सीख

‘The Lesson’, a poem by Maya Angelou
अनुवाद: पुनीत कुसुम

मैं बार-बार मरती हूँ,
नसें सिकुड़ती हैं, खुलती हैं जैसे
सोते हुए बच्चों की
छोटी-छोटी मुट्ठियाँ,
जीर्ण क़ब्रों,
सड़े-गले हाड़-माँस, कीड़ों-केचुओं की
स्मृतियाँ
मुझे इस चुनौती को अस्वीकारने के लिए
समझा नहीं पातीं,
मेरे चेहरे की झुर्रियों में
गहरे बसे हैं इतने वर्षों का अनुभव और कठोर पराजय,
वो धुँधला करते हैं मेरी आँखों को, फिर भी
मैं बार-बार मरती हूँ,
क्योंकि मुझे जीना बेहद पसन्द है!

यह भी पढ़ें: ‘मुझे मत दिखाना अपनी दया’

Book by Maya Angelou: