टाइटैनिक

सबके मन के
उत्तरी अटलांटिक महासागर में
कहीं डूबा पड़ा मिलता है
एक जहाज़
‘टाइटैनिक’

कहते हैं टाइटैनिक अपने
पहले सफर में डूब गया
लेकिन मन की सतह पर
रोज़ आकर तैरता है
यादों का जहाज़
‘टाइटैनिक’

जिसकी यादों की डेक पर रोज़
अनायास ही आ जाते हैं
‘जैक’ और ‘रोज़’
बाहें फैलाए
आँखों में भरते हैं
नीला आकाश और
कर देते हैं हृदय को नीला
और बज उठता है संगीत

“माई हार्ट विल गो ओन एन्ड ओन”

बर्फीले समंदर में जमी हुई आँखें
पेंसिल की नोक पर थमी हुई आँखें
लव एट फर्स्ट साइट में चटकती आँखें
पहले चुम्बन के अहसास में बन्द आँखें

बन्द कमरा, उघाड़ा बदन, सतरंगी हृदय
और कैनवास पर पेंसिल के शेड्स
पर रूहानी प्रेम की तस्वीर

बन्द ‘कार’ के शीशे पर
बाफ की परत पर आज भी
हाथ के पंजों के निशान हैं..

कहते हैं टाइटैनिक अपने
पहले सफर में डूब गया
लेकिन मन की सतह पर
रोज़ आकर तैरता हैं
यादों का जहाज़
‘टाइटैनिक’