स्थानान्तरण से त्रस्त एकान्त
खोजता है निश्चित ठौर

भीतर का कुछ
निकल भागना चाहता
नियत भार उठाने वाले कंधों
और निश्चित दूरी नापने वाले
लम्बे क़दमों को छोड़

दिन के हर टुकड़े को बकरियों की तरह ठेलकर
रात के बाड़े में यूँ धकेलना कि अब उनके मिमियाने की आवाज़ें
अवचेतन के गहरे खड्ड से बाहर न आने पाएँ

पानी छानकर पिया जाता
किन्तु एकान्त को छान
घूँट-दो-घूँट पीना भी
नहीं होता आसान

समय की छलनी में से स्मृतियों के बारीक कण अनचाहे ही अटक जाते गले में और
एकान्त की सतत् प्रवाही नदी के बीच अनायास
उग आती
जनाकीर्ण नौकाएँ।

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नितेश व्यास
सहायक आचार्य, संस्कृत, महिला पी जी कॉलेज, जोधपुर | निवास- गज्जों की गली, पूरा मौहल्ला, जोधपुर | संस्कृत विषय में विद्यावारिधि, SLET, B.ED, संस्कृत विषय अध्यापन के साथ ही हिन्दी साहित्य और विश्व साहित्य का नियमित पठन-पाठन | हिन्दी तथा संस्कृत भाषाओं में कविता लेखन । मधुमती,हस्ताक्षर वैब पत्रिका,किस्सा कोताह,रचनावली,अनुगूंज ब्लाग पत्रिका अथाईपेज,द पुरवाई ब्लाग,नवोत्पल ब्लाग पत्रिका रचयिता,साहित्यनामा आदि वैबपोर्पटल्स सहित दैनिक नवज्योति,दैनिक युगपक्ष आदि प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर रचनाऐं प्रकाशित।

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