तुम्हें दफ़नाकर जाने वाले
जानते हैं अपनी भाग-दौड़
तुम्हारी दवाइयों के लिए,
वे नहीं जानते तुम्हारे साँस लेने के परिश्रम को

वे जानते हैं गुहार
जो लगायी उन्होंने, तुम्हारे लिए
नहीं जानते हैं पुकार
जो दबकर रह गयी, तुम्हारे अंदर

तुम्हें दफ़नाकर जाने वाले
जानते हैं शोक,
रीति-रिवाज और भोज,
भूलने की प्रक्रिया
और तुम्हें याद करने का संघर्ष
तुम्हें दफ़नाकर लौटते वक़्त

वे जानते हैं चलना, तुमसे आगे
काम पर लगना

तुम्हें दफ़नाकर जाने वाले
जानते हैं तुम्हारे शब्दों की गूँज
उनके कानों में, काम करते वक़्त
अपनी हँसी में तुम्हारी हँसी की आवाज़
वे जानते हैं रोना
तुम्हारे लिए

वे जानते हैं तुम्हारे कथन
तुम्हारा जीवन
नहीं जानते तुम्हारा सत्य
तुम्हारी आख़िरी सांँस

तुम्हें दफ़नाकर जाने वाले
नहीं जानते आत्मा के अस्तित्व को
बस मानते हैं
ताकि वो जी सकें अपना जीवन, तुम्हारे बाद
तुमसे बेहतर, तुमसे ज़्यादा
कर सकें प्रेम, तुम्हारे बाद
तुमसे बेहतर, तुमसे ज़्यादा
या हत्याएँ, तुम्हारे बाद
तुमसे बेहतर, तुमसे ज़्यादा
देते रहें दान
या करते रहें उत्पीड़न
बना सकें घर
भोग सकें सत्ता
कमा सकें धन
जमा सकें अपना सिक्का, तुम्हारे बाद
तुमसे बेहतर, तुमसे ज़्यादा

तुम्हें दफ़नाकर जाने वाले
जानते हैं तुम्हारा न होना
वे नहीं जानते
न होना।

गौरव त्रिपाठी की कविता 'काट के अपने पर जाते हैं'

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