झुम्पा लाहिड़ी – कुछ पंक्तियाँ/उद्धरण

झुम्पा लाहिड़ी – कुछ पंक्तियाँ/उद्धरण

(अनुवाद: अर्चना कंसल)

“किसी किताब का पहला वाक्य हाथ मिलाने जैसा है, या शायद एक आलिंगन।”

“किताबों की यही खासियत है। वे आपको बिना आपके पाँव हिलाए यात्रा कराती हैं।”

“एक तकिया और कम्बल बाँधो और जितना हो सके दुनिया को देखो, आपको इसका अफ़सोस नहीं होगा।”

“याद करो कि तुमने और मैंने यह यात्रा उस जगह तक साथ तय की है, जिसके आगे जाने के लिए कोई स्थान नहीं बचा था।”

“किताबें सबसे अच्छा माध्यम हैं – व्यक्तिगत, विचारशील, विश्वसनीय – यथार्थ को जीतने का।”

“कल्पना ही एकमात्र तरीका मैंने जानती हूँ जिससे एक इंसान दूसरे इंसान के मष्तिष्क में वास कर सकता है।”

“उसके पास अपने जीवन को स्वीकार करने की प्रतिभा है।”

“ख़त्म होते रहस्यों की दुनिया में, ‘अज्ञात’ क़ायम रहता है।”

“जितना अधिक मैं अपूर्ण महसूस करती हूँ, उतना ही अधिक सजीव!”

“करो जो मैं कभी नहीं करूँगी।”

■■■

Random Posts:

Recent Posts

आदत

आदत

कविता संग्रह 'लौटा है विजेता' से मरदों ने घर को लौटने का पर्याय बना लिया और लौटने को मर जाने…

Read more
नतीजा

नतीजा

पुरबी दी के सामने उद्विग्‍न भाव से रूमा ने 'होम' की बच्चियों की छमाही परीक्षा के कार्ड सरका दिए। नतीजे…

Read more
चिरश्री

चिरश्री

अभी तो हुई थी हमारी मुलाक़ात पिछली रात विजय इंटरनेशनल के भीतरी प्रांगण में कोणार्क से कानों-कान आयी छोटी-सी ख़बर…

Read more

Featured Posts

मैं पाँचवे का दोषी हूँ

मैं पाँचवे का दोषी हूँ

'मैं पाँचवे का दोषी हूँ' - विशेष चन्द्र 'नमन' शाम के लिए पिघली है धूप लौटा है सूरज किसी गह्वर…

Read more
सा रे गा मा ‘पा’किस्तान

सा रे गा मा ‘पा’किस्तान

सा रे गा मा 'पा'किस्तान - शिवा सामवेद से जन्मे सुरों को लौटा दो हिन्दुस्तान को और कह दो पाकिस्तान से…

Read more
प्यार मत करना

प्यार मत करना

'प्यार मत करना' - कुशाग्र अद्वैत जिस शहर में पुश्तैनी मकान हो बाप की दुकान हो गुज़रा हो बचपन हुए…

Read more

Leave a Reply

Close Menu
error: