Tag: Time

Balbir Singh Rang

ओ समय के देवता, इतना बता दो

ओ समय के देवता! इतना बता दो— यह तुम्हारा व्यंग्य कितने दिन चलेगा? जब किया, जैसा किया, परिणाम पाया हो गए बदनाम ऐसा नाम पाया, मुस्कुराहट के नगर...
Gyanendrapati

समय और तुम

समय सफ़ेद करता है तुम्हारी एक लट तुम्हारी हथेली में लगी हुई मेंहदी को खींचकर उससे रंगता है तुम्हारे केश समय तुम्हारे सर में भरता है समुद्र—उफ़न उठने वाला अधकपारी का...
Kedarnath Singh

सुई और तागे के बीच में

माँ मेरे अकेलेपन के बारे में सोच रही है पानी गिर नहीं रहा पर गिर सकता है किसी भी समय मुझे बाहर जाना है और माँ चुप है...
Abstract, Time

समय की बोधकथा

प्रत्येक वाक्य को आज़ाद कर दो लफ़्ज़ और लफ़्ज़ के बीच बने सारे सेतु भरभराकर ढह जाने दो बच्चों को खेलने के लिए दे दो कविताओं के सारे आधे-अधूरे वाक्य गिलहरियों...
Javed Akhtar

वक़्त

ये वक़्त क्या है ये क्या है आख़िर कि जो मुसलसल गुज़र रहा है ये जब न गुज़रा था तब कहाँ था कहीं तो होगा गुज़र गया है तो अब...
Rahul Boyal

कविताएँ: अगस्त 2020

सहूलियत मुझे ज़िन्दगी के लिए सारी सहूलियत हासिल हुई मगर ज़िन्दगी— उसका कुछ अता-पता न था! जो था इस जिस्म की नौ-नाली में वह विज्ञान की दृष्टि से क़तई...
Keshav Sharan

कविताएँ: अगस्त 2020

व्यापार और प्यार: एक गणित यह जो हम लेते हैं यह जो हम देते हैं व्यापार है इसमें से घटा दो अगर लाभ-हानि का जो विचार है तो बाक़ी बचा प्यार है! फिर प्यार में जोड़...
Abstract Face Line Drawing

उतना कवि तो कोई भी नहीं

उतना कवि तो कोई भी नहीं जितनी व्‍यापक दुनिया जितने अन्तर्मन के प्रसंग आहत करती शब्दावलियाँ फिर भी उँगलियों को दुखाकर शरीक हो जातीं दुर्दान्त भाषा के लिजलिजे शोर में अंग-प्रत्‍यंग...
Bodies, Sensual, Intimacy, Tattoo, Flower, Back, Lesbian, Body, Touch

प्यार का वक़्त

वह या तो बीच का वक़्त होता है या पहले का। जब भी लड़ाई के दौरान साँस लेने का मौक़ा मिल जाए। उस वक़्त जब मैं तुम्हारी बन्द पलकें बेतहाशा चूम रहा...
Puru Malav

पुरु मालव की कविताएँ

पार्टनर, तुम्हारी जात क्या है सच ही कहा था शेक्सपियर ने 'नाम में क्या रखा है' जो कुछ है, जाति है नाम तो नाम है, जाति थोड़ी है जो...
Old traditional woman in saree

शिकार के बखत चाची

आ गयी चाची, साड़ी सरियाती, निहाल, निश्चिन्त। अपमान के ज़हर के दो घूँट पिए तो क्या हुआ? अब वहाँ क्या मालूम, बाथरूम मिलता कि नहीं मिलता। चाची...
Manjula Bist

संक्रमण-काल

1 आज हर देश का शव नितान्त अकेला है हर देश का जीवित-भय एक है एक है धरती एक है आकाश एक है पानी का रंग एक ही स्वाद है आँसू का एक है...

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Gorakh Pandey

फूल

फूल हैं गोया मिट्टी के दिल हैं धड़कते हुए बादलों के ग़लीचों पे रंगीन बच्चे मचलते हुए प्यार के काँपते होंठ हैं मौत पर खिलखिलाती हुई चम्पई ज़िन्दगी जो कभी मात...
Balli Singh Cheema

तय करो किस ओर हो तुम

तय करो किस ओर हो तुम, तय करो किस ओर हो आदमी के पक्ष में हो या कि आदमख़ोर हो। ख़ुद को पसीने में भिगोना ही...
Sahir Ludhianvi

ये दुनिया दो-रंगी है

ये दुनिया दो-रंगी है एक तरफ़ से रेशम ओढ़े, एक तरफ़ से नंगी है एक तरफ़ अंधी दौलत की पागल ऐश-परस्ती एक तरफ़ जिस्मों की क़ीमत रोटी...
Harry Potter - Voldemort

सपने में वॉल्डेमॉर्ट

आप जानते हैं रॉल्फ़ फ़ाइंस को? "तुम जानते हो कौन... वो, जिसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए!" हाँ वही, जो वॉल्डेमॉर्ट बने थे हैरी पॉटर में जिसे देख काँप उठती थी बच्चों...
Bolna Hi Hai - Ravish Kumar

रवीश कुमार – ‘बोलना ही है’

रवीश कुमार की किताब 'बोलना ही है' से उद्धरण | Quotes from 'Bolna Hi Hai' (The Free Voice), a book by Ravish Kumar (चयन एवं...
Rahul Boyal

मैं शब्द खो दूँगा एक दिन

मैं शब्द खो दूँगा एक दिन एक दिन भाषा भी चुक जाएगी मेरी मैं बस सुना करूँगा तुम्हें कहूँगा कुछ नहीं जबकि याद आएगी तुम्हारी हो जाऊँगा बरी अपने आप से तुम भी...
Abstract painting, Woman

मैं अंततः वहीं मुड़ जाऊँगी

अभी किसी नाम से न पुकारना तुम मुझे पलटकर देखूँगी नहीं, हर नाम की एक पहचान है पहचान का एक इतिहास और हर इतिहास कहीं न कहीं रक्त...
Arun Prakash

नहान

मैं जब उस मकान में नया पड़ोसी बना तो मकान मालिक ने हिदायत दी थी—"बस तुम नहान से बचकर रहना। उसके मुँह नहीं लगना।...
Suhag Ke Nupur - Amritlal Nagar

किताब अंश: ‘सुहाग के नुपूर’ – अमृतलाल नागर

हिन्दी के मशहूर साहित्यकार अमृतलाल नागर का जन्म 17 अगस्त 1916 को हुआ था। उन्होंने नाटक, रेडियोनाटक, रिपोर्ताज, निबन्ध, संस्मरण, अनुवाद, बाल साहित्य आदि...
Rajesh Joshi

अन्धेरे के बारे में कुछ वाक्य

अन्धेरे में सबसे बड़ी दिक़्क़त यह थी कि वह किताब पढ़ना नामुमकिन बना देता था। पता नहीं शरारतन ऐसा करता था या किताब से डरता था उसके मन...
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