Tag: स्त्री लेखन

Woman Face Painting

फ़लक तक चल… साथ मेरे

पर्दों के बीच की झिरी से सूरज की किरणें वनिता के चेहरे पर ऐसे पड़ रही थीं जैसे किसी मंच पर प्रमुख किरदार के...
Woman

क्या तुमने, प्रेम एवं विवाह, चरित्रहीन

क्या तुमने उसकी कमर टटोलने से पहले क्या तुमने टटोली हैं उसकी हथेलियाँ? उसके अधर चूमने से पहले क्या तुमने चूमा है उसका माथा? क्या तुमने कभी उसके सीने को स्पर्श किए बिना स्पर्श किया है उसका हृदय? प्रेम एवं विवाह प्रेम...
Woman Feet

घर की चौखट से बाहर

दरवाज़े के पीछे परदे की ओट से झाँकती औरत दरवाज़े से बाहर देखती है- गली-मोहल्ला, शहर, संसार! आँख, कान, विचार स्वतन्त्र हैं बन्धन हैं सिर्फ़ पाँव में कुल की लाज सीमाओं का...
Anamika

ओढ़नी

मैट्रिक के इम्तिहान के बाद सीखी थी दुल्हन ने फुलकारी! दहेज की चादरों पर माँ ने कढ़वाए थे तरह-तरह के बेल-बूटे, तकिए के खोलों पर 'गुडलक' कढ़वाया था! कौन माँ नहीं...
Father Daughter, Girl

मुहर-भर रहे पिता

उन लड़कियों ने जाना पिता को एक अडिग आदेश-सा, एक मुहर-भर रहे पिता बेटियों के दस्तावेज़ों पर। कहाँ जाना, क्या खाना, क्या पढ़ना, निर्धारित कर, पिता ने निभायीं ज़िम्मेदारियाँ अपनी, बहरे रहे...
Pallavi Vinod

ये डायनें

पितृसत्ता को पोषित करती औरतों ने जाना ही नहीं कि उनके शब्दकोष में 'बहनापा' जैसा भी कोई शब्द है जिसे विस्तार देना चाहिए छठ, जियुतिया करती माँएँ हर बेटी...
Old traditional woman in saree

शिकार के बखत चाची

आ गयी चाची, साड़ी सरियाती, निहाल, निश्चिन्त। अपमान के ज़हर के दो घूँट पिए तो क्या हुआ? अब वहाँ क्या मालूम, बाथरूम मिलता कि नहीं मिलता। चाची...
Girl, Rose

आइसोलेशन में प्रेमिकाएँ

पेड़, नदी, पहाड़ और झरने प्रेमिकाएँ उन सबसे लेती हैं उधार एक-एक कटोरी प्रीत और करघे की खच-खच में बहाती हुई अपनी निर्झरिणी वे बुन डालती हैं एक ख़ूबसूरत कालीन जिसमें मौजूद...
Woman

नियम, प्रश्न बिद्ध, सीटी

नियम पिंजरे में बन्द मैना घर की औरतों से गाती-बतियाती फुदकती उड़ते पंछियों को देख पंख फड़फड़ाती खा लेती, जो मिल जाता। आग नज़रों के नीचे रौबदार मूँछे देख वह पिंजरे में भी फुदकती न थी सतर्कता...
Zehra Nigah

एक लड़की

कैसा सख़्त तूफ़ाँ था कितनी तेज़ बारिश थी और मैं ऐसे मौसम में जाने क्यूँ भटकती थी वो सड़क के उस जानिब रौशनी के खम्भे से सर लगाए इस्तादा आने वाले...
Woman Abstract

योग्यता संघर्षरत है

वो अन्ततः कसी गयीं उन्हीं कसौटियों पर जो अनन्त काल से मान्य थीं स्त्रियों के लिए उनके तमाम गुण दरकिनार कर दिए जाते एक समय विशेष में...
Roopali Tandon

क्षणिकाएँ

1 बालकनी में टँगी अरगनी पर स्त्री रोज़ फैलाकर रखती है अपनी तकलीफ़ें, और साँझ होते-होते खींच लाती है उन्हें भीतर... 2 भगोने से बाहर निकलती चाय को फूँक मारकर स्त्री रोज़ स्वयं...

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