Tag: Truth

Silent, Silence

फ़ैसला, सच, बीमारी

फ़ैसला मुक़दमे का पहला दिन अभियुक्त पर आरोपों के तय किए जाने का दिन था दूसरा दिन गवाहों के बयानों को दर्ज करने और सबूतों की पड़ताल का था मुक़दमे का तीसरा...
Kumar Mangalam

कविताएँ — जुलाई 2020

शहर 1 किसी पुराने शहर की गलियों के पत्थर उखड़ने लगे हैं कुछ बदरंग इमारतें ढह गई हैं बेवश एक बुज़ुर्ग आसमान देखता है और अपनी मौत का इंतज़ार करता है उस बुज़ुर्ग की...
jasvir tyagi

जसवीर त्यागी की कविताएँ

प्रकृति सबक सिखाती है घर के बाहर वक़्त-बेवक़्त घूम रहा था विनाश का वायरस आदमी की तलाश में आदमी अपने ही पिंजरे में क़ैद था प्रकृति, पशु-पक्षी उन्मुक्त होकर हँस रहे थे परिवर्तन का पहिया घूमता...
Bharat Bhushan Agrawal

निर्विकल्प

इसने नारे की हवाई छोड़ी उसने भाषण की चर्खी तीसरे ने योजना की महताब चौथे ने सेमिनार का अनार पाँचवें ने बहस के पटाखों की लड़ी छठे ने प्रदर्शन की...
Woman Face

एक सत्य

'Ek Satya', a poem by Anupama Jha जब लिखी जाती है कविता गौर वर्णा स्त्रियों पर, पहनायी जाती है शब्दों से रंग-बिरंगी चूड़ियाँ गोरी कलाइयों पर, विशेषणों में लग जाती है होड़ सँवारने...
Gaurav Bharti

भ्रम, सच, भेंट

Poems: Gaurav Bharti भ्रम द्वारका सेक्टर-तीन के तिरंगा चौक ट्रैफ़िक सिग्नल पर अगरबत्तियाँ बेचती बच्चियाँ खटखटाती हैं कार के मोटे ग्लास वाली खिड़की जो कभी नहीं सरकती मैं डीटीसी बस की एक सीट...
Father, Hands, Child, Hold

अनन्त सम्भावनाओं का अन्तिम सच

'Anant Sambhaavnaaon Ka Antim Sach', Hindi poem by Harshita Panchariya पिता, अनन्त के विस्तार के अन्तिम छोर में, शून्यता समेटे वह ठोस ग्रह है जो वास्तव में तरलता से निर्मित है। पिता,...
Mannu Bhandari

यही सच है

"मुझे डर है कि जिस आधार पर मैं तुमसे नफरत करती थी, उसी आधार पर कहीं मुझे अपने से नफरत न करनी पड़े।"

सच?

क्या सच वही है जो दिखता है? क्या सच वही है जो सुनता है? क्या सच वही है जो झूठ नहीं है? क्या सच का वर्ण-रूप नहीं...
Fire, Riots, Curfew

सच यही है

'Sach Yahi Hai', a poem by Mohandas Naimishrai सच यही है मंदिर में आरती गाते हुए भी नज़दीक की मस्जिद तोड़ने की लालसा हमारे भीतर जागती रहती है और मस्जिद में...
Satya Ke Prayog Athva Aatmakatha - Mahatma Gandhi

सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा

प्रस्तावना पहला भाग: जन्म बचपन बाल-विवाह पतित्व हाईस्कूल में दुःखद प्रसंग - 1
Jhootha Sach - Yashpal

यशपाल का ‘झूठा सच’

भारतीय स्वाधीनता संग्राम के एक क्रांतिकारी होने से लेकर हिन्दी लेखक बनने तक का सफर तय करने वाले यशपाल का उपन्यास 'झूठा सच' भारत...

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Suresh Jinagal

सुरेश जिनागल की कविताएँ: अक्टूबर 2020

ललेश्वरी बर्फ़ का सीना चीरकर उगे चिनार के नीचे बैठकर आग का कोई गीत गाती स्त्री सदियों की बर्फ़ को पिघला रही है उसकी ज़िद, उसका साहस...
Ganesh Shankar Vidyarthi

धर्म की आड़

इस समय, देश में धर्म की धूम है। उत्‍पात किये जाते हैं, तो धर्म और ईमान के नाम पर और ज़िद की जाती है,...
Ibne Insha

सब माया है

सब माया है, सब ढलती-फिरती छाया है इस इश्क़ में हमने जो खोया, जो पाया है जो तुमने कहा है, 'फ़ैज़' ने जो फ़रमाया है सब माया...
Sandeep Nirbhay

चिलम में चिंगारी और चरखे पर सूत

मेरे बच्चो! अपना ख़याल रखना आधुनिकता की कुल्हाड़ी काट न दे तुम्हारी जड़ें जैसे मोबाइलों ने लोक-कथाओं और बातों के पीछे लगने वाले हँकारों को काट दिया है जड़ों सहित वर्तमान...
Kunwar Narayan

अबकी अगर लौटा तो

अबकी अगर लौटा तो बृहत्तर लौटूँगा चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं कमर में बाँधे लोहे की पूँछें नहीं जगह दूँगा साथ चल रहे लोगों को तरेरकर न देखूँगा...
Poonachi - Perumal Murugan

पेरुमल मुरुगन – ‘पूनाची’

पेरुमल मुरुगन के उपन्यास 'पूनाची' से उद्धरण | Quotes by Perumal Murugan from 'Poonachi'   "मैं इंसानों के बारे में लिखने के प्रति आशंकित रहता हूँ;...
Leeladhar Jagudi

अपने अन्दर से बाहर आ जाओ

हर चीज़ यहाँ किसी न किसी के अन्दर है हर भीतर जैसे बाहर के अन्दर है फैलकर भी सारा का सारा बाहर ब्रह्माण्ड के अन्दर है बाहर सुन्दर...
Dhoomil

पटकथा

जब मैं बाहर आया मेरे हाथों में एक कविता थी और दिमाग़ में आँतों का एक्स-रे। वह काला धब्बा कल तक एक शब्द था; ख़ून के अँधेर में दवा का ट्रेडमार्क बन गया...
Venu Gopal

मेरा वर्तमान

मैं फूल नहीं हो सका। बग़ीचों से घिरे रहने के बावजूद। उनकी हक़ीक़त जान लेने के बाद यह मुमकिन भी नहीं था। यों अनगिन फूल हैं वहाँ। लेकिन मुस्कुराता हुआ...
Kedarnath Agarwal

हमारी ज़िन्दगी

हमारी ज़िन्दगी के दिन, बड़े संघर्ष के दिन हैं। हमेशा काम करते हैं, मगर कम दाम मिलते हैं। प्रतिक्षण हम बुरे शासन, बुरे शोषण से पिसते हैं। अपढ़, अज्ञान, अधिकारों से वंचित...
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