मार्क ग्रेनिअर – कुछ पंक्तियाँ/उद्धरण

मार्क ग्रेनिअर – कुछ पंक्तियाँ/उद्धरण

(अनुवाद: रति सक्सेना)

“हर पेड़ बरसात की कामना रखता है।”

“किसी मृत व्यक्ति की बुराई करना उसे जीवित रखने का बढ़िया तरीका है।”

“मित्रों! कोई ना कोई रहस्य हर कोई पालता है।”

“आला जिंदगी, और कोई तरीका है?”

“वे दो संवेदनाएँ जो मेरे मुँह में हमेशा रहती हैं, वे हैं – पहले चुंबन की खूबसूरत झनझनाहट और पहले घोंघे का स्वाद।”

“नींद का मटमैला रंग, और इन्हें रंगतश्तरी में मिलाता मन।”

“हर कोई रूपकालंकार की तारीफ करता है, तभी तो हम समंदर से मोहित हो जाते हैं।”

“छोटी पत्रिकाएँ घृणास्पद चिल्लाती हैं – जानवर – व्हेल… लटौरा और लकड़बग्घे के लिए न भूले जाने वाली तौहीन है।”

“जातिवाद पागल भेड़ का सहारा है, जो बदले के लिए अपनी ही ऊन उधेड़ लेती हैं, आँखों में बदले की भावना लिए।”

“सबसे उम्दा प्रेम (काम) हास्य के करीब होता है, कुछ मिनिटों में, क्षणों में, एक बदनुमा हिमशिला छोटे-छोटे गड्ढों में बदल जाती है, एक कलदार पुल सीधे नीचे एक किले पर उतरता है, जो कि उछाह से भरा गढ़ में बदल जाता है… महान सात्विक जमीन के लिए कोई आशा नहीं।”

■■■

Random Posts:

Recent Posts

नन्ही पुजारन

नन्ही पुजारन

'नन्ही पुजारन' - मजाज़ लखनवी इक नन्ही मुन्नी सी पुजारन पतली बाँहें पतली गर्दन भोर भए मंदिर आई है आई…

Read more
घाटे का सौदा

घाटे का सौदा

'घाटे का सौदा' - सआदत हसन मंटो दो दोस्तों ने मिलकर दस-बीस लड़कियों में से एक लड़की चुनी और बयालीस…

Read more
पेट की खातिर

पेट की खातिर

'पेट की खातिर' - विजय 'गुंजन' उन दोनों के चेहरों पर उदासी थी। आपस में दोनों बहुत ही धीमी आवाज…

Read more

Featured Posts

मैं पाँचवे का दोषी हूँ

मैं पाँचवे का दोषी हूँ

'मैं पाँचवे का दोषी हूँ' - विशेष चन्द्र 'नमन' शाम के लिए पिघली है धूप लौटा है सूरज किसी गह्वर…

Read more
सा रे गा मा ‘पा’किस्तान

सा रे गा मा ‘पा’किस्तान

सा रे गा मा 'पा'किस्तान - शिवा सामवेद से जन्मे सुरों को लौटा दो हिन्दुस्तान को और कह दो पाकिस्तान से…

Read more
प्यार मत करना

प्यार मत करना

'प्यार मत करना' - कुशाग्र अद्वैत जिस शहर में पुश्तैनी मकान हो बाप की दुकान हो गुज़रा हो बचपन हुए…

Read more

Leave a Reply

Close Menu
error: