1

बिन्नो आज पकड़े थी
सुबह से ज़िद
अम्मा मैं मेला जाऊँगी
अम्मा के सिर पर है
कामों का मेला
पिता गए हैं खेतों में
कौन ले जाए बिन्नो को मेला
बिन्नो खाना नहीं खाती
बैठी है द्वारे मुँह फुलाए

आए हैं पड़ोस के बुल्ली चाचा
बोले, काहे नहीं चहक रही चिड़िया मेरी
ज़िद्दी हो गई है… मेला जाना है
सानी सने हाथों से अम्मा बोली
इतनी सी बात!
बोलो बिन्नो
चाचा के काँधे चढ़ चलोगी मेले
बिन्नो के पर उग आए
बोली, बाल बांध दो अम्मा
अम्मा ने चोटी कर बांध दिए
लाल रिबन के बड़े फूल

मेले से लौटी है बिन्नो
लेकर कुछ खिलौने और मिठाई
बालों के फूल मुरझाए हैं
अब बिन्नो कभी ज़िद नहीं करती

2

बदल रहा है लल्ली का गाँव
लल्ली भी जाती है अब
भाई के साथ स्कूल
करती है अंग्रेज़ी में दिनभर गिटपिट
लल्ली है कक्षा में सबसे होनहार
कहते हैं अंग्रेज़ी के मास्टर जी

चिड़िया कढ़ा बस्ता झुलाते
जाते हुए लल्ली कहती है
माँ तू देखना
मैं ज़िले में अव्वल आऊँगी
मास्टर जी ने बुलाया है घर
पढ़ाने कुछ ज़रूरी पाठ
लौटने पर बस्ते पर है
पर कतरी चिड़िया
लल्ली तब से गुमसुम है रहती
न अंग्रेज़ी और न ही हिंदी में
वह अब कुछ कहती है

3

स्कूटर कार बाइक चलाती प्रीता
नहीं पहनती सूट सलवार
झट ला देती है
दादी की जोड़ों की दवा
दादा के लिए पान बहार
ऊँची एड़ी की चप्पल में
ठक-ठक शोर मचाती
अपने चार दोस्तों संग
जन्मदिन मनाने गई प्रीता
अपनी गाड़ी से नहीं लौटी
दो दिन बाद रात अंधियारे में
भैया और पापा थाने से लाए
नंगे पाँव लंगड़ाती प्रीता को
ऊँची एड़ी की चप्पल जाने कहाँ छूटी
अब नहीं जाती प्रीता कभी बाहर
प्रीता अब जन्मदिन भी नहीं मनाती

4

सरला थी घर भर की लाड़ो
चहकती सुबह से शाम
भरे पूरे घर में
खेल खिलौने में डूबे बचपन
के कुछ खेल
छोड़ गए हैं उसके मन पर
कुछ ऐसे स्याह निशान
अपनी बिटिया के लिए सरला
रहती है अब हर पल चिन्तित
बिटिया झुँझलाती है और
तुतलाते हुए कहती है
माँ, तू मुझे किसी भी भैया संग
खेलने क्यों नहीं देती?

5

आज बिन्नो ने ज़िद पकड़ी
सच कहने की
आज प्रीता घर से फिर बाहर निकली
आज फिर लल्ली हिम्मत कर
गुनगुन बन कड़वा बोली
कुछ बोले गुनगुन को सच्चा
कुछ ने कहा गुनगुन को झूठ
प्रश्न यह कि
हम कितनी गुनगुन ठुकराएँगे
घर-घर एक गुनगुन रहती है।

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डॉ. निधि अग्रवाल
डॉ. निधि अग्रवाल पेशे से चिकित्सक हैं। लमही, दोआबा,मुक्तांचल, परिकथा,अभिनव इमरोज आदि साहित्यिक पत्रिकाओं व आकाशवाणी छतरपुर के आकाशवाणी केंद्र के कार्यक्रमों में उनकी कहानियां व कविताएँ , विगत दो वर्षों से निरन्तर प्रकाशित व प्रसारित हो रहीं हैं। प्रथम कहानी संग्रह 'फैंटम लिंब' (प्रकाशाधीन) जल्द ही पाठकों की प्रतिक्रिया हेतु उपलब्ध होगा।

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