वे बहुत पढ़ी-लिखी नहीं थीं
ताइवान में काम मिलने की ख़बर उन्हें सुना
उनके पैर छू रहा था जब मैं
मुझे आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा—
“बेटा सम्भलकर रहना तालिबान में!”

जो पढ़े-लिखे मिलते थे
खोज-ख़बर लेते थे
कुछ कुण्ठित होते थे
कुछ ‘तालिबान’ पर अटक जाते थे
सैनी क़िस्मत लाल की ठेली पर खड़े
गोलगप्पा गड़पते हुए
और ग़लती सुधारे जाने पर बेशर्मी से कहते—
“तो काईं बड़ी बात होगी?”

किताबों, अख़बारों,
असाक्षरों और शिक्षित बड़बोलों
सबके बीच
तूती बोलती थी
एक फ़सादी शैतान की

एक शान्तिप्रिय लोकतंत्र को
लोग दरकिनार किए रहते थे!

देवेश पथ सारिया की कविता 'साइकिल सवार'

किताब सुझाव:

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देवेश पथ सारिया
कवि एवं गद्यकार।पुस्तकें— कविता संग्रह: 'नूह की नाव' (2021) साहित्य अकादेमी, दिल्ली से। कथेतर गद्य: 'छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी)’ (2022) शीघ्र प्रकाश्य। अनुवाद: हक़ीक़त के बीच दरार (2021), वरिष्ठ ताइवानी कवि ली मिन-युंग की कविताओं का अनुवाद।उपलब्धि: ताइवान के संस्कृति मंत्रालय की योजना के अंतर्गत 'फाॅरमोसा टीवी' पर कविता पाठ एवं लघु साक्षात्कार। प्रथम कविता संग्रह का प्रकाशन साहित्य अकादेमी की नवोदय योजना के अंतर्गत।अन्य भाषाओं में अनुवाद/प्रकाशन: कविताओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन चायनीज़, रूसी, स्पेनिश, बांग्ला, मराठी, पंजाबी और राजस्थानी भाषा-बोलियों में हो चुका है। इन अनुवादों का प्रकाशन लिबर्टी टाइम्स, लिटरेरी ताइवान, ली पोएट्री, यूनाइटेड डेली न्यूज़, बाँग्ला कोबिता, कथेसर, सेतु अंग्रेज़ी, प्रतिमान पंजाबी, भरत वाक्य मराठी और पोयमहंटर पत्र-पत्रिकाओं में हुआ है।साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन: हंस, नया ज्ञानोदय, वागर्थ, कथादेश, परिकथा, कथाक्रम, पाखी, अकार, आजकल, वर्तमान साहित्य, बनास जन, मधुमती, बहुमत, अहा! ज़िन्दगी, कादंबिनी, समयांतर, समावर्तन, अक्षरा, बया, उद्भावना, जनपथ, नया पथ, कथा आदि।सम्प्रति: ताइवान में खगोल शास्त्र में पोस्ट डाक्टरल शोधार्थी। मूल रूप से राजस्थान के राजगढ़ (अलवर) से सम्बन्ध।

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