कवि: जॉन गुज़लॉस्की
अनुवाद: देवेश पथ सारिया

युद्ध तुम्हें मार देगा
और ठण्डा पड़ा छोड़ देगा तुम्हें
गलियों में
या खेतों में
बमों से विध्वंस हुई इमारतों की
ईंटों की तरह

पर चिन्ता न करो
फिर शान्ति आएगी
तुम्हें दफ़ना देगी वह
और बैठ जाएगी तुम्हारे ऊपर
तुम्हारी माँ की तरह रोती हुई,
दुआ माँगती हुई
तुम्हारी वापसी की

बुदबुदाएगी
जैसे कि वह करती थी तब
जब तुम लड़के थे,
नाश्ते से पहले
धारा में अपने
मुँह-हाथ धोते थे

वह रोएगी
जब तक
ईश्वर एक चमत्कार न कर दे
और तुम उठ जाओगे
सुनहरी किरणों
और चहचहाते पक्षियों के बीच

और फिर
युद्ध लौट आएगा
और तुम्हें मार देगा।

देवेश पथ सारिया
देवेश पथ सारिया एक हिन्दी कवि-गद्यकार एवं अनुवादक हैं। कविता संकलन : अदृश्य आत्मीय की टोह में (2025), नूह की नाव (2022)।‌ कथेतर गद्य : छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी, 2022)। कहानी संग्रह : स्टिंकी टोफू (2025)। अनुवाद : सपने बुनता फाॅरमोसा : ताइवानी कविताएँ (2026), यातना शिविर में साथिनें (2023)। अन्य भाषाओं में पुस्तकें : A Toast to Winter Solstice (अंग्रेज़ी अनुवाद : शिवम तोमर)। पुरस्कार : भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार (2023), स्नेहमयी चौधरी सम्मान (2025)। अन्य भाषाओं मे अनुवाद : देवेश की रचनाओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन‌ (चीनी), स्पेनिश, रूसी, ताइवानी, नेपाली, उर्दू, बांग्ला, मराठी, पंजाबी, असमिया, भोजपुरी, राजस्थानी, हरियाणवी, गढ़वाली और कुमाऊँनी में हुआ है। संपादन : गोल चक्कर वेब पत्रिका (golchakkar.org) ईमेल : [email protected]