Tag: Village

Happy Girl Child

बचपन में दुपहरी थी, बरगद देखता है

बचपन में दुपहरी थी एक पेड़ था एक चिड़िया थी एक तालाब था तीनों गाँव में थे चिड़िया गाती थी चिड़िया पेड़ में थी पेड़ था तालाब में तालाब दुपहरी में था दुपहरी...
Des - Vinod Padraj

‘देस’ : देशज सन्दर्भों का आख्यान

कविता संग्रह: 'देस' कवि: विनोद पदरज प्रकाशक: बोधि प्रकाशनटिप्पणी: देवेश पथ सारियाविनोद पदरज देशज कवि हैं। वे राजस्थान की खाँटी संस्कृति का हिन्दी कविता में सशक्त...
Man outside a village home

आदमी का गाँव

हर आदमी के अन्दर एक गाँव होता है जो शहर नहीं होना चाहता बाहर का भागता हुआ शहर अन्दर के गाँव को बेढंगी से छूता रहता है जैसे उसने...
Amar Dalpura

कविताएँ: अक्टूबर 2020

1इन घरों में घास क्यों उगी है कौन रहता था यहाँ काठ पर ताला किसकी इच्छा से लगाया है इस आँगन को लीपने वाली स्त्री और उसका आदमी कहाँ...
Village, Farmer

गूँजे कूक प्यार की

जिस बरगद की छाँव तले रहता था मेरा गाँव वह बरगद ख़ुद घूम रहा अब नंगे-नंगे पाँव।रात-रात भर इस बरगद से क़िस्से सुनते थे गली, द्वार, बाड़े...
Balli Singh Cheema

ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के

ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के। अब अँधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गाँव के।कह रही है झोंपड़ी औ' पूछते हैं खेत भी कब...
Vijaydan Detha

लजवन्ती

किसी एक वक़्त की ढलान पर, क़ुदरत की गोद में एक गाँव बसा हुआ था। गाँव, गाँव के साँचे में ढला हुआ था। वे...
Ramkumar Krishak

एक रजैया बीवी-बच्चे

Ek Rajaiya Biwi Bachche | Ramkumar Krishakएक रजैया बीवी-बच्चे एक रजैया मैं खटते हुए ज़िन्दगी बोली— हो गया हुलिया टैं!जब से आया शहर गाँव को बड़े-बड़े अफ़सोस माँ-बहनें-परिवार घेर-घर...
Woman from village

जुहार करती हुईं

पहले उसने कहा— भई! मैं कविताएँ सुन-सुनकर बड़ा हुआ हूँहमारे लड़ दादा कवि थे हमारे पड़ दादा कवि थे हमारे दादा महाकवि थे पिता जी अनेकों पुरस्कारों से नवाज़े...
Kamal Singh Sultana

कविताएँ: सितम्बर 2020

कुछ कविताएँ कुछ कविताएँ जो शायद कभी लिखी नहीं जाएँगी वे हमेशा झूलती रहेंगी किसी न किसी दरख़्त की छाँव में, वे कविताएँ पीड़ाओं के रास्ते से कभी काग़ज़ तक नहीं...
Aarsi Prasad Singh

बैलगाड़ी

जा रही है गाँव की कच्ची सड़क से लड़खड़ाती बैलगाड़ी!एक बदक़िस्मत डगर से, दूर, वैभवमय नगर से, एक ही रफ़्तार धीमी, एक ही निर्जीव स्वर से, लादकर आलस्य, जड़ता...
Sandeep Nirbhay

जिस दिशा में मेरा भोला गाँव है

क्या बारिश के दिनों धोरों पर गड्डमड्ड होते हैं बच्चे क्या औरतों के ओढ़नों से झाँकता है गाँव क्या बुज़ुर्गों की आँखों में बचा है काजल क्या स्लेट...

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Man holding train handle

आधुनिकता

मैं इक्कीसवीं सदी की आधुनिक सभ्यता का आदमी हूँ जो बर्बरता और जंगल पीछे छोड़ आया हैमैं सभ्य समाज में बेचता हूँ अपना सस्ता श्रम और दो वक़्त की...
Justyna Bargielska

यूस्टीना बारगिल्स्का की कविताएँ

1977 में जन्मीं, पोलिश कवयित्री व उपन्यासकार यूस्टीना बारगिल्स्का (Justyna Bargielska) के अब तक सात कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्हें दो...
Saadat Hasan Manto

ख़ुशिया

ख़ुशिया सोच रहा था।बनवारी से काले तम्बाकूवाला पान लेकर वह उसकी दुकान के साथ लगे उस संगीन चबूतरे पर बैठा था जो दिन के...
Naresh Mehta

घर की ओर

वह— जिसकी पीठ हमारी ओर है अपने घर की ओर मुँह किये जा रहा है जाने दो उसे अपने घर।हमारी ओर उसकी पीठ— ठीक ही तो है मुँह यदि होता तो...
Upma Richa

या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
Manish Kumar Yadav

लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
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