‘Tumhari Aankhein’, Hindi Kavita by Harshita Panchariya

1

मैं कुछ गहरा पढ़ना चाहती थी
और मैंने पढ़ ली

तुम्हारी आँखें।

2

तुम्हारी आँखें
संसार की सबसे
सुंदर भाषा बोलती हैं
पर

उसका कोई अनुवादक नहीं!

3

तुम्हारी आँखें ही
वह अनुवादक है
जिसे संसार की किसी
भाषा को समझने की
आवश्यकता नहीं
शायद इसलिए मैं

कोई भाषा समझना ही
नहीं चाहती।

4

चुका नहीं पाया है कोई
क़र्ज़ उन कविताओं का
जो लिखी हैं
तुम्हारी आँखों पर

नमक का स्वाद स्याही पर
कितना चढ़ा है
कभी देखना
नीले सागर पर।

यह भी पढ़ें: शिवमंगल सिंह सुमन की कविता ‘पर आँखें नहीं भरीं’

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