उड़ान

‘Udaan’, a poem by Poonam Sonchhatra

उसने कहा-
“गिरना नियति है,
संसार की प्रत्येक वस्तु गुरुत्वाकर्षण के अधीन होती है… ”

मैंने कहा-
“यह नियम राख पर लागू होता है,
अग्नि की लपटों पर नहीं!
मैं उड़ने के लिए बनी हूँ
केवल और केवल ऊपर उठने के लिए…”

बाज़ आख़िर कब घोसलें बनाते हैं?