साइंसदान कहते हैं कि
कि ढुलकते नहीं आँसू
‘वैक्यूम’ में

उसकी अनुपस्थिति से उभरे
वैक्यूम में
ढुलकते हैं आँसू उसके
रुकते नहीं…

साइंसदान भी कभी-कभी
कुछ भी कहते हैं..

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आयुष मौर्य
बस इतना ही कहना "कुछ नहीं, कुछ भी नहीं "

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