वो जो नीली आँखों वाली लड़की
कभी मिल जाय तो उसे बताना

गाँव की खुली हवा में
अब भी गूँजती है
उसकी मधुर हँसी

गाँव की बहती नदी किनारे
उस अमरूद के पेड़ के
कच्चे अमरूद पक गये हैं
और
तुम्हारे इंतजार में हैं

वहीं गाँव चौराहे पर गुब्बारेवाला
अब सात रंग से ज्यादा
आठवें रंग का
एक नया गुब्बारा
अपनी साइकिल को बाँध
तुम्हारी चाल
के ऊपर आज भी एक
नयी धुन गाता है

शाम मंदिर के घंटे संग
ढोल बजाता वो लड़का
तुम्हारे आने पे खुश होकर
तुम्हें ताकना चाहता है

इन सब के बीच
तुम्हारी पिछली टेबल पर बैठ
तुम्हारे बालों का वो
फूल हलके से चुराता था
वो लड़का क्या तुम्हें याद है
किसी भी प्रश्न के जवाब में
तुम्हें अड़ा देख अपनी हलकी आवाज से सारे जवाब बतीयाता था

न जाने रात में जाग-जाग कर क्या लिखता था
सुना है
उन्हीं महकते खतों की
‘गुलाबी किताब’
आयी है बाजार में

अब सारा शहर ढूँढ रहा है
वो नीली आँखों वाली लड़की…

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