दो क्षणिकाएँ

सहनशीलता

उबलते हुए दूध पर
ज़रा सी
फूँक मारकर
खौलने से
बचाने वाली
औरतें
अक्सर बचा लेती है
स्त्री जाति
का सर्वोत्तम गहना।

नव-सृजन

सभ्यता के
विकास की
शृंखला में
एक दिन
संसार की
समस्त स्त्रियों को
भाषा में
परिवर्तित होना
आवश्यक है।
……..

ताकि
स्त्रीत्व के
व्याकरण से
बाँझ होती
‘सभ्यता’
फिर से
नव-सृजित
हो सके।