Tag: Urdu Nazm

Mohammad Alvi

मछली की बू

बिस्तर में लेटे लेटे उसने सोचा "मैं मोटा होता जाता हूँ कल मैं अपने नीले सूट को ऑल्टर करने दर्ज़ी के हाँ दे आऊँगा नया सूट दो-चार महीने बाद सही! दर्ज़ी...
Javed Akhtar

ये खेल क्या है

मिरे मुख़ालिफ़ ने चाल चल दी है और अब मेरी चाल के इंतिज़ार में है मगर मैं कब से सफ़ेद-ख़ानों सियाह-ख़ानों में रक्खे काले सफ़ेद मोहरों को देखता हूँ मैं सोचता...
Gulzar

अलाव

रात-भर सर्द हवा चलती रही रात-भर हम ने अलाव तापामैंने माज़ी से कई ख़ुश्क सी शाख़ें काटीं तुमने भी गुज़रे हुए लम्हों के पत्ते तोड़े मैंने जेबों...
Ahmad Faraz

मैं और तू

रोज़ जब धूप पहाड़ों से उतरने लगती कोई घटता हुआ, बढ़ता हुआ, बेकल साया एक दीवार से कहता कि मिरे साथ चलो और ज़ंजीर-ए-रिफ़ाक़त से गुरेज़ाँ दीवार अपने...
Majaz Lakhnavi

एक दोस्त की ख़ुश-मज़ाक़ी पर

"क्या तिरी नज़रों में ये रंगीनियाँ भाती नहीं क्या हवा-ए-सर्द तेरे दिल को तड़पाती नहीं क्या नहीं होती तुझे महसूस मुझ को सच बता तेज़ झोंकों में हवा के गुनगुनाने की सदा..."
Khurshid-ul-Islam

नई मरियम

कैसी तवाना, कैसी चंचल, कितनी शोख़ और क्या बेबाक कैसी उमंगें, कैसी तरंगें, कितनी साफ़ और कैसी पाक होश की बातें, शौक़ की घातें, जोश-ए-जवानी सीना-चाक ख़ंदा...
Faiz Ahmad Faiz

हम देखेंगे

'Hum Dekhenge', a nazm by Faiz Ahmad Faizहम देखेंगे लाज़िम है कि हम भी देखेंगे वो दिन कि जिसका वादा है जो लौह-ए-अज़ल में लिख्खा है जब ज़ुल्म-ओ-सितम...
Makhdoom Mohiuddin

रुत

दिल का सामान उठाओ जान को नीलाम करो और चलो दर्द का चाँद सर-ए-शाम निकल आएगा क्या मुदावा है चलो दर्द पियो चाँद को पैमाना बनाओ रुत की आँखों से टपकने...
Khurshid-ul-Islam

प्यास

दूर से चल के आया था मैं नंगे पाँव, नंगे सर सर में गर्द, ज़बाँ में काँटे, पाँव में छाले, होश थे गुम इतना प्यासा था...
Shadow, Restless

परछाइयाँ पकड़ने वाले

डाइरी के ये सादा वरक़ और क़लम छीन लो आईनों की दुकानों में सब अपने चेहरे लिए इक बरहना तबस्सुम के मोहताज हैं सर्द बाज़ार में एक भी चाहने वाला...
Akhtar Rahi

काला सूरज

कितने रौशन आफ़्ताबों को निगल कर काला सूरज रौशनी के शहर में दाख़िल हुआ सारी काली क़ुव्वतों ने काले सूरज को उठाया दोश पर ख़ुद सभी राहों को रौशन...
Meeraji

एक थी औरत

ये जी चाहता है कि तुम एक नन्ही सी लड़की हो और हम तुम्हें गोद में ले के अपनी बिठा लें यूँ ही चीख़ो चिल्लाओ,...

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