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Wali Deccani

सोहबत-ए-ग़ैर-मूं जाया न करो

सोहबत-ए-ग़ैर-मूं जाया न करो दर्द-मंदाँ कूँ कुढ़ाया न करो हक़-परस्ती का अगर दावा है बे-गुनाहाँ कूँ सताया न करो अपनी ख़ूबी के अगर तालिब हो अपने तालिब कूँ जलाया...
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