शोषण से पिसते हैं। अपढ़, अज्ञान, अधिकारों से वंचित...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)