एकता नाहर

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Recent Posts

Kishwar Naheed

ग्लास लैंडस्केप

अभी सर्दी पोरों की पहचान के मौसम में है इससे पहले कि बर्फ़ मेरे दरवाज़े के आगे दीवार बन जाए तुम क़हवे की प्याली से उठती...
Paash

भारत

भारत— मेरे सम्मान का सबसे महान शब्द जहाँ कहीं भी प्रयोग किया जाए बाक़ी सभी शब्द अर्थहीन हो जाते हैं इस शब्द के अर्थ खेतों के उन बेटों में...
Chandrakant Devtale

तुम्हारी आँखें

ज्वार से लबालब समुद्र जैसी तुम्हारी आँखें मुझे देख रही हैं और जैसे झील में टपकती हैं ओस की बूँदें तुम्हारे चेहरे की परछाईं मुझमें प्रतिक्षण और यह सिलसिला...
Swayam Prakash

चौथा हादसा

मेरा तबादला जैसलमेर हो गया था और वहाँ की फ़िज़ा में ऐसा धीरज, इतनी उदासी, ऐसा इत्मीनान, इस क़दर अनमनापन, ऐसा 'नेचा' है कि...
Sharad Billore

हम आज़ाद हैं

सतरंगे पोस्टर चिपका दिए हैं हमने दुनिया के बाज़ार में कि हम आज़ाद हैं। हम चीख़ रहे हैं चौराहों पर हम आज़ाद हैं हम आज़ाद हैं क्योंकि हमने भूख से मरते क़र्ज़ के नीचे...
Dharmvir Bharati

थके हुए कलाकार से

सृजन की थकन भूल जा देवता अभी तो पड़ी है धरा अधबनी! अभी तो पलक में नहीं खिल सकी नवल कल्पना की मधुर चाँदनी, अभी अधखिली ज्योत्सना की...
Majaz Lakhnavi

नहीं ये फ़िक्र कोई रहबर-ए-कामिल नहीं मिलता

नहीं ये फ़िक्र कोई रहबर-ए-कामिल नहीं मिलता कोई दुनिया में मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल नहीं मिलता कभी साहिल पे रहकर शौक़ तूफ़ानों से टकराएँ कभी तूफ़ाँ में रहकर फ़िक्र है...
Ahmad Nadeem Qasmi

कौन कहता है कि मौत आयी तो मर जाऊँगा

कौन कहता है कि मौत आयी तो मर जाऊँगा मैं तो दरिया हूँ, समुंदर में उतर जाऊँगा तेरा दर छोड़ के मैं और किधर जाऊँगा घर में...
Darkness, Stairs

गिरना

आपाधापी में गुज़रते समय से गुज़रकर लगता है कि हम मनुष्य नहीं रहे समय हो चले हैं हम बस बीत रहे हैं—लगातार। हमारा बीतना किसी निविड़ अन्धकार में...
Woman india

तरुणियाँ

उनमें देखी गईं सम्भावनाएँ खोजे गए अवसर, कब, कैसे, कहाँ व्यवहार में लायी जा सकती थी उनकी जाति— इसका गरिमायुक्त सावधानी के साथ प्रयोग किया गया उनको दो राज्यों की...
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