Tag: World Literature

Orhan Veli Kanik

मैं समझा नहीं सकता

Poem: 'I Can't Tell' - Orhan Veli Kanik Translation from Original (Turkish): Talât Sait Halman अंग्रेज़ी से अनुवाद: देवेश पथ सारिया अगर रोता हूँ मैं क्या तुम कविता में...
D H Lawrence

उखड़े हुए लोग

अनुवाद: रामधारी सिंह 'दिनकर' अकेलेपन से जो लोग दुःखी हैं, वृत्तियाँ उनकी निश्चय ही, बहिर्मुखी हैं। सृष्टि से बाँधने वाला तार उनका टूट गया है; असली आनन्द का आधार छूट गया है। उद्गम...
Langston Hughes

हारलम

Poem: Harlem by Langston Hughes Translation: Arjita Mital क्या होता है जब कोई सपना अधूरा रह जाता है? क्या वह धूप में रखी किशमिश की तरह मुरझा जाता...
John Guzlowski

युद्ध और शान्ति

कवि: जॉन गुज़लॉस्की अनुवाद: देवेश पथ सारिया युद्ध तुम्हें मार देगा और ठण्डा पड़ा छोड़ देगा तुम्हें गलियों में या खेतों में बमों से विध्वंस हुई इमारतों की ईंटों की तरह पर चिन्ता...

सात कहानियाँ – लीडिया डेविस

लघु-कहानियों के लिए चर्चित अमेरिकी कथाकार लीडिया डेविस ने निबन्ध, अनुवाद और उपन्यास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण काम किया है। फ़्रांसीसी व अन्य...
Rudyard Kipling

अगर

Poem: 'If' - Rudyard Kipling अनुवाद: प्रीता अरविन्द अगर आपके आसपास लोग ग़लतियाँ कर उसका ठीकरा आपके सर फोड़ें और आप शांत रहें, अगर सभी लोग आप पर संदेह करें...
Bonfire

अन्दर की सर्दी

Poem: 'The Cold Within' by James Patrick Kinney अनुवाद: प्रीता अरविन्द पूस की घनी अँधेरी सर्द रात में छः राहगीर जो एक-दूसरे से परिचित न थे, एक मुसाफ़िरख़ाने में बैठे...
God, Mother, Abstract

सृष्टि कथा

दार्शनिक, प्रशिक्षित भौतिकविज्ञानी और धर्मशास्त्री विलियम बी. ड्रीस 2015 से तिलबुर्ग स्कूल ऑफ ह्यूमनिटिज़ में डीन और प्रोफ़ेसर के रूप में सेवाएँ दे रहे हैं।...

दूरियाँ

Excerpt from a poem 'To Duration' by Peter Handke अनुवाद: उपमा 'ऋचा' न जाने कब से मैं दूरियों के बारे में लिखना चाहता था। कोई निबन्ध नहीं कोई नाटक नहीं कोई...
Leopold Staff

लियोपोल्ड स्टाफ की कविताएँ

Poems by Leopold Staff, a Polish poet अनुवाद: आदर्श भूषण क्या तुम? तुम मुझे बुलबुल, गुलाबों और चाँद की प्रशंसा करने से मना करते हो, ये शायद लगते हों...
Maya Angelou

मुझे मत दिखाना अपनी दया

'On Aging', a poem by Maya Angelou, from 'And Still I Rise' अनुवाद: अनुराग तिवारी जब तुम मुझे ऐसे शांत बैठे देखोगे जैसे अलमारी में छूटा कोई...
Woman Standing near River, making Love sign

मैं

'I Am A Fountain, You Are my Water' - Zeynep Hatun अनुवाद: उपमा 'ऋचा' मैं झरना हूँ, तुम पानी हो मेरा, मैं बहता हूँ तुम से तुम...

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Women at beach

मन का घर, तुमसे विलग होकर

मन का घर उसके मन के घर में गूँजती रहती हैं टूटती इच्छाओं की मौन आवाज़ें उसमें हर बालिश्त दर्ज होती जाती है छूटते जा रहे सपनों से पलायन की एक लम्बी...
Bashar Nawaz

वक़्त के कटहरे में

सुनो तुम्हारा जुर्म तुम्हारी कमज़ोरी है अपने जुर्म पे रंग-बिरंगे लफ़्ज़ों की बेजान रिदाएँ मत डालो सुनो तुम्हारे ख़्वाब तुम्हारा जुर्म नहीं हैं तुम ख़्वाबों की ताबीर से...
Giriraj Kishore

नायक

'रिश्ता और अन्य कहानियाँ' से आँगन में वह बाँस की कुर्सी पर पाँव उठाए बैठा था। अगर कुर्ता-पाजामा न पहने होता तो सामने से आदिम...
Love, Couple

नीरव की कविताएँ

1 ढहते थे पेड़ रोती थी पृथ्वी हँसता था आदमी मरती थी नदी बिलखता था आकाश हँसता था आदमी टूटता था संगीत बुझता था प्रकाश हँसता था आदमी टूट रहा है आदमी बुझ रहा है...
Dilawar Figar

दावतों में शाइरी

दावतों में शाइरी अब हो गई है रस्म-ए-आम यूँ भी शाइर से लिया जाता है अक्सर इंतिक़ाम पहले खाना उसको खिलवाते हैं भूखे की तरह फिर उसे करते...
Bharat Bhushan

मन, कितना अभिनय शेष रहा?

