Tag: Zehra Nigah

Zehra Nigah

बस्ती में कुछ लोग निराले अब भी हैं

बस्ती में कुछ लोग निराले अब भी हैं देखो ख़ाली दामन वाले अब भी हैंदेखो वो भी हैं जो सब कह सकते थे देखो उनके मुँह...
Zehra Nigah

इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं

इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं आने वाले बरसों बाद भी आते हैंहम ने जिस रस्ते पर उसको छोड़ा है फूल अभी तक उस पर...
Zehra Nigah

एक लड़की

कैसा सख़्त तूफ़ाँ था कितनी तेज़ बारिश थी और मैं ऐसे मौसम में जाने क्यूँ भटकती थीवो सड़क के उस जानिब रौशनी के खम्भे से सर लगाए इस्तादा आने वाले...
Zehra Nigah

सुना है

सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता हैसुना है शेर का जब पेट भर जाए तो वो हमला नहीं करता दरख़्तों की घनी छाँव...
Zehra Nigah

मैं बच गई माँ

'Main Bach Gayi Maa' a nazm by Zehra Nigah मैं बच गई माँ मैं बच गई माँ तेरे कच्चे लहू की मेहँदी मेरे पोर पोर में रच गई माँ मैं...
Zehra Nigah

आज की बात

आज की बात, नई बात नहीं है ऐसी जब कभी दिल से कोई गुज़रा है, याद आई है सिर्फ़ दिल ही ने नहीं गोद में ख़ामोशी...
Zehra Nigah

एक पुरानी कहानी

किसी शहर में इक कफ़न चोर आया जो रातों को क़ब्रों में सूराख़ करके तन ए कुश्तगां से कफ़न खींच लेता आख़िर ए कार पकड़ा गया और उसको...

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हम पृथ्वी की शुरुआत से स्त्री हैं सरकारें बदलती रहीं तख़्त पलटते रहे हम स्त्री रहे विचारक आए विचारक गए हम स्त्री रहे सैंकड़ों सावन आए अपने साथ हर दूषित चीज़ बहा...
Aankhein - Sara Shagufta

पहला हर्फ़

पाकिस्तानी शायरा सारा शगुफ़्ता की नज़्मों का पहला संग्रह 'आँखें' उनकी मृत्यु के बाद सन् 1985 में प्रकाशित हुआ था। हाल ही में इसी...
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स्वीडिश कवि मैगनस ग्रेन की कविताएँ

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नेओमी शिहैब नाय की कविता ‘प्रसिद्ध’

नेओमी शिहैब नाय (Naomi Shihab Nye) का जन्म सेंट लुइस, मिसौरी में हुआ था। उनके पिता एक फ़िलिस्तीनी शरणार्थी थे और उनकी माँ जर्मन...
Shehar Se Dus Kilometer - Nilesh Raghuwanshi

किताब अंश: ‘शहर से दस किलोमीटर’ – नीलेश रघुवंशी

'शहर से दस किलोमीटर' ही वह दुनिया बसती है जो शहरों की न कल्पना का हिस्सा है, न सपनों का। वह अपने दुखों, अपने...
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श्रीविलास सिंह की कविताएँ

सड़कें कहीं नहीं जातीं सड़कें कहीं नहीं जातीं वे बस करती हैं दूरियों के बीच सेतु का काम, दो बिंदुओं को जोड़तीं रेखाओं की तरह, फिर भी वे पहुँचा देती...
Ret Samadhi - Geetanjali Shree

गीतांजलि श्री – ‘रेत समाधि’

गीतांजलि श्री का उपन्यास 'रेत समाधि' हाल ही में इस साल के लिए दिए जाने वाले बुकर प्राइज़ के लिए चयनित अन्तिम छः किताबों...
Tom Phillips

टॉम फ़िलिप्स की कविताएँ

अनुवाद: पंखुरी सिन्हा युद्ध के बाद ज़िन्दगी कुछ चीज़ें कभी नहीं बदलतीं बग़ीचे की झाड़ियाँ हिलाती हैं अपनी दाढ़ियाँ बहस करते दार्शनिकों की तरह जबकि पैशन फ़्रूट की नारंगी मुठ्ठियाँ जा...
Javed Alam Khan

जावेद आलम ख़ान की कविताएँ

तुम देखना चांद तुम देखना चांद एक दिन कविताओं से उठा ज्वार अपने साथ बहा ले जाएगा दुनिया का तमाम बारूद सड़कों पर क़दमताल करते बच्चे हथियारों को दफ़न...
Shyam Bihari Shyamal - Sangita Paul - Kantha

श्यामबिहारी श्यामल जी के साथ संगीता पॉल की बातचीत

जयशंकर प्रसाद के जीवन पर केंद्रित उपन्यास 'कंथा' का साहित्यिक-जगत में व्यापक स्वागत हुआ है। लेखक श्यामबिहारी श्यामल से उपन्यास की रचना-प्रकिया, प्रसाद जी...
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