एक कलम..

कुछ अलफ़ाज़..

हंसीं ख्वाहिशों की कश्मकश ।

बस ज़िन्दगी यूं ही कट रही..

कश-ब-कश ।

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सोनाली सिन्हा
There is nothing to recite

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