विवरण: कविता की वर्तमान आलोचना की स्थिति को देखते हुए सुधीर रंजन सिंह की कविता के प्रस्थान के बाद कविता की समझ आश्वस्त करती है कि कविता-आलोचना की सुदृढ़ परम्परा अभी बची हुई है। इस तरह यह पुस्तक कविता की ही समझ नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति की सृजनात्मकता और सिद्धान्तों द्वारा निर्मित द्वैत के भेद को खोलती है जिस पर कविता के भविष्य का पाठ भी निर्भर करता है।

  • Format: Hardcover
  • Publisher: Vani Prakashan (2018)
  • ISBN-10: 9387889378
  • ISBN-13: 978-9387889378
पोषम पा
सहज हिन्दी, नहीं महज़ हिन्दी...