ये वक़्त का खेल है यारा
कभी शाम कभी सवेरा
कुछ हमारे बस में नहीं
कभी हम खुद के बस में नहीं
पर बस कर कभी कहीं रुक मत जाना
काले बादलों के अंधेरे से घबरा ना जाना
इसे सावन का इशारा सोच झूम जाना
फिर देख सामने मंजिल नजर आएगी तूझे
हर पल जिंदगी मुस्कुराके गले लगाएगी तूझे…

Previous articleमौन
Next articleबात कुछ हम से बन न आई आज
रश्मि जैन
रश्मि जैन हृदय से एक अन्वेशक रही हैं जो अपनी लेखन के माध्यम से स्वयं की खोज कर खुद को तराशने निकल पड़ी हैं। उनका लेखन प्रायः रूप से नारी शक्ति पर प्रकाश डाल, उनकी स्वतंत्रता, सशक्तिकरण और समानता को उजागर करता है। उनके लेखन में विविध विषयों के साथ साथ आपको जीवन मार्गदर्शन से संबंधित काफी प्रेरणादायक रचनाएं भी पढ़ने को मिलेंगी।वे अपने कविताओं के माध्यम से ना केवल लोगों के दिलों में घर कर बल्कि अपने पाठकों के अंतः मन को छू अपनी छाप छोड़ जाना चाहती हैं।उनका मानना है लेखन एक कला है और इस कला को सृजन करना उन्हें अति प्रिय है। यह मानो कैन्वस पर अपनी भावनाओं को सजीव रूप से चित्रित करना जैसा प्रतीत होता हो। उनका मानना है कलम सबसे शक्तिशाली शस्त्र और लेखन सबसे शुध एवं पावन उपचार का माध्यम है। अपने मनोभाव को एक कागज़ के टुकड़े पर बहने देना किसी जादुई अनुभव से कम नहीं! शायद अपने अंतर्मन की आवाज का बाहरी बाहरी दुनिया से संबंध स्थापित करने का इससे बेहतर कोई जोड़ नहीं।उन्हें नए नए परीक्षण और अध्ययन करना अत्यंत प्रिय है। वे प्रकृति प्रेमी एवं साहस और उत्साह से भरे कार्यों में रुचि रखती हैं।रश्मि की रचनाएं कई विविध मंचों पर ‘प्रमुख लेख’ (Featured Post) के रूप में प्रकाशित की गयी हैं जैसे कि Women’s Web, Momspresso, Storymirror, इत्यादि।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here