झुम्पा लाहिड़ी – कुछ पंक्तियाँ/उद्धरण

(अनुवाद: अर्चना कंसल)

“किसी किताब का पहला वाक्य हाथ मिलाने जैसा है, या शायद एक आलिंगन।”

“किताबों की यही खासियत है। वे आपको बिना आपके पाँव हिलाए यात्रा कराती हैं।”

“एक तकिया और कम्बल बाँधो और जितना हो सके दुनिया को देखो, आपको इसका अफ़सोस नहीं होगा।”

“याद करो कि तुमने और मैंने यह यात्रा उस जगह तक साथ तय की है, जिसके आगे जाने के लिए कोई स्थान नहीं बचा था।”

“किताबें सबसे अच्छा माध्यम हैं – व्यक्तिगत, विचारशील, विश्वसनीय – यथार्थ को जीतने का।”

“कल्पना ही एकमात्र तरीका मैंने जानती हूँ जिससे एक इंसान दूसरे इंसान के मष्तिष्क में वास कर सकता है।”

“उसके पास अपने जीवन को स्वीकार करने की प्रतिभा है।”

“ख़त्म होते रहस्यों की दुनिया में, ‘अज्ञात’ क़ायम रहता है।”

“जितना अधिक मैं अपूर्ण महसूस करती हूँ, उतना ही अधिक सजीव!”

“करो जो मैं कभी नहीं करूँगी।”

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