वे बहुत पढ़ी-लिखी नहीं थीं
ताइवान में काम मिलने की ख़बर उन्हें सुना
उनके पैर छू रहा था जब मैं
मुझे आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा—
“बेटा सम्भलकर रहना तालिबान में!”

जो पढ़े-लिखे मिलते थे
खोज-ख़बर लेते थे
कुछ कुण्ठित होते थे
कुछ ‘तालिबान’ पर अटक जाते थे
सैनी क़िस्मत लाल की ठेली पर खड़े
गोलगप्पा गड़पते हुए
और ग़लती सुधारे जाने पर बेशर्मी से कहते—
“तो काईं बड़ी बात होगी?”

किताबों, अख़बारों,
असाक्षरों और शिक्षित बड़बोलों
सबके बीच
तूती बोलती थी
एक फ़सादी शैतान की

एक शान्तिप्रिय लोकतंत्र को
लोग दरकिनार किए रहते थे!

देवेश पथ सारिया की कविता 'साइकिल सवार'

किताब सुझाव:

देवेश पथ सारिया
देवेश पथ सारिया एक हिन्दी कवि-गद्यकार एवं अनुवादक हैं। कविता संकलन : अदृश्य आत्मीय की टोह में (2025), नूह की नाव (2022)।‌ कथेतर गद्य : छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी, 2022)। कहानी संग्रह : स्टिंकी टोफू (2025)। अनुवाद : सपने बुनता फाॅरमोसा : ताइवानी कविताएँ (2026), यातना शिविर में साथिनें (2023)। अन्य भाषाओं में पुस्तकें : A Toast to Winter Solstice (अंग्रेज़ी अनुवाद : शिवम तोमर)। पुरस्कार : भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार (2023), स्नेहमयी चौधरी सम्मान (2025)। अन्य भाषाओं मे अनुवाद : देवेश की रचनाओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन‌ (चीनी), स्पेनिश, रूसी, ताइवानी, नेपाली, उर्दू, बांग्ला, मराठी, पंजाबी, असमिया, भोजपुरी, राजस्थानी, हरियाणवी, गढ़वाली और कुमाऊँनी में हुआ है। संपादन : गोल चक्कर वेब पत्रिका (golchakkar.org) ईमेल : [email protected]