Tag: World Literature

Poems from Paterson

जिम जारमुश् की फिल्म ‘पैटर्सन’ में रॉन पैजेट की कविताएँ

रंग भरने की कला आती हो तो रंगों में कविता कैसे उभरती है, इसका जीता-जागता उदाहरण है जिम जारमुश् की फ़िल्म 'पैटर्सन', जिसका नायक...
Orhan Veli Kanik

ओरहान वेली की दो कविताएँ

कविताएँ: ओरहान वेली अनुवाद: देवेश पथ सारिया मेरी पूर्व पत्नी हर रात तुम मेरे सपनों में आती हो हर रात मैं तुम्हें साटन की सफ़ेद चादर पर देखता...
Nicanor Parra

निकानोर पार्रा की कविताएँ

निकानोर पार्रा चिलियन कवि हैं। प्रस्तुत कविताओं का हिन्दी में अनुवाद देवेश पथ सारिया ने किया है। कविताएँ लोगोज़ जर्नल पर उपलब्ध लिज़ वर्नर...
Maya Angelou

माया एंजेलो की कविता ‘मैं फिर भी उठती हूँ’

तुम मेरा इतिहास लिख सकते हो अपने कड़वे, मुड़े-तुड़े झूठों से तुम मुझे गंदगी में कुचल सकते हो फिर भी, धूल की तरह, मैं उठूँगी। क्या मेरी उन्मुक्तता...
Maya Angelou

माया एंजेलो की कविता ‘उदित हूँ मैं’

माया एंजेलो की कविता 'And Still I Rise' का अनुवाद कड़वे छली मृषा से इतिहास में तुम्हारे तुम्हारी लेखनी से मैं न्यूनतम दिखूँगी धूल-धूसरित भी कर सकते...
Nazim Hikmet

नाज़िम हिकमत : रात 9 से 10 के बीच की कविताएँ

अनुवाद: मनोज पटेल (पढ़ते-पढ़ते से साभार) (पत्नी पिराए के लिए) 21 सितम्बर 1945 हमारा बच्चा बीमार है। उसके पिता जेल में हैं। तुम्हारे थके हाथों में तुम्हारा सर बहुत...
Rudyard Kipling

रडयार्ड किपलिंग की कहानी ‘भविष्यवाणी’

नहीं यद्यपि तुम मरो इस रात, प्रिय और करो विलाप, एक प्रेतात्मा मेरे द्वार मर्त्य भय करेगा अमर प्रेम को नाकाम— मैं करूँगा और तुमको प्यार, जो मृत्यु...
The Selfish Giant story in Hindi by Oscar Wilde

ऑस्कर वाइल्ड की कहानी ‘स्वार्थी दानव’ (The Selfish Giant)

हर शाम स्कूल से आने के बाद बच्चे खेलने के लिए दानव के बाग़ में जाया करते थे। यह एक बहुत बड़ा और सुंदर...
Sylvia Plath

सिल्विया प्लाथ की कविता ‘डैडी’

अब और नहीं आप नहीं कर सकते, नहीं कर सकते आप अपने जूते में मुझे पैरों की तरह रखकर मुझ बेचारी अभागिन को तीस सालों से साँस लेने और छींकने...
Louise Gluck

लुइस ग्लुक की दो कविताएँ

मौन, मृत्यु और अकेलेपन से सम्वाद करती कवयित्री लुइस ग्लुक की दो कविताएँ (लुइस ग्लुक को हाल ही में साहित्य श्रेणी में नोबल पुरस्कार...
Yehuda Amichai

येहूदा एमिहाए की कविता ‘और हम उत्साहित नहीं होंगे’

Poem: And We Shall Not Get Excited Poet: Yehuda Amichai Translated from the Hebrew by Barbara and Benjamin Harshav अंग्रेज़ी से अनुवाद: सृष्टि ठाकुर और हम उत्साहित नहीं...
Tadeusz Rozewicz

तादेऊष रूज़ेविच की कविता ‘ज़िन्दा बच गया’

'जीवन के बीचोंबीच' : तादेऊष रूज़ेविच की कविताएँ से अनुवाद: आग्नयेष्का कूच्क्येवीच-फ़्राश और कुँवर नारायण मैं चौबीस का हूँ मेरा वध होना था बच गया। खोखले हैं ये सारे...

STAY CONNECTED

37,762FansLike
16,586FollowersFollow
22,311FollowersFollow
1,210SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Silent, Quiet, Silence, Woman, Shut, Do not speak, Taboo

अंधेरे के नाख़ून

एक छोर से चढ़ता आता है रोशनी को लीलता हुआ एक ब्लैक होल, अंधेरे का नश्तर चीर देता है आसमान का सीना, और बरस पड़ता है बेनूर...
Adarsh Bhushan

लाठी भी कोई खाने की चीज़ होती है क्या?

हमारे देश में लाठियाँ कब आयीं यह उचित प्रश्न नहीं कहाँ से आयीं यह भी बेहूदगी भरा सवाल होगा लाठियाँ कैसे चलीं कहाँ चलीं कहाँ से कहाँ तक चलीं क्या पाया...
Raghuvir Sahay

चेहरा

चेहरा कितनी विकट चीज़ है जैसे-जैसे उम्र गुज़रती है वह या तो एक दोस्त होता जाता है या तो दुश्मन देखो, सब चेहरों को देखो पहली बार जिन्हें...
Kumar Ambuj

कुछ समुच्चय

स्मृति की नदी वह दूर से बहती आती है, गिरती है वेग से उसी से चलती हैं जीवन की पनचक्कियाँ वसंत-1 दिन और रात में नुकीलापन नहीं है मगर...
Gaurav Bharti

हम मारे गए

हमें डूबना ही था और हम डूब गए हमें मरना ही था और हम मारे गए हम लड़ रहे थे कई स्तरों पर लड़ रहे थे हमने निर्वासन का दंश...
Rahul Sankrityayan

तुम्हारे धर्म की क्षय

वैसे तो धर्मों में आपस में मतभेद है। एक पूरब मुँह करके पूजा करने का विधान करता है, तो दूसरा पश्चिम की ओर। एक...
Melancholy, Sadness, Night

लाखन सिंह की कविताएँ

1 जीना किसी सड़ी लाश को खाने जैसा हो गया है, हर एक साँस के साथ निगलता हूँ उलझी हुई अंतड़ियाँ, इंद्रियों से चिपटा हुआ अपराधबोध घिसटता है माँस के लोथड़े...
Abstract, Head, Human

शिवम तोमर की कविताएँ

रोटी की गुणवत्ता जिस गाय को अम्मा खिलाती रहीं रोटियाँ और उसका माथा छूकर माँगती रहीं स्वर्ग में जगह अब घर के सामने आकर रम्भियाती रहती है अम्मा ने तो खटिया...
Agyeya

युद्ध-विराम

नहीं, अभी कुछ नहीं बदला है। अब भी ये रौंदे हुए खेत हमारी अवरुद्ध जिजिविषा के सहमे हुए साक्षी हैं; अब भी ये दलदल में फँसी हुई मौत की मशीनें उनके...
Rahul Boyal

जब तुम समझने लगो ज़िन्दगी

वो जहाँ पर मेरी नज़र ठहरी हुई है वहाँ ग़ौर से देखो तुम तुम भी वहाँ हो मेरे साथ मेरे दाएँ हाथ की उँगलियों में उलझी हुई हैं...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)