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विवरण: प्रोस्तोर ( विस्तार ) एम. एम. चन्द्रा का दूसरा लघु उपन्यास है। प्रोस्तोर का अर्थ है विस्तार। प्रोस्तोर’ (विस्तार) लघु उपन्यास, 1990 के दशक की एक सच्ची घटना पर आधारित है। इतिहासकारों का मानना है कि 1990 के दशक में पूरी दुनिया में एक नये युग का सूत्रपात हो चुका था। उसी समय में कुछ लोग इतिहास के अंत की घोषणा कर चुके थे। वैश्वीकरण, निजीकरण और उदारीकरण के नये नारों के साथ भारत में नई आर्थिक नीतियों के लागू होने की शुरूआत हुई। भारत भी इस बदलाव से अछूता नहीं रहा। नई आर्थिक नीतियों के कारण भारतीय समाज का ढांचा पूरी तरह बदलने लगा, जिसका सबसे ज्यादा तात्कालिक प्रभाव मजदूर वर्ग पर पड़ा। यह वही दशक था, जब एक तरफ विदेशी कंपनियों के लिए सरकारी कारपेट बिछाए जा रहे थे तो दूसरी तरफ स्वदेशी आन्दोलन भी चल रहा था। एक तरफ मंदिर आन्दोलन चल रहा था, तो दूसरी तरफ मजदूर आन्दोलन भी बड़े पैमाने हो रहे थे. इसी पृष्ठभूमि में हजारों उघोंग बंद हो गये . इन्हीं उधोगो में से एक सहकारी धागा मिल भी बंद हो जाती है. सहकारी धागा मिल के बन्द होने पर पूरा कस्बा खण्डहर होने लगता है। मजदूर वर्ग धागामिल चलवाने के लिए संघर्ष करता है। मजदूर यूनियन जब अपने कदम पीछे खींच लेती है। ऐसे समय में अराजक माने जाने वाले युवा बालक पूरे आंदोलन का नेतृत्व करते हैं। । बचपन से जवानी की दहलीज पर कदम रखने वाली एक पीढ़ी के सपने और उनको पूरा करने की जद्दोजहद ही इस लघु उपन्यास का विषय वस्तु है।

  • Name: Prostor Hindi PB
  • Author: M M Chandra
  • Publisher:  Diamond Books
  • Pages: 128
  • SKU: 9789352787586
  • Language: Hindi
  • Format: Paperback

इस किताब को खरीदने के लिए ‘प्रोस्तोर’ पर या नीचे दी गयी इमेज पर क्लिक करें!

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Posham Pa

भाषाओं को भावनाओं को आपस में खेलना पोषम-पा चाहिए खेलती हैं चिड़िया-उड़..।

1 Comment

  • UI UX Design Training · January 5, 2018 at 4:47 pm

    Blogging is that the new poetry. I notice it terrific and wonderful in some ways.

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