Tag: Woman

Chandrakant Devtale

तुम वहाँ भी होंगी

अगर मुझे औरतों के बारे में कुछ पूछना हो तो मैं तुम्हें ही चुनूँगा तहक़ीक़ात के लिए यदि मुझे औरतों के बारे में कुछ कहना हो तो मैं...
Indu Jain

तीन औरतें

एक औरत जो महीना-भर पहले जली थी आज मर गयी एक औरत थी जो यातना सहती रही सिर्फ़ पाँव की हड्डी टूट जाने से बहाना ढूँढ बैठी न जीने का दिल जकड़...
Rashid Jahan

मर्द और औरत

मर्द - औरत का पहला कर्तव्य बच्चों की परवरिश है! औरत - मर्द का पहला कर्तव्य बच्चों का हकदार होना है! मर्द - क्या मतलब? औरत - मतलब यह कि औरत को बच्चे पालने का हुक्म लगा दिया लेकिन बच्चे होते किसकी मिलकियत हैं! मर्द - बाप की! औरत - तो फिर मैं उनको क्यूँ पालूँ! जिसकी मिलकियत हैं वह स्वयं पाले!
Old man reading newspaper

शुभम नेगी की कविताएँ

अख़बार दरवाज़ा खोलने से पहले ही रेंगकर घुसती है अंदर सुराख़ में से बाहर दुबके अख़बार पर बिछी ख़ून की बू अख़बार वाला छोड़ जाता है आजकल मेरे दरवाज़े पर साढ़े चार रुपये...
Chandrakant Devtale

एक सपना यह भी

सुख से, पुलकने से नहीं रचने-खटने की थकान से सोयी हुई है स्त्री सोयी हुई है जैसे उजड़कर गिरी सूखे पेड़ की टहनी अब पड़ी पसरकर मिलता जो सुख वह...
Leeladhar Jagudi

लापता पूरी स्त्री

मौत पैदा करते पुरुषों ने जीवन पैदा करती स्त्री को पहले ही प्रेम की बुनियाद में गाड़ रखा है अपने में आधी स्त्री का प्रतिनिधित्व लिए हुए पुरुष...
Mangalesh Dabral

तुम्हारे भीतर

एक स्त्री के कारण तुम्हें मिल गया एक कोना तुम्हारा भी हुआ इंतज़ार एक स्त्री के कारण तुम्हें दिखा आकाश और उसमें उड़ता चिड़ियों का संसार एक स्त्री...
Women at beach

अच्छी औरतें

औरतें जो कि माँ के गर्भ से ही अच्छे होने का बीड़ा उठाये आती हैं क्योंकि अच्छी औरत का गुणगान करते हैं धर्मग्रन्थ महाकवि और समाज अच्छी औरतें सराही जाती हैं चाही जाती हैं दिखायी जाती हैं कथा में टीवी पर फ़िल्मों...
Kaifi Azmi

औरत

उठ मिरी जान मिरे साथ ही चलना है तुझे क़ल्ब-ए-माहौल में लर्ज़ां शरर-ए-जंग हैं आज हौसले वक़्त के और ज़ीस्त के यक-रंग हैं आज आबगीनों में तपाँ...
Paritosh Kumar Piyush

फ़र्क़, स्त्री, आलिंगन, सीखना, आधी रात

फ़र्क़ हत्यारे पहले भी होते थे हत्या पहले भी होती थी पहले हम हत्यारे को हत्यारा कहते थे हत्या को हत्या कहते थे फ़र्क़ इतना है कि हम थोड़े ज़्यादा बौद्धिक हो...
Girl, Woman

फँसी हुई लड़कियाँ

फँसी हुई लड़कियाँ! उसके गाँव जवार और मुहल्ले का ये आसाध्य और बहुछूत शब्द था, कुछ लड़कियों के तथाकथित प्रेमियों ने अपने जैसे धूर्त दोस्तों में बैठकर...
Nirmala Putul

अपनी ज़मीन तलाशती बेचैन स्त्री

यह कैसी विडम्बना है कि हम सहज अभ्यस्त हैं एक मानक पुरुष-दृष्टि से देखने स्वयं की दुनिया मैं स्वयं को स्वयं की दृष्टि से देखते मुक्त होना चाहती हूँ...

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Gorakh Pandey

फूल

फूल हैं गोया मिट्टी के दिल हैं धड़कते हुए बादलों के ग़लीचों पे रंगीन बच्चे मचलते हुए प्यार के काँपते होंठ हैं मौत पर खिलखिलाती हुई चम्पई ज़िन्दगी जो कभी मात...
Balli Singh Cheema

तय करो किस ओर हो तुम

तय करो किस ओर हो तुम, तय करो किस ओर हो आदमी के पक्ष में हो या कि आदमख़ोर हो। ख़ुद को पसीने में भिगोना ही...
Sahir Ludhianvi

ये दुनिया दो-रंगी है

ये दुनिया दो-रंगी है एक तरफ़ से रेशम ओढ़े, एक तरफ़ से नंगी है एक तरफ़ अंधी दौलत की पागल ऐश-परस्ती एक तरफ़ जिस्मों की क़ीमत रोटी...
Harry Potter - Voldemort

सपने में वॉल्डेमॉर्ट

आप जानते हैं रॉल्फ़ फ़ाइंस को? "तुम जानते हो कौन... वो, जिसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए!" हाँ वही, जो वॉल्डेमॉर्ट बने थे हैरी पॉटर में जिसे देख काँप उठती थी बच्चों...
Bolna Hi Hai - Ravish Kumar

रवीश कुमार – ‘बोलना ही है’

रवीश कुमार की किताब 'बोलना ही है' से उद्धरण | Quotes from 'Bolna Hi Hai' (The Free Voice), a book by Ravish Kumar (चयन एवं...
Rahul Boyal

मैं शब्द खो दूँगा एक दिन

मैं शब्द खो दूँगा एक दिन एक दिन भाषा भी चुक जाएगी मेरी मैं बस सुना करूँगा तुम्हें कहूँगा कुछ नहीं जबकि याद आएगी तुम्हारी हो जाऊँगा बरी अपने आप से तुम भी...
Abstract painting, Woman

मैं अंततः वहीं मुड़ जाऊँगी

अभी किसी नाम से न पुकारना तुम मुझे पलटकर देखूँगी नहीं, हर नाम की एक पहचान है पहचान का एक इतिहास और हर इतिहास कहीं न कहीं रक्त...
Arun Prakash

नहान

मैं जब उस मकान में नया पड़ोसी बना तो मकान मालिक ने हिदायत दी थी—"बस तुम नहान से बचकर रहना। उसके मुँह नहीं लगना।...
Suhag Ke Nupur - Amritlal Nagar

किताब अंश: ‘सुहाग के नुपूर’ – अमृतलाल नागर

हिन्दी के मशहूर साहित्यकार अमृतलाल नागर का जन्म 17 अगस्त 1916 को हुआ था। उन्होंने नाटक, रेडियोनाटक, रिपोर्ताज, निबन्ध, संस्मरण, अनुवाद, बाल साहित्य आदि...
Rajesh Joshi

अन्धेरे के बारे में कुछ वाक्य

अन्धेरे में सबसे बड़ी दिक़्क़त यह थी कि वह किताब पढ़ना नामुमकिन बना देता था। पता नहीं शरारतन ऐसा करता था या किताब से डरता था उसके मन...
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