उनमें देखी गईं सम्भावनाएँ
खोजे गए अवसर,
कब, कैसे, कहाँ
व्यवहार में लायी जा सकती थी उनकी जाति—
इसका गरिमायुक्त सावधानी के साथ
प्रयोग किया गया

उनको दो राज्यों की संधि पर
बलि चढ़ाया गया,
पुराने राजमहल में
घुटकर मर गया
उनके सपनों का राजकुमार
और
उनको बहलाया गया कि
राजसुख बड़े भाग्य से प्राप्त होता है

उनका पाठ्यक्रम बहुत सन्तुलित रखा गया—
सहनशीलता और उदारता के पाठ
इस तरह उनको रटाए गए कि
उनकी सहनशीलता
लिंगभेद पर आवाज़ न उठा सकी
और भेद करने वालों पर
ताउम्र उदार रही

उनकी सीमाएँ
कभी दहलीज़ पर समाप्त कर दी गईंं
तो कभी सुविधानुसार
एक धर्म की दहलीज़ लँघा
दूसरे धर्म में परिवर्तित कर दी गईं
और फिर
उन्हें समझाया गया कि
उनकी अपनी कोई जाति या धर्म नहीं होता

तरुणियाँ
तरिणी-सी रहीं
उनको किसी भी रंग में रंगे जाने की
सामाजिक सुविधा रखी गई!

निकी पुष्कर की कविता 'ग़ुलाम आज़ादी'

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निकी पुष्कर
Pushkarniki [email protected] काव्य-संग्रह -पुष्कर विशे'श'

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