Tag: Water

Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Panchtatv

पंचतत्व (चींटी, तितली, पानी, गिलहरी और दरख़्त)

मेरे दोस्त जब भी चलना तो बाघ की तरह नहीं चलनाचलना चींटियों की तरह सबके साथ बिना डरे, बिना थके, बिना रुके, एकदम शान्त—केवल अपने पथ परजब भी भरो...
Naresh Saxena

मछलियाँ

एक बार हमारी मछलियों का पानी मैला हो गया था उस रात घर में साफ़ पानी नहीं था और सुबह तक सारी मछलियाँ मर गई थीं हम यह...
Well, Water

पानी

1पृथ्वी पर मरने से पहले मनुष्य की आँख में मरा पानी— पर्यावरणविदों को मनुष्य की आँख का पानी बचाना चाहिए था पहले ताकि बचा रहता पत्तों, टहनियों, हवा और बच्चों की...
Keshav Sharan

कविताएँ: अगस्त 2020

व्यापार और प्यार: एक गणित यह जो हम लेते हैं यह जो हम देते हैं व्यापार है इसमें से घटा दो अगर लाभ-हानि का जो विचार है तो बाक़ी बचा प्यार है!फिर प्यार में जोड़...
Ram Dayal Munda

राम दयाल मुण्डा की कविताएँ

सूखी नदी/भरी नदी सूखी नदी एक व्यथा-कहानी जब था पानी तब था पानी!भरी नदी एक सीधी कहानी ऊपर पानी, नीचे पानी। विरोध उसे बाँधकर ले जा रहे थे राजा के सेनानी और नदी छाती पीटकर...
Naresh Saxena

पानी क्या कर रहा है

यह कविता यहाँ सुनें: https://youtu.be/LZ5-eEJD_8cआज जब पड़ रही है कड़ाके की ठण्ड और पानी पीना तो दूर उसे छूने से बच रहे हैं लोग तो ज़रा चलकर देख...
Hand touching water

पानी

'Paani', short poems by Harshita Panchariya1उसने मुझसे कहा- "तुम पानी के जैसी हो इसलिए कभी ठहरती नहीं..." मैंने कहा - "पानी ठहर गया तो काई का पनपना निश्चित है!"और...
Ramnaresh Pathak

एक बूँद जल

मेरी गौशाला के खूँटों पर दम तोड़ते तीन जोड़ी बैलों की आँखों की गहराई में रुका हुआ एक बूँद जल हर क्षण दिखता है मुझे नींद नहीं आती।टूटी खाट पर हताश पड़े मेरे बापू...
Woman, Village

मृगतृष्णा

सर पर मटका रख पानी भरने जाती लड़कियाँ अब ख़ूबसूरत नहीं लगती। चलते हुए, कभी लचकती उनकी कमर अब किसी सूखी नदी की दरार खायी बस एक पगडण्डी रह गई है। एक तालाब के...

पानी

आदमी को पानी की तरह होना चाहिए, निरंतर बहता हुआ जब जैसी जगह पायी, वैसा उसने रूप बनाया,आकार बनाया जब ज़रूरत हुई, जो रंग मिला, उसी...
Ghananand

हीन भएँ जल मीन अधीन

"मछली अपने प्रेमी जल के वियोग के कारण प्राण त्याग देती है और प्रतिदान में जल कुछ नहीं करता।"

STAY CONNECTED

38,332FansLike
20,438FollowersFollow
28,388FollowersFollow
1,720SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Thithurte Lamp Post - Adnan Kafeel Darwesh

‘ठिठुरते लैम्प पोस्ट’ से कविताएँ

अदनान कफ़ील 'दरवेश' का जन्म ग्राम गड़वार, ज़िला बलिया, उत्तर प्रदेश में हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय से कम्प्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने...
Vijendra Anil

कहाँ हैं तुम्हारी वे फ़ाइलें

मैं जानता था—तुम फिर यही कहोगे यही कहोगे कि राजस्थान और बिहार में सूखा पड़ा है ब्रह्मपुत्र में बाढ़ आयी है, उड़ीसा तूफ़ान की चपेट में...
Dunya Mikhail

दुन्या मिखाइल की कविता ‘चित्रकार बच्चा’

इराक़ी-अमेरिकी कवयित्री दुन्या मिखाइल (Dunya Mikhail) का जन्म बग़दाद में हुआ था और उन्होंने बग़दाद विश्वविधालय से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की। सद्दाम हुसैन...
Muktibodh - T S Eliot

टी. एस. ईलियट के प्रति

पढ़ रहा था कल तुम्हारे काव्य कोऔर मेरे बिस्तरे के पास नीरव टिमटिमाते दीप के नीचे अँधेरे में घिरे भोले अँधेरे में घिरे सारे सुझाव, गहनतम संकेत! जाने...
Jeffrey McDaniel

जेफ़री मैकडैनियल की कविता ‘चुपचाप संसार’

जेफ़री मैकडैनियल (Jeffrey McDaniel) के पाँच कविता संग्रह आ चुके हैं, जिनमें से सबसे ताज़ा है 'चैपल ऑफ़ इनडवर्टेंट जॉय' (यूनिवर्सिटी ऑफ़ पिट्सबर्ग प्रेस,...
Antas Ki Khurchan - Yatish Kumar

‘अन्तस की खुरचन’ से कविताएँ

यतीश कुमार की कविताओं को मैंने पढ़ा। अच्छी रचना से मुझे सार्वजनिकता मिलती है। मैं कुछ और सार्वजनिक हुआ, कुछ और बाहर हुआ, कुछ...
Shivangi

उसके शब्दकोश से मैं ग़ायब हूँ

मेरी भाषा मेरी माँ की तरह ही मुझसे अनजान है वह मेरा नाम नहीं जानती उसके शब्दकोश से मैं ग़ायब हूँ मेरे नाम के अभाव से, परेशान वह बिलकुल माँ...
Savitribai Phule, Jyotiba Phule

सावित्रीबाई फुले का ज्योतिबा फुले को पत्र

Image Credit: Douluri Narayanaप्रिय सत्यरूप जोतीबा जी को सावित्री का प्रणाम,आपको पत्र लिखने की वजह यह है कि मुझे कई दिनों से बुख़ार हो रहा...
Khoyi Cheezon Ka Shok - Savita Singh

‘खोई चीज़ों का शोक’ से कविताएँ

सविता सिंह का नया कविता संग्रह 'खोई चीज़ों का शोक' सघन भावनात्मक आवेश से युक्त कविताओं की एक शृंखला है जो अत्यन्त निजी होते...
Rahul Tomar

कविताएँ: दिसम्बर 2021

आपत्तियाँ ट्रेन के जनरल डिब्बे में चार के लिए तय जगह पर छह बैठ जाते थे तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होती थीस्लीपर में रात के समय...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)