‘Titliyaan’, a poem by Rajesh Joshi

हरी घास पर खरगोश
खरगोश की आँख में नींद
नींद में स्वप्न
चाँद का

चाँद में क्या?

चाँद में चरखा
चरखे में पोनी
पोनी में कतती
चाँदनी

चाँदनी में क्या?

चाँदनी में पेड़
पेड़ पर चिड़िया
चिड़ियों की चोंच में
संदेसा ऋतु का

ऋतु में क्या?

ऋतु में फूल
फूल पर तितलियाँ

हरी पीली लाल बैंजनी
रंगबिरंगी तितलियाँ
तितलियाँ
जैसे स्वप्न पंखदार
जैसे बहुरंगी आग के टुकड़े
उड़ते हुए

तितलियाँ
आती हैं घरों में
बिना आवाज़, बेखटके
जवान होती लड़की के बदन पर
बैठती हैं
उड़ जाती हैं

कि ‘छू लिया’
प्रेम होगा अब तुझे किसी से

तितलियाँ ही तितलियाँ
तितलियों पर आँखें
लड़की की

लड़की की आँखों में क्या?

तितलियाँ!!

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Book by Rajesh Joshi:

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राजेश जोशी
राजेश जोशी (जन्म १९४६) साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी साहित्यकार हैं। राजेश जोशी ने कविताओं के अलावा कहानियाँ, नाटक, लेख और टिप्पणियाँ भी लिखीं। साथ ही उन्होंने कुछ नाट्य रूपांतर तथा कुछ लघु फिल्मों के लिए पटकथा लेखन का कार्य भी किया। उनके द्वारा भतृहरि की कविताओं की अनुरचना भूमिका "कल्पतरू यह भी" एवं मायकोवस्की की कविता का अनुवाद "पतलून पहिना बादल" नाम से किए गए है। कई भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अँग्रेजी, रूसी और जर्मन में भी उनकी कविताओं के अनुवाद प्रकाशित हुए हैं। राजेश जोशी के चार कविता-संग्रह- एक दिन बोलेंगे पेड़, मिट्टी का चेहरा, नेपथ्य में हँसी और दो पंक्तियों के बीच, दो कहानी संग्रह - सोमवार और अन्य कहानियाँ, कपिल का पेड़, तीन नाटक - जादू जंगल, अच्छे आदमी, टंकारा का गाना।

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