वे बहुत पढ़ी-लिखी नहीं थीं
ताइवान में काम मिलने की ख़बर उन्हें सुना
उनके पैर छू रहा था जब मैं
मुझे आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा—
“बेटा सम्भलकर रहना तालिबान में!”

जो पढ़े-लिखे मिलते थे
खोज-ख़बर लेते थे
कुछ कुण्ठित होते थे
कुछ ‘तालिबान’ पर अटक जाते थे
सैनी क़िस्मत लाल की ठेली पर खड़े
गोलगप्पा गड़पते हुए
और ग़लती सुधारे जाने पर बेशर्मी से कहते—
“तो काईं बड़ी बात होगी?”

किताबों, अख़बारों,
असाक्षरों और शिक्षित बड़बोलों
सबके बीच
तूती बोलती थी
एक फ़सादी शैतान की

एक शान्तिप्रिय लोकतंत्र को
लोग दरकिनार किए रहते थे!

देवेश पथ सारिया की कविता 'साइकिल सवार'

किताब सुझाव:

देवेश पथ सारिया
कवि-लेखक एवं अनुवादक। पुरस्कार— भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (2023) प्रकाशित पुस्तकें— कविता संग्रह: नूह की नाव : साहित्य अकादेमी, दिल्ली से; A Toast to Winter Solstice. कथेतर गद्य: छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी)। अनुवाद: हक़ीक़त के बीच दरार : ली मिन-युंग की कविताएँ; यातना शिविर में साथिनें : जाॅन गुज़लाॅव्स्की की कविताएँ। अन्य भाषाओं में अनुवाद/प्रकाशन: कविताओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन चायनीज़, रूसी, स्पेनिश, बांग्ला, मराठी, पंजाबी और राजस्थानी भाषा-बोलियों में हो चुका है। इन अनुवादों का प्रकाशन लिबर्टी टाइम्स, लिटरेरी ताइवान, ली पोएट्री, यूनाइटेड डेली न्यूज़, स्पिल वर्ड्स, बैटर दैन स्टारबक्स, गुलमोहर क्वार्टरली, बाँग्ला कोबिता, इराबोती, कथेसर, सेतु अंग्रेज़ी, प्रतिमान पंजाबी और भरत वाक्य मराठी पत्र-पत्रिकाओं में हुआ है। हिंदी की लगभग सभी महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का निरंतर प्रकाशन।