नाज़िम हिकमत : रात 9 से 10 के बीच की कविताएँ

अनुवाद: मनोज पटेल (पढ़ते-पढ़ते से साभार) (पत्नी पिराए के लिए) 21 सितम्बर 1945 हमारा बच्चा बीमार है। उसके पिता जेल में हैं। तुम्हारे थके हाथों में तुम्हारा सर बहुत...

सिल्विया प्लाथ की कविता ‘डैडी’

अब और नहीं आप नहीं कर सकते, नहीं कर सकते आप अपने जूते में मुझे पैरों की तरह रखकर मुझ बेचारी अभागिन को तीस सालों से साँस लेने और छींकने...

लुइस ग्लुक की दो कविताएँ

मौन, मृत्यु और अकेलेपन से सम्वाद करती कवयित्री लुइस ग्लुक की दो कविताएँ (लुइस ग्लुक को हाल ही में साहित्य श्रेणी में नोबल पुरस्कार...

येहूदा एमिहाए की कविता ‘और हम उत्साहित नहीं होंगे’

Poem: And We Shall Not Get Excited Poet: Yehuda Amichai Translated from the Hebrew by Barbara and Benjamin Harshav अंग्रेज़ी से अनुवाद: सृष्टि ठाकुर और हम उत्साहित नहीं...

ईश्वर की देह

किताब 'आत्मा की आँखें' से कविता: डी एच लॉरेंस अनुवाद: रामधारी सिंह दिनकर ईश्वर वह प्रेरणा है, जिसे अब तक शरीर नहीं मिला है। टहनी के भीतर अकुलाता हुआ फूल, जो...

फ़्रेके राइहा की कविताएँ

Poems: Freke Räihä in Hindi translation Translation: Pankhuri Sinha मूल कविता: स्वीडिश कवि फ़्रेके राइहा अनुवाद: पंखुरी सिन्हा कवि परिचय: अट्ठारह कविता पुस्तकों के रचयिता फ़्रेके राइहा स्वीडन...

तादेऊष रूज़ेविच की कविता ‘ज़िन्दा बच गया’

'जीवन के बीचोंबीच' : तादेऊष रूज़ेविच की कविताएँ से अनुवाद: आग्नयेष्का कूच्क्येवीच-फ़्राश और कुँवर नारायण मैं चौबीस का हूँ मेरा वध होना था बच गया। खोखले हैं ये सारे...

मंजरी झर जाती है

'तसलीमा नसरीन की कविताएँ' से मूल बांग्ला से अनुवाद: मुनमुन सरकार थोड़े में ही ख़ुश हो जाती हूँ इसका मतलब यह नहीं कि छोड़े और फेंके के...

एमिली डिकिंसन की कविता ‘मृत्य के पार गमन’

Poem: 'Because I Could Not Stop For Death' Poetess: Emily Dickinson भावानुवाद: नम्रता श्रीवास्तव यद्यपि मृत्युपरांत यात्रा पर अग्रसर हो चुकी थी मैं पर याचना करके उस काल ने...

अरबी बाज़ार

Short Story: 'Araby' Writer: James Joyce अनुवाद: उपमा ऋचा लेखक परिचय: आयरलैण्ड के रचनाकार जेम्स जॉयस (1882-1941) ने सिर्फ़ कहानियाँ ही नहीं लिखीं, उपन्यास भी लिखे और साहित्य...

ओरहान वेली की कविता ‘मैं समझा नहीं सकता’

Poem: 'I Can't Tell' - Orhan Veli Kanik Translation from Original (Turkish): Talât Sait Halman अंग्रेज़ी से अनुवाद: देवेश पथ सारिया अगर रोता हूँ मैं क्या तुम कविता में...

पेरुमल मुरुगन की कविताएँ

Poems: Perumal Murugan Book: 'Songs Of A Coward' अनुवाद: आदर्श भूषण अन्त्येष्टि की ख़बर उस दिन, सड़क शमशान में तब्दील हो गयी जो आए थे चिता को अग्नि...

STAY CONNECTED

38,091FansLike
16,586FollowersFollow
22,311FollowersFollow
1,270SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Corona, Covid

उसकी आँखें खुली रहनी चाहिए थीं

(कोरोना से गुज़र गई एक अपरिचित की फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल से गुज़रते हुए) 8 मई, 2021 सत्ता है मछली की आँख और दोनों कर्ता-धर्ता अर्जुन और 'ठाकुर' बने थे चूक...
Usha Priyamvada

छुट्टी का दिन

पड़ोस के फ़्लैट में छोटे बच्चे के चीख़-चीख़कर रोने से माया की नींद टूट गई। उसने अलसाई पलकें खोलकर घड़ी देखी, पौने छह बजे...
Sudha Arora

अकेली औरत का हँसना

अकेली औरत ख़ुद से ख़ुद को छिपाती है। होंठों के बीच क़ैद पड़ी हँसी को खींचकर जबरन हँसती है और हँसी बीच रास्ते ही टूट जाती है... अकेली औरत...
Shamsher Bahadur Singh

चुका भी हूँ मैं नहीं

चुका भी हूँ मैं नहीं कहाँ किया मैनें प्रेम अभी। जब करूँगा प्रेम पिघल उठेंगे युगों के भूधर उफन उठेंगे सात सागर। किन्तु मैं हूँ मौन आज कहाँ सजे मैनें साज अभी। सरल से भी...
Franz Kafka, Milena Jesenska

मिलेना को लिखे काफ़्का के पत्रों के कुछ अंश

किताब अंश: 'लेटर्स टू मिलेना' अनुवाद: लाखन सिंह प्रिय मिलेना, काश! ऐसा हो कि दुनिया कल ख़त्म हो जाए। तब मैं अगली ही ट्रेन पकड़, वियना में...
Woman in front of a door

सुबह

कितना सुन्दर है सुबह का काँच के शीशों से झाँकना इसी ललछौंहे अनछुए स्पर्श से जागती रही हूँ मैं बचपन का अभ्यास इतना सध गया है कि आँखें खुल ही जाती...
Rohit Thakur

सोलेस इन मे

कौन आएगा मई में सांत्वना देने कोई नहीं आएगा समय ने मृत्यु का स्वांग रचा है अगर कोई न आए तो बारिश तुम आना आँसुओं की तरह दो-चार बूँदों की...
Fist, Protest, Dissent

एक छोटी-सी लड़ाई

मुझे लड़नी है एक छोटी-सी लड़ाई एक झूठी लड़ाई में मैं इतना थक गया हूँ कि किसी बड़ी लड़ाई के क़ाबिल नहीं रहा। मुझे लड़ना नहीं अब— किसी...
Saadat Hasan Manto

मंटो

मंटो के मुताल्लिक़ अब तक बहुत कुछ लिखा और कहा जा चुका है। उसके हक़ में कम और ‎ख़िलाफ़ ज़्यादा। ये तहरीरें अगर पेश-ए-नज़र...
Sahir Ludhianvi

ख़ून फिर ख़ून है

ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है ख़ून फिर ख़ून है, टपकेगा तो जम जाएगा ख़ाक-ए-सहरा पे जमे या कफ़-ए-क़ातिल पे जमे फ़र्क़-ए-इंसाफ़ पे...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)