Tag: Truth

jasvir tyagi

जसवीर त्यागी की कविताएँ

प्रकृति सबक सिखाती है घर के बाहर वक़्त-बेवक़्त घूम रहा था विनाश का वायरस आदमी की तलाश में आदमी अपने ही पिंजरे में क़ैद था प्रकृति, पशु-पक्षी उन्मुक्त होकर हँस रहे थे परिवर्तन का पहिया घूमता...
Bharat Bhushan Agrawal

निर्विकल्प

इसने नारे की हवाई छोड़ी उसने भाषण की चर्खी तीसरे ने योजना की महताब चौथे ने सेमिनार का अनार पाँचवें ने बहस के पटाखों की लड़ी छठे ने प्रदर्शन की...
Woman Face

एक सत्य

'Ek Satya', a poem by Anupama Jha जब लिखी जाती है कविता गौर वर्णा स्त्रियों पर, पहनायी जाती है शब्दों से रंग-बिरंगी चूड़ियाँ गोरी कलाइयों पर, विशेषणों में लग जाती है होड़ सँवारने...
Gaurav Bharti

भ्रम, सच, भेंट

Poems: Gaurav Bharti भ्रम द्वारका सेक्टर-तीन के तिरंगा चौक ट्रैफ़िक सिग्नल पर अगरबत्तियाँ बेचती बच्चियाँ खटखटाती हैं कार के मोटे ग्लास वाली खिड़की जो कभी नहीं सरकती मैं डीटीसी बस की एक सीट...
Father, Hands, Child, Hold

अनन्त सम्भावनाओं का अन्तिम सच

'Anant Sambhaavnaaon Ka Antim Sach', Hindi poem by Harshita Panchariya पिता, अनन्त के विस्तार के अन्तिम छोर में, शून्यता समेटे वह ठोस ग्रह है जो वास्तव में तरलता से निर्मित है। पिता,...
Mannu Bhandari

यही सच है

"मुझे डर है कि जिस आधार पर मैं तुमसे नफरत करती थी, उसी आधार पर कहीं मुझे अपने से नफरत न करनी पड़े।"

सच?

क्या सच वही है जो दिखता है? क्या सच वही है जो सुनता है? क्या सच वही है जो झूठ नहीं है? क्या सच का वर्ण-रूप नहीं...
Fire, Riots, Curfew

सच यही है

'Sach Yahi Hai', a poem by Mohandas Naimishrai सच यही है मंदिर में आरती गाते हुए भी नज़दीक की मस्जिद तोड़ने की लालसा हमारे भीतर जागती रहती है और मस्जिद में...
Satya Ke Prayog Athva Aatmakatha - Mahatma Gandhi

सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा

प्रस्तावना पहला भाग: जन्म बचपन बाल-विवाह पतित्व हाईस्कूल में दुःखद प्रसंग - 1
Jhootha Sach - Yashpal

यशपाल का ‘झूठा सच’

भारतीय स्वाधीनता संग्राम के एक क्रांतिकारी होने से लेकर हिन्दी लेखक बनने तक का सफर तय करने वाले यशपाल का उपन्यास 'झूठा सच' भारत...
Vishnu Prabhakar - Kavita

कड़वा सत्य

एक लम्बी मेज़ दूसरी लम्बी मेज़ तीसरी लम्बी मेज़ दीवारों से सटी पारदर्शी शीशेवाली अलमारियाँ मेज़ों के दोनों ओर बैठे हैं व्यक्ति पुरुष-स्त्रियाँ युवक-युवतियाँ बूढ़े-बूढ़ियाँ सब प्रसन्न हैं कम-से-कम अभिनय उनका इंगित करता...
Jhootha Sach - Yashpal

यशपाल – ‘झूठा सच’

यशपाल के उपन्यास 'झूठा सच' से उद्धरण | Quotes from 'Jhootha Sach' by Yashpal   "प्रेम और चुनाव में सब जायज़ है।"   "पुरुष स्त्री को चाहने लगे, यह...

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Arun Kamal

धार

कौन बचा है जिसके आगे इन हाथों को नहीं पसारा यह अनाज जो बदल रक्त में टहल रहा है तन के कोने-कोने यह कमीज़ जो ढाल बनी है बारिश...
Kishan Saroj

बड़ा आश्चर्य है

नीम-तरू से फूल झरते हैँ तुम्हारा मन नहीं छूते बड़ा आश्चर्य है रीझ, सुरभित हरित-वसना घाटियों पर, व्यँग्य से हँसते हुए परिपाटियों पर, इन्द्रधनु सजते-सँवरते हैँ तुम्हारा मन नहीं छूते बड़ा आश्चर्य है गहन...
Bhawani Prasad Mishra

मेरा अपनापन

रातों दिन बरसों तक मैंने उसे भटकाया लौटा वह बार-बार पार करके मेहराबें समय की मगर ख़ाली हाथ क्योंकि मैं उसे किसी लालच में दौड़ाता था दौड़ता था वह मेरे इशारे पर और जैसा...
Woman Reading

अन्तर्सज्जा

बहुत देख लिया नून-तेल, आटा-दाल बटलोई-कड़छुलवाली रसोईघर की खिड़की से बादल का छूटता कोना यह सोफ़ा कुर्सियाँ मेज़ पलंग फूलदान उधर धर दो कैलेण्डर में सुबह-शाम बंधे गलियारे में पूरब-पश्चिम क़ैद उस कोने में वह...
Teesri Kavita Ki Anumati Nahi - Sudarshan Sharma, Woman

