Poem: ‘What It Is’ – Erich Fried
अनुवाद: पुनीत कुसुम

यह बकवास है
तर्क कहता है
जो है, सो है
कहता है प्रेम

यह आपदा है
आकलन कहता है
यह दर्द के सिवा कुछ भी नहीं
कहता है डर
यह है निराशाजनक
परख कहती है
जो है, सो है
कहता है प्रेम

यह बेतुका है
अभिमान कहता है
यह है मूर्खतापूर्ण
कहती है सतर्कता
यह असम्भव है
अनुभव कहता है
जो है, सो है
कहता है प्रेम!

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