राजेश्वर वशिष्ठ कृत ‘प्रेम का पंचतंत्र’

nayi kitaab - prem ka panchtantra

विवरण: कोई प्रेयसी क्षण भर के लिए भी नहीं लौटाती उसे लिखे गये वे प्रेम-पत्र जिन्हें कभी तकिये के लिहा़फ में तो कभी वैनिटी-केस में छिपाया गया था। उन पत्रों में शब्दबद्ध हैं हृदय की धड़कनें और समय का इतिहास जिसमें पल्लवित, पुष्पित हुआ था वह अद्भुत प्रेम। शैतान चिड़िया ने सुनेत्रा के इन पत्रों को चुराकर चुपके से मुझ तक पहुँचाया है। ताकि सब बाँच सकें प्रेम का पंचतंत्र। शुक्रिया चिड़िया!

सुनेत्रा सीरीज़ के लव नोट्स आपने बेहद पसंद किए हैं। इन में से कुछ आपने फेसबुक पर भी पढ़े हैं। आप मित्रों का आग्रह था कि इन्हें पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया जाए ताकि वे इन्हें अपने पास संजो कर रख सकें। चिड़िया, पेड़, गिलहरी, बहेलिया, नदी, पहाड़ और जंगलों के बीच यह प्रेम का पंचतंत्र फलता-फूलता है। प्रेम तो स्थाई भाव है ही, इन नोट्स में प्रकृति संरक्षण का संदेश भी है।

इस पुस्तक का प्रकाशन रश्मि प्रकाशन ने बहुत सुरुचिपूर्ण तरीके से किया है। आवरण चित्र प्रसिद्ध पेंटर और काशी विद्यापीठ की ललित कला विभाग की आचार्य डॉ. मंजुला चतुर्वेदी ने बनाया है।

  • Format: Paperback
  • Publisher: Rashmi prakashan pvt. ltd. (2018)
  • ISBN-10: 9387773108
  • ISBN-13: 978-9387773103

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