Tag: Water

Well, Water

पानी

1 पृथ्वी पर मरने से पहले मनुष्य की आँख में मरा पानी— पर्यावरणविदों को मनुष्य की आँख का पानी बचाना चाहिए था पहले ताकि बचा रहता पत्तों, टहनियों, हवा और बच्चों की...
Keshav Sharan

कविताएँ: अगस्त 2020

व्यापार और प्यार: एक गणित यह जो हम लेते हैं यह जो हम देते हैं व्यापार है इसमें से घटा दो अगर लाभ-हानि का जो विचार है तो बाक़ी बचा प्यार है! फिर प्यार में जोड़...
Ram Dayal Munda

राम दयाल मुण्डा की कविताएँ

सूखी नदी/भरी नदी सूखी नदी एक व्यथा-कहानी जब था पानी तब था पानी! भरी नदी एक सीधी कहानी ऊपर पानी, नीचे पानी। विरोध उसे बाँधकर ले जा रहे थे राजा के सेनानी और नदी छाती पीटकर...
Naresh Saxena

पानी क्या कर रहा है

'Pani Kya Kar Raha Hai', Hindi Kavita by Naresh Saxena आज जब पड़ रही है कड़ाके की ठण्ड और पानी पीना तो दूर उसे छूने से बच...
Hand touching water

पानी

'Paani', short poems by Harshita Panchariya 1 उसने मुझसे कहा- "तुम पानी के जैसी हो इसलिए कभी ठहरती नहीं..." मैंने कहा - "पानी ठहर गया तो काई का पनपना निश्चित है!" और...
Ramnaresh Pathak

एक बूँद जल

रामनरेश पाठक की कविता 'एक बूँद जल' | 'Ek Boond Jal', a poem by Ramnaresh Pathak मेरी गौशाला के खूँटों पर दम तोड़ते तीन जोड़ी बैलों की आँखों की...
Woman, Village

मृगतृष्णा

सर पर मटका रख पानी भरने जाती लड़कियाँ अब ख़ूबसूरत नहीं लगती। चलते हुए, कभी लचकती उनकी कमर अब किसी सूखी नदी की दरार खायी बस एक पगडण्डी रह गई है। एक तालाब के...

पानी

आदमी को पानी की तरह होना चाहिए, निरंतर बहता हुआ जब जैसी जगह पायी, वैसा उसने रूप बनाया,आकार बनाया जब ज़रूरत हुई, जो रंग मिला, उसी...
Ghananand

हीन भएँ जल मीन अधीन

"मछली अपने प्रेमी जल के वियोग के कारण प्राण त्याग देती है और प्रतिदान में जल कुछ नहीं करता।"
Woman Standing near River, making Love sign

अनुवाद तुम

आँखों की नमी प्रेम की भाषा है। भाषा एक नदी है, नदी पानी का अनुवाद। अनुवाद दो किनारों का संवाद है, संवाद के लिए जरूरी नहीं भाषा। प्रेम की एक ही भाषा है, 'तुम'...
Stone, Water

पत्थर और पानी

पत्थर का पानी पर आरोप है कि सभ्यता के प्रारम्भ से लेकर आज तक वह केवल खेलता रहा है काया से अन्तर्मन का स्पर्श उसके बस की...

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Suresh Jinagal

सुरेश जिनागल की कविताएँ: अक्टूबर 2020

ललेश्वरी बर्फ़ का सीना चीरकर उगे चिनार के नीचे बैठकर आग का कोई गीत गाती स्त्री सदियों की बर्फ़ को पिघला रही है उसकी ज़िद, उसका साहस...
Ganesh Shankar Vidyarthi

धर्म की आड़

इस समय, देश में धर्म की धूम है। उत्‍पात किये जाते हैं, तो धर्म और ईमान के नाम पर और ज़िद की जाती है,...
Ibne Insha

सब माया है

सब माया है, सब ढलती-फिरती छाया है इस इश्क़ में हमने जो खोया, जो पाया है जो तुमने कहा है, 'फ़ैज़' ने जो फ़रमाया है सब माया...
Sandeep Nirbhay

चिलम में चिंगारी और चरखे पर सूत

मेरे बच्चो! अपना ख़याल रखना आधुनिकता की कुल्हाड़ी काट न दे तुम्हारी जड़ें जैसे मोबाइलों ने लोक-कथाओं और बातों के पीछे लगने वाले हँकारों को काट दिया है जड़ों सहित वर्तमान...
Kunwar Narayan

अबकी अगर लौटा तो

अबकी अगर लौटा तो बृहत्तर लौटूँगा चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं कमर में बाँधे लोहे की पूँछें नहीं जगह दूँगा साथ चल रहे लोगों को तरेरकर न देखूँगा...
Poonachi - Perumal Murugan

पेरुमल मुरुगन – ‘पूनाची’

पेरुमल मुरुगन के उपन्यास 'पूनाची' से उद्धरण | Quotes by Perumal Murugan from 'Poonachi'   "मैं इंसानों के बारे में लिखने के प्रति आशंकित रहता हूँ;...
Leeladhar Jagudi

अपने अन्दर से बाहर आ जाओ

हर चीज़ यहाँ किसी न किसी के अन्दर है हर भीतर जैसे बाहर के अन्दर है फैलकर भी सारा का सारा बाहर ब्रह्माण्ड के अन्दर है बाहर सुन्दर...
Dhoomil

पटकथा

जब मैं बाहर आया मेरे हाथों में एक कविता थी और दिमाग़ में आँतों का एक्स-रे। वह काला धब्बा कल तक एक शब्द था; ख़ून के अँधेर में दवा का ट्रेडमार्क बन गया...
Venu Gopal

मेरा वर्तमान

मैं फूल नहीं हो सका। बग़ीचों से घिरे रहने के बावजूद। उनकी हक़ीक़त जान लेने के बाद यह मुमकिन भी नहीं था। यों अनगिन फूल हैं वहाँ। लेकिन मुस्कुराता हुआ...
Kedarnath Agarwal

हमारी ज़िन्दगी

हमारी ज़िन्दगी के दिन, बड़े संघर्ष के दिन हैं। हमेशा काम करते हैं, मगर कम दाम मिलते हैं। प्रतिक्षण हम बुरे शासन, बुरे शोषण से पिसते हैं। अपढ़, अज्ञान, अधिकारों से वंचित...
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