मन, कितना अभिनय शेष रहा? सारा जीवन जी लिया, ठीक जैसा तेरा आदेश रहा! बेटा, पति, पिता, पितामह सब इस मिट्टी के उपनाम रहे, जितने सूरज उगते देखो उससे ज़्यादा संग्राम...
Mohammad Alvi

मैं और तू

ख़ुदा-वंद... मुझ में कहाँ हौसला है कि मैं तुझसे नज़रें मिलाऊँ तिरी शान में कुछ कहूँ तुझे अपनी नज़रों से नीचे गिराऊँ ख़ुदा-वंद... मुझ में कहाँ हौसला है कि...
Vishnu Khare

अकेला आदमी

अकेला आदमी लौटता है बहुत रात गए या शायद पूरी रात बाद भी घर के ख़ालीपन को स्मृतियों के गुच्छे से खोलता हुआ अगर वे लोग...
Ambar Bahraichi

जगमगाती रौशनी के पार क्या था देखते

जगमगाती रौशनी के पार क्या था देखते धूल का तूफ़ाँ अंधेरे बो रहा था देखते सब्ज़ टहनी पर मगन थी फ़ाख़्ता गाती हुई एक शकरा पास ही...
Malkhan Singh

मुझे ग़ुस्सा आता है

मेरा माँ मैला कमाती थी बाप बेगार करता था और मैं मेहनताने में मिली जूठन को इकट्ठा करता था, खाता था। आज बदलाव इतना आया है कि जोरू मैला...
Bulbbul - a comment

सीता और काली की बाइनरी से अछूती नहीं है ‘बुलबुल’

मनोरंजन के 'तीसरे' परदे के रूप में उभरे नेटफ़्लिक्स पर आयी फ़िल्म 'बुलबुल' इन दिनों ख़ूब चर्चा में है। चर्चा का मुख्य विषय है...
Silent, Silence

इतिहास की कालहीन कसौटी

बन्‍द अगर होगा मन आग बन जाएगा, रोका हुआ हर शब्‍द चिराग़ बन जाएगा। सत्ता के मन में जब-जब पाप भर जाएगा झूठ और सच का सब अन्‍तर मिट जाएगा न्‍याय...
Waiting, Train, Girl, Window, Thinking, Alone, Lonely

बेटिकट

एक ट्रेन का सपना देखता हूँ मैं जो अतीत के किसी स्टेशन से छूटती है और बेतहाशा चलती चली जाती है समय की किसी अज्ञात दिशा में मैं सवार...
Javed Akhtar

मेले

बाप की उँगली थामे इक नन्हा-सा बच्चा पहले-पहल मेले में गया तो अपनी भोली-भाली कंचों जैसी आँखों से इक दुनिया देखी ये क्या है और वो क्या है सब उसने पूछा बाप...
Writing

समकालीन युवा लेखन पर कुछ विचार

जब भी कोई अनुभवी लेखक किसी युवा को सम्भावनाशील लेखक या कवि कहता है, वह यही बता रहा होता है कि आप एक रास्ते...
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ख़्वाबों के ब्योपारी

हम ख़्वाबों के ब्योपारी थे पर इसमें हुआ नुक़सान बड़ा कुछ बख़्त में ढेरों कालक थी कुछ अब के ग़ज़ब का काल पड़ा हम राख लिए हैं झोली...
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यूरोप की छत पर : स्विट्ज़रलैण्ड

दुनिया की नहीं तो यूरोप की छत : अपने पर्वतीय प्रदेश के कारण स्विटजरलैण्ड को प्रायः यह नाम दिया जाता था—किन्तु हिमालय को घर...
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बीस साल बाद

बीस साल बाद मेरे चेहरे में वे आँखें लौट आयी हैं जिनसे मैंने पहली बार जंगल देखा है: हरे रंग का एक ठोस सैलाब जिसमें सभी पेड़...
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अरबी बाज़ार

Short Story: 'Araby' Writer: James Joyce अनुवाद: उपमा ऋचा लेखक परिचय: आयरलैण्ड के रचनाकार जेम्स जॉयस (1882-1941) ने सिर्फ़ कहानियाँ ही नहीं लिखीं, उपन्यास भी लिखे और साहित्य...
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शरीफ़ लोग

पत्थर के कोयले से जो धुआँ उठता है उसमें एक शहर महकता है सुना है उस शहर में शरीफ़ लोग रहते हैं लेकिन शराफ़त का धुएँ से क्या नाता है यह समझ...
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