Tag: Time

Alok Kumar Mishra

कविताएँ: जून 2021

सबक़ इस समय ने पढ़ाए हैं हमें कई सबक़मसलन यही कि शब्दों से ज़्यादा स्पर्श में ताक़त होती है मिलने के अवसर गँवाना भूल नहीं, अपराध है और जीवन से...
Adarsh Bhushan

समय से मत लड़ो

लड़ो लड़ो वापस जाते हुए सुख से अड़ जाओ उसके रास्ते में ज़िद करते पैर पटककर— बाप की पतलून खींचकर मेले में कुछ देर और ठहर पसन्द का खिलौना...
Balbir Singh Rang

ओ समय के देवता, इतना बता दो

ओ समय के देवता! इतना बता दो— यह तुम्हारा व्यंग्य कितने दिन चलेगा?जब किया, जैसा किया, परिणाम पाया हो गए बदनाम ऐसा नाम पाया, मुस्कुराहट के नगर...
Gyanendrapati

समय और तुम

समय सफ़ेद करता है तुम्हारी एक लटतुम्हारी हथेली में लगी हुई मेंहदी को खींचकर उससे रंगता है तुम्हारे केशसमय तुम्हारे सर में भरता है समुद्र—उफ़न उठने वाला अधकपारी का...
Kedarnath Singh

सुई और तागे के बीच में

माँ मेरे अकेलेपन के बारे में सोच रही है पानी गिर नहीं रहा पर गिर सकता है किसी भी समय मुझे बाहर जाना है और माँ चुप है...
Abstract, Time

समय की बोधकथा

प्रत्येक वाक्य को आज़ाद कर दो लफ़्ज़ और लफ़्ज़ के बीच बने सारे सेतु भरभराकर ढह जाने दो बच्चों को खेलने के लिए दे दो कविताओं के सारे आधे-अधूरे वाक्य गिलहरियों...
Javed Akhtar

वक़्त

ये वक़्त क्या है ये क्या है आख़िर कि जो मुसलसल गुज़र रहा है ये जब न गुज़रा था तब कहाँ था कहीं तो होगा गुज़र गया है तो अब...
Rahul Boyal

कविताएँ: अगस्त 2020

सहूलियत मुझे ज़िन्दगी के लिए सारी सहूलियत हासिल हुई मगर ज़िन्दगी— उसका कुछ अता-पता न था! जो था इस जिस्म की नौ-नाली में वह विज्ञान की दृष्टि से क़तई...
Keshav Sharan

कविताएँ: अगस्त 2020

व्यापार और प्यार: एक गणित यह जो हम लेते हैं यह जो हम देते हैं व्यापार है इसमें से घटा दो अगर लाभ-हानि का जो विचार है तो बाक़ी बचा प्यार है!फिर प्यार में जोड़...
Abstract Face Line Drawing

उतना कवि तो कोई भी नहीं

उतना कवि तो कोई भी नहीं जितनी व्‍यापक दुनिया जितने अन्तर्मन के प्रसंगआहत करती शब्दावलियाँ फिर भी उँगलियों को दुखाकर शरीक हो जातीं दुर्दान्त भाषा के लिजलिजे शोर मेंअंग-प्रत्‍यंग...
Bodies, Sensual, Intimacy, Tattoo, Flower, Back, Lesbian, Body, Touch

प्यार का वक़्त

वह या तो बीच का वक़्त होता है या पहले का। जब भी लड़ाई के दौरान साँस लेने का मौक़ा मिल जाए। उस वक़्तजब मैं तुम्हारी बन्द पलकें बेतहाशा चूम रहा...
Puru Malav

पुरु मालव की कविताएँ

पार्टनर, तुम्हारी जात क्या है सच ही कहा था शेक्सपियर ने 'नाम में क्या रखा है' जो कुछ है, जाति है नाम तो नाम है, जाति थोड़ी है जो...

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Muktibodh - T S Eliot

टी. एस. ईलियट के प्रति

पढ़ रहा था कल तुम्हारे काव्य कोऔर मेरे बिस्तरे के पास नीरव टिमटिमाते दीप के नीचे अँधेरे में घिरे भोले अँधेरे में घिरे सारे सुझाव, गहनतम संकेत! जाने...
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जेफ़री मैकडैनियल की कविता ‘चुपचाप संसार’

जेफ़री मैकडैनियल (Jeffrey McDaniel) के पाँच कविता संग्रह आ चुके हैं, जिनमें से सबसे ताज़ा है 'चैपल ऑफ़ इनडवर्टेंट जॉय' (यूनिवर्सिटी ऑफ़ पिट्सबर्ग प्रेस,...
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मेरी भाषा मेरी माँ की तरह ही मुझसे अनजान है वह मेरा नाम नहीं जानती उसके शब्दकोश से मैं ग़ायब हूँ मेरे नाम के अभाव से, परेशान वह बिलकुल माँ...
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