‘Tesu Raja Ade Khade’
Ramdhari Singh Dinkar

टेसू राजा अड़े खड़े
माँग रहे हैं दही बड़े।

बड़े कहाँ से लाऊँ मैं?
पहले खेत खुदाऊँ मैं,
उसमें उड़द उगाऊँ मैं,
फसल काट घर लाऊँ मैं।
छान फटक रखवाऊँ मैं,

फिर पिट्ठी पिसवाऊँ मैं,
चूल्हा फूँक जलाऊँ मैं,
कड़ाही में डलवाऊँ मैं,
तलवार सिकवाऊँ मैं।

फिर पानी में डाल उन्हें,
मैं लूँ खूब निचोड़ उन्हें।
निचुड़ जाएँ जब सबके सब,
उन्हें दही में डालूँ तब।

नमक मिरच छिड़काऊँ मैं,
चाँदी वरक लगाऊँ मैं,
चम्मच एक मँगाऊँ मैं,
तब वह उन्हें खिलाऊँ मैं।

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Book by Ramdhari Singh Dinkar:

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रामधारी सिंह ‘दिनकर’
रामधारी सिंह 'दिनकर' (२३ सितंबर १९०८- २४ अप्रैल १९७४) हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। 'दिनकर' स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद राष्ट्रकवि के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इन्हीं दो प्रवृत्तिय का चरम उत्कर्ष हमें उनकी कुरुक्षेत्र और उर्वशी नामक कृतियों में मिलता है। उर्वशी को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार जबकि कुरुक्षेत्र को विश्व के १०० सर्वश्रेष्ठ काव्यों में ७४वाँ स्थान दिया गया।