चल पड़ी चुपचाप सन-सन-सन हवा,
डालियों को यों चिढ़ाने-सी लगी,
आँख की कलियाँ, अरी, खोलो ज़रा,
हिल स्वपतियों को जगाने-सी लगी,

पत्तियों की चुटकियाँ झट दीं बजा,
डालियाँ कुछ ढुलमुलाने-सी लगीं,
किस परम आनंद-निधि के चरण पर,
विश्व-साँसें गीत गाने-सी लगीं,

जग उठा तरु-वृंद-जग, सुन घोषणा,
पंछियों में चहचहाट मच गई,
वायु का झोंका जहाँ आया वहाँ-
विश्व में क्यों सनसनाहट मच गई?

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माखनलाल चतुर्वेदी
माखनलाल चतुर्वेदी (४ अप्रैल १८८९-३० जनवरी १९६८) भारत के ख्यातिप्राप्त कवि, लेखक और पत्रकार थे जिनकी रचनाएँ अत्यंत लोकप्रिय हुईं। सरल भाषा और ओजपूर्ण भावनाओं के वे अनूठे हिंदी रचनाकार थे। प्रभा और कर्मवीर जैसे प्रतिष्ठत पत्रों के संपादक के रूप में उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जोरदार प्रचार किया और नई पीढ़ी का आह्वान किया कि वह गुलामी की जंज़ीरों को तोड़ कर बाहर आए। इसके लिये उन्हें अनेक बार ब्रिटिश साम्राज्य का कोपभाजन बनना पड़ा। वे सच्चे देशप्रमी थे और १९२१-२२ के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए जेल भी गए। आपकी कविताओं में देशप्रेम के साथ-साथ प्रकृति और प्रेम का भी चित्रण हुआ है।

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