सही-सही वजह

किसी के प्रेम में पड़ जाने की सही-सही वजह नहीं बता पातीं कभी भी स्त्रियाँ, जबकि पुरुषों के पास होते हैं एक सौ एक कारण स्त्रियों के पास अपने...
Teesri Kavita Ki Anumati Nahi - Sudarshan Sharma, Woman

स्त्री के भीतर की कुंडी

एक स्त्री ने भीतर से कुंडी लगायी और भूल गयी खोलने की विधि या कि कुंडी के पार ही जनमी थी एक स्त्री उस स्त्री ने केवल कोलाहल सुना देखा...
Teesri Kavita Ki Anumati Nahi - Sudarshan Sharma, Woman

तरकीबें

मनुष्य बने रहने की ज़्यादा तरकीबें नहीं बची हैं मेरे पास बस मैं कभी-कभी गैंतियों तले गिड़गिड़ाती ज़िन्दगियों पर रो लेती हूँ या फिर ये कि मृत्यु का भौंडा...
Father, Hands, Child, Hold

पीठ पर पहाड़

पीठ पर पहाड़ ढोते आदमी की उपमा पढ़कर छुटपन से ही मुझे हमेशा याद आयी पिता की तनी हुई रीढ़ पिता की पीठ पर ज्येष्ठ पुत्र होने के सम्मान...
Prayers

प्रार्थनाओं से बचना

दुःखों में बचे रहना चाहते हो तो प्रार्थनाओं से बचना प्रार्थना रत हथेलियों के बीच से बह जाता है एक हिस्सा जुझारूपन एक हिस्सा जिजीविषा प्रार्थनाएँ प्रमेय हैं जो सिद्ध...
Upendranath Ashk, Rajkamal Chaudhary

उपेन्द्रनाथ अश्क का राजकमल चौधरी को पत्र

5, ख़ुसरोबाग़ रोड इलाहाबाद, 21-11-61 प्रिय राजकमल, तुम्हारा पत्र मिला। उपन्यास (नदी बहती है) की प्रतियाँ भी मिलीं। मैं उपन्यास पढ़ भी गया। रात ही मैंने उसे...
Woman in Sari, Pallu

मैं तो भूल चली बाबुल का देश

ताल जैसा कच्चा आँगन और अट्ठारह की कच्ची उम्र देवर की शादी में बड़की भाभी झूम-झूमकर नाच रही हैं! तभी पता चला कि बड़के हंडे की...
Ramnika Gupta

पैने चाक़ू

मैं पंख फैलाए बांधे पंखों में हवा उन्मत्त मदमस्त उन्मुक्त गगन में उड़ती थी... रास नहीं आया उन्हें मेरा उड़ना वे पंजे पजाकर चोंत तेज़ कर धारदार पैनी नज़रों से मेरे पंख काटने को उद्यत बढ़े आ...
sandeep nirbhay ke liye

थार के कवि संदीप निर्भय के लिए

राजस्थान के धोरों से उठकर सुदूर दक्षिण गया एक युवा कवि गर्मी से पकी हुई उसकी पुश्तों का जेनेटिक्स स्ट्रक्चर साँवला है साँवली है उसकी मनचली प्रेमिका रेगिस्तान में मरीचिका-सी,...
Raghuvir Sahay

प्रेम नयी मनःस्थिति

दुःखी-दुःखी हम दोनों आओ बैठें अलग-अलग देखें, आँखों में नहीं हाथ में हाथ न लें हम लिए हाथ में हाथ न बैठे रह जाएँ बहुत दिनों बाद आज इतवार मिला...
Shrikant Verma

हस्तक्षेप

कोई छींकता तक नहीं इस डर से कि मगध की शांति भंग न हो जाए, मगध को बनाए रखना है तो मगध में शांति रहनी ही चाहिए मगध है, तो शांति...
nirmal gupt

साइकिल पर टँगी ढोलक

अलसभोर जा रहा साइकिल पर बांधे सलीक़े से मढ़ी, हरी पीली ढोलकें, इसकी थाप पर सदियाँ गाती आयीं अपने समय के मंगलगान जटिल समय में सवाल यह, कौन...
Sadness, Melancholy

आषाढ़ की भरी दोपहरी में लिखी एक उदास कविता

दर्द याद रहता है ख़ुशी गुम हो जाती है दंश विस्मृत नहीं होता स्पर्श में से बचा रह जाता है उतना हिस्सा जो रह जाता है उँगलियों पर चिपककर। भूख...
Rag Ranjan

मैं जहाँ कहीं से लौटा

मैंने कभी फूल नहीं तोड़े, जब भी उन्हें छुआ अपनी उंगलियों के पोरों पर एक सतर्क कृतज्ञता महसूस की मैंने किताबों में निशानदेही नहीं की कभी नहीं मोड़ा कोई...
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भविष्यफल

कोई एक अक्षर बताओ कोई रंग कोई दिशा किसी एक फूल का नाम लो कोई एक धुन याद करो कोई चिड़िया कोई माह—जैसे वैशाख खाने की किसी प्रिय चीज़ का नाम...
Mahavir Prasad Dwivedi

मेरी आँखों का दौलतपुर

बीता हुआ और बीत रहा हर एक क्षण स्मृति बनता चला जाता है। कुछ स्मृतियाँ सिर्फ़ स्मृतियाँ न रहकर अंतस पटल पर शिलालेख-सी अमिट...
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