“कला व्यवस्थित चित्त की वस्तु है।”

 

“जागती हुई चींटी की शक्ति सोते हुए हाथी से अधिक होती है।”

 

“मृत्यु क्या है? अस्तित्व का अन्त!”

 

“माणिक पर धूल रहने से क्या वह माणिक नहीं रहता?”

 

“भाग्य का अर्थ है, मनुष्य की विवशता।”

 

“कंचन की खान से लौह उत्पन्न नहीं हो सकता।”

 

“न्याय व्यक्ति की इच्छा का अनुसरण नहीं करता।”

 

“परलोक में अधिक भोग का अवसर पाने की कामना से किया गया त्याग, त्याग नहीं रहता।”

 

“प्रयोजन से हीन कला, मोहक रूप रंग लिए मिट्टी के फल के समान है।”

 

“अनेक विरोधी तत्वों का समुच्चय ही जीवन है।”

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यशपाल
यशपाल (३ दिसम्बर १९०३ - २६ दिसम्बर १९७६) का नाम आधुनिक हिन्दी साहित्य के कथाकारों में प्रमुख है। ये एक साथ ही क्रांतिकारी एवं लेखक दोनों रूपों में जाने जाते है। प्रेमचंद के बाद हिन्दी के सुप्रसिद्ध प्रगतिशील कथाकारों में इनका नाम लिया जाता है। अपने विद्यार्थी जीवन से ही यशपाल क्रांतिकारी आन्दोलन से जुड़े, इसके परिणामस्वरुप लम्बी फरारी और जेल में व्यतीत करना पड़ा। इसके बाद इन्होने साहित्य को अपना जीवन बनाया, जो काम कभी इन्होने बंदूक के माध्यम से किया था, अब वही काम इन्होने बुलेटिन के माध्यम से जनजागरण का काम शुरु किया।